{"_id":"5a1feefd4f1c1b86698beb8e","slug":"181512042237-budaun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कुत्तों का निवाला बनने से बची हिरणी, ग्रामीण ने दिया सहारा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कुत्तों का निवाला बनने से बची हिरणी, ग्रामीण ने दिया सहारा
Updated Fri, 01 Dec 2017 12:10 AM IST
विज्ञापन
दातागंज के एक घर में पहुंचा हिरण।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दातागंज (बदायूं)। जानवर भी वफादारी समझते हैं। इसका नमूना बृहस्पतिवार को नबीगंज निवासी भावेश प्रताप सिंह के घर में देखने को मिला।
करीब 10 दिन पहले कुत्तों के चंगुल से जान बचाकर भागी हिरणी भावेश की चौपाल पर जा पहुंची थी। कुत्तों को खदेड़ कर उन्होंने हिरणी को ऐसा आश्रय दिया कि वह अब उनके घर से जाने का नाम ही नहीं ले रही है। ऐसा भी नहीं कि भावेश हिरणी को छोड़ने के लिए जंगल नहीं पहुंचे। जंगल में उन्होंने हिरणी को छोड़ा भी लेकिन वह पीछे- पीछे दौड़ आई।
करीब 10 दिन पहले कुत्तों के झुंड से जान बचाकर भागी हिरणी को जब भाजपा नेता भावेश प्रताप सिंह की चौपाल पर सहारा मिला तब गांव के कई लोग भी मौजूद थे। बकौल भावेश-हिरणी का पीछा कर रहे कुत्तों की संख्या आठ-नौ थी। गांव में घुसने से पहले हिरणी अगर चपेट में आ जाती तो उसे कुत्तों का निवाला बनने से कोई रोक नहीं पाता। बृहस्पतिवार को भावेश समेत उनके परिवार वालों को अजीब नजारे से रूबरू होना पड़ा। भावेश उसे हिरणों के झुंड में छोड़ने के लिए जंगल में पहुंचे तो हिरणी के कुछ ही दूरी पर कदम थम गए। भावेश और उनके परिवार वाले आगे बढ़े तो वह उन्हीं के पीछे लौट आई। फिलहाल वह उन्हीं के सहारे है।
------------
नहीं पहुंचे वन कर्मी
दातागंज। हिरणी को पालने में भावेश प्रताप सिंह को कोई दिक्कत नहीं है लेकिन परेशानी इस बात से ज्यादा है कि कहीं कुत्ते उस पर दोबारा हमला न कर दें। इसी के मद्देनजर उन्होंने पांच-छह दिन पहले इलाके के वनरक्षक से संपर्क कर हिरणी को ले जाने की गुहार लगाई लेकिन वनरक्षक समेत वन विभाग की ओर से कोई भी कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा।
विज्ञापन
विज्ञापन
करीब 10 दिन पहले कुत्तों के चंगुल से जान बचाकर भागी हिरणी भावेश की चौपाल पर जा पहुंची थी। कुत्तों को खदेड़ कर उन्होंने हिरणी को ऐसा आश्रय दिया कि वह अब उनके घर से जाने का नाम ही नहीं ले रही है। ऐसा भी नहीं कि भावेश हिरणी को छोड़ने के लिए जंगल नहीं पहुंचे। जंगल में उन्होंने हिरणी को छोड़ा भी लेकिन वह पीछे- पीछे दौड़ आई।
करीब 10 दिन पहले कुत्तों के झुंड से जान बचाकर भागी हिरणी को जब भाजपा नेता भावेश प्रताप सिंह की चौपाल पर सहारा मिला तब गांव के कई लोग भी मौजूद थे। बकौल भावेश-हिरणी का पीछा कर रहे कुत्तों की संख्या आठ-नौ थी। गांव में घुसने से पहले हिरणी अगर चपेट में आ जाती तो उसे कुत्तों का निवाला बनने से कोई रोक नहीं पाता। बृहस्पतिवार को भावेश समेत उनके परिवार वालों को अजीब नजारे से रूबरू होना पड़ा। भावेश उसे हिरणों के झुंड में छोड़ने के लिए जंगल में पहुंचे तो हिरणी के कुछ ही दूरी पर कदम थम गए। भावेश और उनके परिवार वाले आगे बढ़े तो वह उन्हीं के पीछे लौट आई। फिलहाल वह उन्हीं के सहारे है।
विज्ञापन
------------
नहीं पहुंचे वन कर्मी
दातागंज। हिरणी को पालने में भावेश प्रताप सिंह को कोई दिक्कत नहीं है लेकिन परेशानी इस बात से ज्यादा है कि कहीं कुत्ते उस पर दोबारा हमला न कर दें। इसी के मद्देनजर उन्होंने पांच-छह दिन पहले इलाके के वनरक्षक से संपर्क कर हिरणी को ले जाने की गुहार लगाई लेकिन वनरक्षक समेत वन विभाग की ओर से कोई भी कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा।
विज्ञापन