{"_id":"5b2169674f1c1bc5628b4ecc","slug":"201528916327-budaun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिले में गिर रहा जल स्तर, खतरे में फंसी जिंदगी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिले में गिर रहा जल स्तर, खतरे में फंसी जिंदगी
Updated Thu, 14 Jun 2018 12:28 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
-ऋ12 बीडीएन 35-38
दो फोटो (2-2 कॉलम)
जिले भर में गिर रहा जलस्तर, खतरे में फंसी जिंदगी
घरों में लगे नल सूखे, सरकारी हैंडपंपों पर लगती है लाइन
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं/ म्याऊ। केवल म्याऊ ब्लॉक ही नहीं समूचे जिले में भू-जलस्तर लगातार गिर रहा है। पिछले दो वर्षों में भू जलस्तर पांच से दस फुट नीचे गिरा है। घरों में लगे सामान्य नल जलस्तर गिरने पर हर साल सूख जाते हैं, जिससे पीने के पानी का संकट पैदा हो जाता है। अगर जल संरक्षण करके भू-जलस्तर गिरने से नहीं रोका गया तो भयावह स्थिति पैदा हो जाएगी। पंपसेट और देशी बोरिंग में पानी न आने से फसलें सूखने लगी हैं।
पर्यावरण दिवस पर हर साल पौधे लगाए जाते हैं। पर्यावरण संरक्षण पर रैलियां निकलने के साथ गोष्ठियां आयोजित होती हैं। इन गोष्ठियों में पानी, मिट्टी, वायु, ऊर्जा को संरक्षित करने के लिए बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं। मगर असलियत इसके उलट है, जो हमें धीरे-धीरे संकट की तरफ ले जा रही है। जल संरक्षण न होने पर शहर से लेकर गांव तक भू-जलस्तर लगातार गिर रहा है, और लोग पानी के लिए जूझ रहे हैं।
-----------
सीन-1
स्थान ग्राम वन बौसारी। यहां करीब आबादी 500 परिवार हैं, जिनमें लगभग पंद्रह सौ लोग हैं। पूरे गांव में केवल छह सरकारी नल हैं। करीब चार सौ घरों में निजी नल लगे हैं, जिनमें तीन सौ सूखे पड़े हैं। रिबोर करा लेने पर 100 घरों में लगे नल पानी दे रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक इस साल पांच फुट पानी नीचे चला गया। चार फुट जलस्तर पिछले साल गिरा था। जल संकट के चलते गांव वाले बेहद परेशान हैं। सुबह होते ही सरकारी नलों पर पानी भरने वालों की लाइन लग जाती है। प्रधान महाराज सिंह का कहना है कि नए हैंडपंप लगाने को प्रयासरत हूं। क्षेत्रीय विधायक और सांसद से मांग की है।
विज्ञापन
-----------
सीन-2
स्थान ग्राम धर्मपुर। यहां करीब सात सौ परिवार हैं। आबादी दो हजार के करीब होगी। नल सूखने के बाद 12 लोगों ने समरसेबल लगवा लिए हैं। गांव में 20 सरकारी नल लगे हैं। करीब तीन सौ परिवारों में लगे नल सूखे पड़े हैं। यहां करीब छह फुुट पानी नीचे चला गया है। चार फुट जल स्तर पिछले साल गिरा था। यहां के लगभग आधे परिवार पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। इन परिवारों के बच्चे, महिलाएं सुबह उठते ही पानी भरने में लग जाते हैं। प्रधान लज्जावती का कहना है कि खराब हैंडपंप दुरुस्त कराए जाएंगे। सबसे जरूरी है गिरते भू-जलस्तर को रोकना, जिसकी कोशिश जारी है।
----------
सीन-3
