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सावधान ! कहीं सेहत खराब न कर दे मिलावटी खोवा
Updated Sat, 14 Oct 2017 11:59 PM IST
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खोवा
- फोटो : अमर उजाला
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बदायूं। दिवाली, भैया दूज नजदीक है। ऐसे में सैकड़ों क्विंटल मिलावटी खोवा बाजार में है। सस्ता होने के कारण मिठाई बनाने में इसका धड़ल्ले से प्रयोग किया जा रहा है।
मिलावटी खोवा बनाने वाले रातों-रात नकली खोवा शहर की चुनिंदा मंडियों और अड्डों पर खपा रहे है, जिसे खुलेआम बेचा जा रहा है। एक किलो शुद्ध दूध से सिर्फ ढाई सौ ग्राम असली खोवा बनता है। इस तरह चार किलो दूध से एक किलो शुद्ध खोवा तैयार हो पाता है। जितने खोवे की इस समय डिमांड है उतना दूध नहीं है। यही कारण है कि मिलावटी खोवा धड़ल्ले से बाजार में खप रहा है।
विक्रेता समरेर निवासी रामपाल बताते हैं कि एक किलो शुद्ध खोवा किसी हाल में ढाई सौ रुपये से कम नहीं बेचा जा सकता, जबकि टिकटगंज खोवा मंडी, चूना मंडी और अन्य जगहों पर मिलावटी खोवा 180 रुपये प्रति किलो तक उपलब्ध है।
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काफी कम आती है लागत
मिलावटी खोवा बनाने के जानकार बताते हैं, कि एक किलो खोवा तैयार करने में काफी कम लागत आती है, इससे अच्छी खासी कमाई हो जाती है। दुग्ध व्यवसायी रिषी पाल यादव ने बताया कि कुछ धंधेबाज तो एक चौथाई असली खोवे में दो तिहाई उबला आलू और मैदा मिलाते हैं। दोनों चीजें इस तरह मिश्रित करते हैं कि कोई मिलावट की आसानी से पहचान नहीं कर सकता।
जिले के दातागंज, समरेर, म्याऊं और जगत के इलाकों में काफी मात्रा में मिलावटी खोवा तैयार किया जा रहा है। इन्हें शहर की मंडियों में भेजा जा रहा है।
....बेहद हानिकारक है मिलावटी खोवा
वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. अरुण यादव बताते हैं, कि मिलावटी खोवे के बने मिष्ठान पेट संबंधित रोग पैदा करते हैं। यह किडनी और आंतों के लिए भी नुकसानदायक है।
ऐसे करें मिलावटी खोवे की पहचान
हलवाई राधेश्याम गुप्ता बताते हैं कि असली खोवा देखने में चमकदार होने के बजाय मटमैला होगा और मुंह में डालते ही घुलने लगेगा। जबकि नकली खोवा झक सफेद चमकदार होता है। इसी प्रकार आयोडीन मिलाकर देखा जाए तो नकली खोवा लाल दिखने लगता है। उसमें लगाया गया केमिकल रंग बदल देता है। जबकि असली खोवा का रंग नहीं बदलता।
वर्जन..
सिंथेटिक दूध, पनीर और खोवा बनाने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। टीमें गांव देहात तक दूध करोबारियों के यहां छापेमारी कर रही हैं। शुक्रवार को सात सौ किलोग्राम सिंथेटिक पनीर पकड़ा गया।
-अक्षय गोयल, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी
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मिलावटी खोवा बनाने वाले रातों-रात नकली खोवा शहर की चुनिंदा मंडियों और अड्डों पर खपा रहे है, जिसे खुलेआम बेचा जा रहा है। एक किलो शुद्ध दूध से सिर्फ ढाई सौ ग्राम असली खोवा बनता है। इस तरह चार किलो दूध से एक किलो शुद्ध खोवा तैयार हो पाता है। जितने खोवे की इस समय डिमांड है उतना दूध नहीं है। यही कारण है कि मिलावटी खोवा धड़ल्ले से बाजार में खप रहा है।
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विक्रेता समरेर निवासी रामपाल बताते हैं कि एक किलो शुद्ध खोवा किसी हाल में ढाई सौ रुपये से कम नहीं बेचा जा सकता, जबकि टिकटगंज खोवा मंडी, चूना मंडी और अन्य जगहों पर मिलावटी खोवा 180 रुपये प्रति किलो तक उपलब्ध है।
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काफी कम आती है लागत
मिलावटी खोवा बनाने के जानकार बताते हैं, कि एक किलो खोवा तैयार करने में काफी कम लागत आती है, इससे अच्छी खासी कमाई हो जाती है। दुग्ध व्यवसायी रिषी पाल यादव ने बताया कि कुछ धंधेबाज तो एक चौथाई असली खोवे में दो तिहाई उबला आलू और मैदा मिलाते हैं। दोनों चीजें इस तरह मिश्रित करते हैं कि कोई मिलावट की आसानी से पहचान नहीं कर सकता।
जिले के दातागंज, समरेर, म्याऊं और जगत के इलाकों में काफी मात्रा में मिलावटी खोवा तैयार किया जा रहा है। इन्हें शहर की मंडियों में भेजा जा रहा है।
....बेहद हानिकारक है मिलावटी खोवा
वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. अरुण यादव बताते हैं, कि मिलावटी खोवे के बने मिष्ठान पेट संबंधित रोग पैदा करते हैं। यह किडनी और आंतों के लिए भी नुकसानदायक है।
ऐसे करें मिलावटी खोवे की पहचान
हलवाई राधेश्याम गुप्ता बताते हैं कि असली खोवा देखने में चमकदार होने के बजाय मटमैला होगा और मुंह में डालते ही घुलने लगेगा। जबकि नकली खोवा झक सफेद चमकदार होता है। इसी प्रकार आयोडीन मिलाकर देखा जाए तो नकली खोवा लाल दिखने लगता है। उसमें लगाया गया केमिकल रंग बदल देता है। जबकि असली खोवा का रंग नहीं बदलता।
वर्जन..
सिंथेटिक दूध, पनीर और खोवा बनाने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। टीमें गांव देहात तक दूध करोबारियों के यहां छापेमारी कर रही हैं। शुक्रवार को सात सौ किलोग्राम सिंथेटिक पनीर पकड़ा गया।
-अक्षय गोयल, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी