{"_id":"5c2df859bdec2256ac5030a3","slug":"21546516569-budaun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब सड़क पर नहीं दिखेंगे घुमंतु पशु, गोशाला में मिलेगा आसरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब सड़क पर नहीं दिखेंगे घुमंतु पशु, गोशाला में मिलेगा आसरा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अब सड़क पर नहीं दिखेंगे घुमंतु पशु, गोशाला में मिलेगा आसरा
उझानी (बदायूं)। आवारा पशुओं को सड़क पर घूमने और खेतों में पहुंचकर फसलों को नुकसान पहुंचाने की आजादी नहीं दी जाएगी। इसके लिए डीएम ने जिले की सभी नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को फरमान भेजकर स्पष्ट कर दिया है कि पहले घर-घर जाकर पशुओं की गणना की जाए, फिर सड़क पर जो भी पशु घूमता नजर आए, उसे गोशाला में पहुंचा दिया जाए। गोशाला में ही आवारा पशुओं का आशियाना होगा।
आवारा पशुओं की वजह से फसलों समेत लोगों को नुकसान के मद्देनजर डीएम का फरमान मिलते ही गुरुवार को पालिका प्रशासन ने कार्रवाई की दिशा में कवायद को अंतिम रूप दे दिया। पालिका प्रशासन ने प्रत्येक वार्ड में एक-एक कर्मचारी के लिए पशुपालकों के घर पहुंचकर पशुओं की गणना करने की जिम्मेदारी सौंप दी। इसके तहत तीन दिन के अंदर पालिका कर्मियों को पशुपालकों और पशुओं की गणना करके लिस्ट तैयार करनी है। लिस्ट में यह भी दर्ज होगा कि संबंधित पशुपालक के स्वामित्व में कौन-कौन सी प्रजाति के पशुओं की संख्या कितनी है। हालांकि उनका जोर गोवंश प्रजाति से जुड़े पशुओं पर रहेगा, लेकिन गणना में भैंस आदि की संख्या का भी पता लगाया जाएगा। पशुपालकों को निर्देशित किया जाएगा कि वे पशुओं को खुला नहीं छोडे़ं। इसके बाद अगर सड़क पर कोई गोवंशीय पशु आवारा घूमता मिला तो पालिका कर्मी उसे गोशाला पहुंचा देंगे। गोशाला में उनकी देखरेख से लेकर चारा मुहैैैया कराने की जिम्मेदारी गोशाला प्रबंधन की होगी।
------------
यहां तो पहले से ओवरलोड है गोशाला
उझानी। यहां श्रीकामधेनु गोशाला है। गोशाला में 225 पशुओं को रखने की सुविधा है लेकिन इस समय पशुओं की संख्या करीब तीन सौ से अधिक है। ऐसे में पालिका प्रशासन प्रतिदिन छह-सात गोवंशीय आवारा पशुओं को गोशाला में पहुंचाता है तो पशुओं के सामने चारा का संकट पैदा हो जाएगा। गोशाला अध्यक्ष रतन जिंदल कहते हैं कि चार साल से कोई अनुदान प्राप्त नहीं हुआ है। दानदाताओं के आर्थिक सहयोग से ही उन्हें चारा और जरूरी सुविधाएं मुहैया कराई जाती रही हैं।
विज्ञापन
----------------
आवारा पशुओं को लेकर आदेश मिलते ही कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पालिका कर्मियों की टोलियां बनाकर उन्हें जिम्मेदारी सौंपी गई है कि सड़क पर जहां भी आवारा पशु मिले, उसे गोशाला तक पहुंचा दिया जाए।
- राजेश बिंद, प्रभारी, सफाई निरीक्षक
विज्ञापन
उझानी (बदायूं)। आवारा पशुओं को सड़क पर घूमने और खेतों में पहुंचकर फसलों को नुकसान पहुंचाने की आजादी नहीं दी जाएगी। इसके लिए डीएम ने जिले की सभी नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को फरमान भेजकर स्पष्ट कर दिया है कि पहले घर-घर जाकर पशुओं की गणना की जाए, फिर सड़क पर जो भी पशु घूमता नजर आए, उसे गोशाला में पहुंचा दिया जाए। गोशाला में ही आवारा पशुओं का आशियाना होगा।
आवारा पशुओं की वजह से फसलों समेत लोगों को नुकसान के मद्देनजर डीएम का फरमान मिलते ही गुरुवार को पालिका प्रशासन ने कार्रवाई की दिशा में कवायद को अंतिम रूप दे दिया। पालिका प्रशासन ने प्रत्येक वार्ड में एक-एक कर्मचारी के लिए पशुपालकों के घर पहुंचकर पशुओं की गणना करने की जिम्मेदारी सौंप दी। इसके तहत तीन दिन के अंदर पालिका कर्मियों को पशुपालकों और पशुओं की गणना करके लिस्ट तैयार करनी है। लिस्ट में यह भी दर्ज होगा कि संबंधित पशुपालक के स्वामित्व में कौन-कौन सी प्रजाति के पशुओं की संख्या कितनी है। हालांकि उनका जोर गोवंश प्रजाति से जुड़े पशुओं पर रहेगा, लेकिन गणना में भैंस आदि की संख्या का भी पता लगाया जाएगा। पशुपालकों को निर्देशित किया जाएगा कि वे पशुओं को खुला नहीं छोडे़ं। इसके बाद अगर सड़क पर कोई गोवंशीय पशु आवारा घूमता मिला तो पालिका कर्मी उसे गोशाला पहुंचा देंगे। गोशाला में उनकी देखरेख से लेकर चारा मुहैैैया कराने की जिम्मेदारी गोशाला प्रबंधन की होगी।
विज्ञापन
------------
यहां तो पहले से ओवरलोड है गोशाला
उझानी। यहां श्रीकामधेनु गोशाला है। गोशाला में 225 पशुओं को रखने की सुविधा है लेकिन इस समय पशुओं की संख्या करीब तीन सौ से अधिक है। ऐसे में पालिका प्रशासन प्रतिदिन छह-सात गोवंशीय आवारा पशुओं को गोशाला में पहुंचाता है तो पशुओं के सामने चारा का संकट पैदा हो जाएगा। गोशाला अध्यक्ष रतन जिंदल कहते हैं कि चार साल से कोई अनुदान प्राप्त नहीं हुआ है। दानदाताओं के आर्थिक सहयोग से ही उन्हें चारा और जरूरी सुविधाएं मुहैया कराई जाती रही हैं।
विज्ञापन
----------------
आवारा पशुओं को लेकर आदेश मिलते ही कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पालिका कर्मियों की टोलियां बनाकर उन्हें जिम्मेदारी सौंपी गई है कि सड़क पर जहां भी आवारा पशु मिले, उसे गोशाला तक पहुंचा दिया जाए।
- राजेश बिंद, प्रभारी, सफाई निरीक्षक