स्थान गांव गूरा बरैला। यहां लगभग चौदह सौ परिवार हैं, जिनकी आबादी चार हजार के करीब होगी। यहां ज्यादातर लोगों ने अपने घरों में लगे नलों का रिबोर करा लिया है। मगर दो सौ परिवार सरकारी नलों के भरोसे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक पिछले साल जलस्तर चार फुुट घट गया। इतना ही पिछले बार गिरा था। लगातार जलस्तर घटने से लोग चिंतित हैं। ग्राम प्रधान नेत्रपाल कश्यप का कहना है कि भू जलस्तर घटने से बेहद दिक्कत हो रही है। हर साल नलों का रिबोर कराना पड़ता है। यही हाल रहा तो गांव में रहना मुश्किल हो जाएगा। फसलों की सिंचाई को लगे देशी बोरिंग फेल हो गए हैं। नलकूप लगाने में दो-ढाई लाख रुपये खर्च होते हैं।
--------------------
क्या कहते हैं ग्रामीण
पिछले दो सालों में वाटर लेवल काफी नीचे चला गया है। छोटे नलों से पानी नहीं निकल रहा। गांवों में सरकारी नल कम हैं। कई सरकारी नल पानी कम देते हैं। हर साल गर्मी आने पर पानी की दिक्कत खड़ी हो जाती है।
-राजेश कुमार, ग्रामीण
भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है। इस साल वाटर लेवल 60 फुट से नीचे पहुंच गया है। गांवों में सरकारी नल नाममात्र के हैं, घरेलू नल गर्मी में एक-दो महीने पानी देने के बाद सूख जाते हैं। गरीब आदमी समरसेबल कहां से लगवाए।
- ओमपाल, ग्रामीण
जलस्तर नीचे गिरने पर सबसे ज्यादा दिक्कत पीने के पानी की होती हैं। खुद तो किसी तरह गुजारा कर लो, लेकिन पशुओं को कहां से पिलाओ। देशी बोरिंग फेल होने पर खेतों में खड़ी फसलें सूखने लगती हैं। गरीब आदमी तो नलकूप नहीं लगवा सकता।
- मुनीशपाल, ग्रामीण
---
कुछ इलाकों में भूजल स्तर की दिक्कत आ रही है। जल संरक्षण के लिए तालाबों की खुदाई कराई जा रही है। पौधरोपण भी करा रहे हैं। ग्राम पंचायतों से डाटा कलेक्ट करके नलों में पाइप बढ़वाकर तात्कालिक सहूलियत दिलाई जायेगी।
- रामदुलारे, बीडीओ, म्याऊ ब्लॉक
विज्ञापन
दो फोटो (2-2 कॉलम)
जिले भर में गिर रहा जलस्तर, खतरे में फंसी जिंदगी
घरों में लगे नल सूखे, सरकारी हैंडपंपों पर लगती है लाइन
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं/ म्याऊ। केवल म्याऊ ब्लॉक ही नहीं समूचे जिले में भू-जलस्तर लगातार गिर रहा है। पिछले दो वर्षों में भू जलस्तर पांच से दस फुट नीचे गिरा है। घरों में लगे सामान्य नल जलस्तर गिरने पर हर साल सूख जाते हैं, जिससे पीने के पानी का संकट पैदा हो जाता है। अगर जल संरक्षण करके भू-जलस्तर गिरने से नहीं रोका गया तो भयावह स्थिति पैदा हो जाएगी। पंपसेट और देशी बोरिंग में पानी न आने से फसलें सूखने लगी हैं।
पर्यावरण दिवस पर हर साल पौधे लगाए जाते हैं। पर्यावरण संरक्षण पर रैलियां निकलने के साथ गोष्ठियां आयोजित होती हैं। इन गोष्ठियों में पानी, मिट्टी, वायु, ऊर्जा को संरक्षित करने के लिए बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं। मगर असलियत इसके उलट है, जो हमें धीरे-धीरे संकट की तरफ ले जा रही है। जल संरक्षण न होने पर शहर से लेकर गांव तक भू-जलस्तर लगातार गिर रहा है, और लोग पानी के लिए जूझ रहे हैं।
विज्ञापन
-----------
सीन-1
