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बूंदाबांदी से बढ़ी ठंड, दिन भर छाये रहे बादल
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बदायूं। दिसंबर और जनवरी में तो मौसम इतना खराब नहीं रहा, लेकिन जाते-जाते सर्दी हर किसी को परेशान किए हुए है। बीते कई रोज से मौसम पटरी पर नहीं आ रहा है। बुधवार की सुबह आठ बजे के बाद से ही आसमान में काले बादल घिरने लगे और फिर बूंदाबांदी होने लगी। हालांकि बूंदाबांदी कुछ ही समय तक ही रही, किंतु स्कूल जा रहे बच्चों और शिक्षकों को जरूर कुछ समय के लिए लेट कर दिया। दिन भर बादल छाए रहने के साथ ठंडी हवा भी चलती रही। शाम को सर्दी और ज्यादा बढ़ गई।
आमतौर पर फरवरी माह में सर्दी धीरे-धीरे विदाई की ओर जाने लगती है। होली के नजदीक पहुंचने तक लोग कुछ हद तक गर्मी महसूस करने लगते हैं, लेकिन बीते कुछ दिनों से मौसम का मिजाज पूरी तरह से बिगड़ा चल रहा है। करीब 10 दिन से रोजाना ही बादल छा जाते हैं। इस दौरान एक-दो दिन बरसात भी हुई। मंगलवार की रात में मौसम ठीक लग रहा, किंतु बुधवार की सुबह एकाएक मौसम ने अपना मिजाज बदलना शुरू कर दिया। आठ बजे के आसपास बादल छाए और फिर बूंदाबांदी होने लगी। चूंकि उस समय स्कूली बच्चे घरों से निकलने लगते हैं, सो बहुत से बच्चे बूंदाबांदी के बीच ही छाता लगाकर स्कूल गए। शिक्षक भी कुछ परेशान देखे गए। हालांकि कुछ ही देर में बूंदाबांदी रुक गई, किंतु बादल पूरे दिन छाए रहे। शाम को सर्दी और बढ़ गई।
...अब किसान इंद्रदेवता से कर रहे हैं शांत रहने की प्रार्थना
बहुत से किसानों की आलू और सरसों की पकी हुई फसल खेतों में खड़ी है। यदि बरसात होती है तो यह फसलें ज्यादा प्रभावित होंगी। इनकी पैदावार करने वाले किसान इंद्रदेवता से यही प्रार्थना कर रहे हैं कि अब बारिश न करें, नहीं तो उन्हें दोहरी मार झेलनी पड़ेगी।
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आमतौर पर फरवरी माह में सर्दी धीरे-धीरे विदाई की ओर जाने लगती है। होली के नजदीक पहुंचने तक लोग कुछ हद तक गर्मी महसूस करने लगते हैं, लेकिन बीते कुछ दिनों से मौसम का मिजाज पूरी तरह से बिगड़ा चल रहा है। करीब 10 दिन से रोजाना ही बादल छा जाते हैं। इस दौरान एक-दो दिन बरसात भी हुई। मंगलवार की रात में मौसम ठीक लग रहा, किंतु बुधवार की सुबह एकाएक मौसम ने अपना मिजाज बदलना शुरू कर दिया। आठ बजे के आसपास बादल छाए और फिर बूंदाबांदी होने लगी। चूंकि उस समय स्कूली बच्चे घरों से निकलने लगते हैं, सो बहुत से बच्चे बूंदाबांदी के बीच ही छाता लगाकर स्कूल गए। शिक्षक भी कुछ परेशान देखे गए। हालांकि कुछ ही देर में बूंदाबांदी रुक गई, किंतु बादल पूरे दिन छाए रहे। शाम को सर्दी और बढ़ गई।
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...अब किसान इंद्रदेवता से कर रहे हैं शांत रहने की प्रार्थना
बहुत से किसानों की आलू और सरसों की पकी हुई फसल खेतों में खड़ी है। यदि बरसात होती है तो यह फसलें ज्यादा प्रभावित होंगी। इनकी पैदावार करने वाले किसान इंद्रदेवता से यही प्रार्थना कर रहे हैं कि अब बारिश न करें, नहीं तो उन्हें दोहरी मार झेलनी पड़ेगी।
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