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डीएम नहीं मिले तो कलेक्ट्रेट में फूट-फूटकर रोई लौंगश्री
Updated Tue, 27 Nov 2018 09:27 PM IST
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बदायूं। स्थान कलक्ट्रेट परिसर। समय अपराह्न 2.33 बजे। पैरों में टूटी चप्पल, चेहरे पर झुर्रियां, आंखों से बहते आंसू और हाथ में कागजों से भरा थैला। यह लाचार बुजुर्ग लौंगश्री है, जो डीएम कार्यालय के सामने खड़ी फूटकर रो-रही थी। वही डीएम को अपनी फरियाद सुनाने पहुंची थी। मगर दुर्भाग्य ऐसा कि पैदल चलते-चलते कलक्ट्रेट पहुंचने में देर हो गई और डीएम उठ चुके थे। लौंगश्री आशियाना पाने को पिछले एक साल से डूडा कार्यालय के चक्कर लगा रही है। मगर घर मिलना तो छोड़िए वहां कोई ठीक से जवाब तक नहीं देता।
करीब 65 वर्षीय लौंगश्री ने बताया कि उसके पति की चार साल पहले कैंसर से मृत्यु हो चुकी है। वह मजदूरी करते थे। एक बेटा जो पिछले दस साल से बीमार चल रहा है। लोगों के घरों में काम करके दो जून की रोटी जुटाने वाली इस महिला की दुश्वारियां कम होने के बजाय बढ़ती जा रही हैं। लौंगश्री ने बताया कि उसके पास न जमीन है, और न मकान। महाराज नगर में किराए के मकान में रहती है। किराया न दे पाने की वजह से मकान मालिक ने घर खाली करने को कह दिया। लौंगश्री ने करीब एक साल पहले आसरा आवास योजना के तहत मकान के लिए आवेदन किया था। अपना आधार कार्ड समेत सभी कागजात लगाए। तभी से वह डूडा कार्यालय के चक्कर लगा रही हैं। वहां कोई ठीक से जवाब नहीं देता, न अधिकारी, और न बाबू। एक-दो महीने बाद आने की कहकर टाल देते हैं। लौंगश्री ने बताया कि उनके पास किराए को फूटी कौड़ी भी नहीं थी। वह घर से पैदल चलकर डूडा कार्यालय पहुंची। वहां कुछ पता नहीं चला तो डीएम को अपनी फरियाद सुनाना चाही। मगर देर होने की वजह से डीएम अपने कार्यालय से उठकर जा चुके थे। लौंगश्री को कुछ समझ नहीं आया तो वहीं खड़े होकर रोने लगीं। वहां मौजूद लोगों के पूछने पर लौंगश्री आंसू पूछते हुए बोलीं- बताओ हम कहां जाएं। मकान मालिक घर खाली करने को कह रहा है। डूडा वाले कुछ बता नहीं रहे हैं। पास में फूटी कौड़ी नहीं। मां-बेटा जहर खाकर जान दे दें क्या करें। कुछ समझ में नहीं आ रहा। लौंगश्री रोते-रोते वही सीढ़ियों पर बैठ गई। वहां मौजूद कलक्ट्रेट कर्मचारी और अन्य लोग इधर-उधर चले गए।
वर्जन-
आवदेन किया है तो लौंगश्री को आसरा योजना के तहत आवास दिया जाएगा। बाईपास पर छोटे सरकार से आगे आवास बन रहे हैं। अभी काम पूरा नहीं हुआ है। जैसे ही काम पूरा हो जाएगा आवास मिल जाएगा।
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- बीबी सिंह, परियोजना अधिकारी डूडा, बदायूं
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करीब 65 वर्षीय लौंगश्री ने बताया कि उसके पति की चार साल पहले कैंसर से मृत्यु हो चुकी है। वह मजदूरी करते थे। एक बेटा जो पिछले दस साल से बीमार चल रहा है। लोगों के घरों में काम करके दो जून की रोटी जुटाने वाली इस महिला की दुश्वारियां कम होने के बजाय बढ़ती जा रही हैं। लौंगश्री ने बताया कि उसके पास न जमीन है, और न मकान। महाराज नगर में किराए के मकान में रहती है। किराया न दे पाने की वजह से मकान मालिक ने घर खाली करने को कह दिया। लौंगश्री ने करीब एक साल पहले आसरा आवास योजना के तहत मकान के लिए आवेदन किया था। अपना आधार कार्ड समेत सभी कागजात लगाए। तभी से वह डूडा कार्यालय के चक्कर लगा रही हैं। वहां कोई ठीक से जवाब नहीं देता, न अधिकारी, और न बाबू। एक-दो महीने बाद आने की कहकर टाल देते हैं। लौंगश्री ने बताया कि उनके पास किराए को फूटी कौड़ी भी नहीं थी। वह घर से पैदल चलकर डूडा कार्यालय पहुंची। वहां कुछ पता नहीं चला तो डीएम को अपनी फरियाद सुनाना चाही। मगर देर होने की वजह से डीएम अपने कार्यालय से उठकर जा चुके थे। लौंगश्री को कुछ समझ नहीं आया तो वहीं खड़े होकर रोने लगीं। वहां मौजूद लोगों के पूछने पर लौंगश्री आंसू पूछते हुए बोलीं- बताओ हम कहां जाएं। मकान मालिक घर खाली करने को कह रहा है। डूडा वाले कुछ बता नहीं रहे हैं। पास में फूटी कौड़ी नहीं। मां-बेटा जहर खाकर जान दे दें क्या करें। कुछ समझ में नहीं आ रहा। लौंगश्री रोते-रोते वही सीढ़ियों पर बैठ गई। वहां मौजूद कलक्ट्रेट कर्मचारी और अन्य लोग इधर-उधर चले गए।
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आवदेन किया है तो लौंगश्री को आसरा योजना के तहत आवास दिया जाएगा। बाईपास पर छोटे सरकार से आगे आवास बन रहे हैं। अभी काम पूरा नहीं हुआ है। जैसे ही काम पूरा हो जाएगा आवास मिल जाएगा।
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- बीबी सिंह, परियोजना अधिकारी डूडा, बदायूं