स्थान ग्राम वन बौसारी। यहां करीब आबादी 500 परिवार हैं, जिनमें लगभग पंद्रह सौ लोग हैं। पूरे गांव में केवल छह सरकारी नल हैं। करीब चार सौ घरों में निजी नल लगे हैं, जिनमें तीन सौ सूखे पड़े हैं। रिबोर करा लेने पर 100 घरों में लगे नल पानी दे रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक इस साल पांच फुट पानी नीचे चला गया। चार फुट जलस्तर पिछले साल गिरा था। जल संकट के चलते गांव वाले बेहद परेशान हैं। सुबह होते ही सरकारी नलों पर पानी भरने वालों की लाइन लग जाती है। प्रधान महाराज सिंह का कहना है कि नए हैंडपंप लगाने को प्रयासरत हूं। क्षेत्रीय विधायक और सांसद से मांग की है।
विज्ञापन
-----------
सीन-2
स्थान ग्राम धर्मपुर। यहां करीब सात सौ परिवार हैं। आबादी दो हजार के करीब होगी। नल सूखने के बाद 12 लोगों ने समरसेबल लगवा लिए हैं। गांव में 20 सरकारी नल लगे हैं। करीब तीन सौ परिवारों में लगे नल सूखे पड़े हैं। यहां करीब छह फुुट पानी नीचे चला गया है। चार फुट जल स्तर पिछले साल गिरा था। यहां के लगभग आधे परिवार पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। इन परिवारों के बच्चे, महिलाएं सुबह उठते ही पानी भरने में लग जाते हैं। प्रधान लज्जावती का कहना है कि खराब हैंडपंप दुरुस्त कराए जाएंगे। सबसे जरूरी है गिरते भू-जलस्तर को रोकना, जिसकी कोशिश जारी है।
----------
सीन-3
स्थान गांव गूरा बरैला। यहां लगभग चौदह सौ परिवार हैं, जिनकी आबादी चार हजार के करीब होगी। यहां ज्यादातर लोगों ने अपने घरों में लगे नलों का रिबोर करा लिया है। मगर दो सौ परिवार सरकारी नलों के भरोसे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक पिछले साल जलस्तर चार फुुट घट गया। इतना ही पिछले बार गिरा था। लगातार जलस्तर घटने से लोग चिंतित हैं। ग्राम प्रधान नेत्रपाल कश्यप का कहना है कि भू जलस्तर घटने से बेहद दिक्कत हो रही है। हर साल नलों का रिबोर कराना पड़ता है। यही हाल रहा तो गांव में रहना मुश्किल हो जाएगा। फसलों की सिंचाई को लगे देशी बोरिंग फेल हो गए हैं। नलकूप लगाने में दो-ढाई लाख रुपये खर्च होते हैं।
--------------------
क्या कहते हैं ग्रामीण
पिछले दो सालों में वाटर लेवल काफी नीचे चला गया है। छोटे नलों से पानी नहीं निकल रहा। गांवों में सरकारी नल कम हैं। कई सरकारी नल पानी कम देते हैं। हर साल गर्मी आने पर पानी की दिक्कत खड़ी हो जाती है।
-राजेश कुमार, ग्रामीण
भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है। इस साल वाटर लेवल 60 फुट से नीचे पहुंच गया है। गांवों में सरकारी नल नाममात्र के हैं, घरेलू नल गर्मी में एक-दो महीने पानी देने के बाद सूख जाते हैं। गरीब आदमी समरसेबल कहां से लगवाए।
- ओमपाल, ग्रामीण
जलस्तर नीचे गिरने पर सबसे ज्यादा दिक्कत पीने के पानी की होती हैं। खुद तो किसी तरह गुजारा कर लो, लेकिन पशुओं को कहां से पिलाओ। देशी बोरिंग फेल होने पर खेतों में खड़ी फसलें सूखने लगती हैं। गरीब आदमी तो नलकूप नहीं लगवा सकता।
- मुनीशपाल, ग्रामीण
---
कुछ इलाकों में भूजल स्तर की दिक्कत आ रही है। जल संरक्षण के लिए तालाबों की खुदाई कराई जा रही है। पौधरोपण भी करा रहे हैं। ग्राम पंचायतों से डाटा कलेक्ट करके नलों में पाइप बढ़वाकर तात्कालिक सहूलियत दिलाई जायेगी।
- रामदुलारे, बीडीओ, म्याऊ ब्लॉक