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Budaun News: नरौरा डैम से फिर छोड़ा 1.70 लाख क्यूसेक पानी, तटवर्ती इलाकों में खौफ

Wed, 03 Sep 2025 01:33 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 03 Sep 2025 01:33 AM IST
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1.70 lakh cusecs of water released again from Narora Dam, fear in coastal areas
सहसवान के गांव भमरौलिया में नाव से अपने घरों का हाल देखकर लौटे बाढ़ पीड़ित। संवाद
बदायूं। गंगा में नरौरा डैम से लगातार पानी छोड़ा जा रहा है। मंगलवार को दोपहर दो बजे नरौरा से 1.70 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद एक बार फिर गंगा में पानी बढ़ने की गति तेज हो गई है। बाढ़ पीड़ित गंगा के प्रकोप से सहमे हुए हैं। पीड़ितों को अपने गांव और घरों की चिंता सता रही है। यह लोग एक महीने से बाढ़ का दंश झेल रहे हैं। इनको आश्रय केंद्रों और तटबंधों पर ही रात गुजारनी पड़ रही है। सबसे ज्यादा खराब स्थिति गंगा महावा और उसहैत तटबंध के समीप बसे 26 गांंवों की है।
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प्रशासन की ओर से उसहैत तटबंधों के समीप के 18 गांवों के 584 बाढ़ पीड़ितों को खाद्यान्न का वितरण किया जा रहा है। सहसवान क्षेत्र के बाढ़ पीड़ितों को आश्रय स्थल नहीं मिला है, वे गंगा-महावा तटबंध पर जीवन गुजार रहे हैं। प्रशासन उन्हें बाढ़ पीड़ित ही नहीं मान रहा है। बाढ़ पीड़ितों में पुरुषों के अलावा महिला और बच्चों की भी बड़ी संख्या है।
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रात में तटबंध पर पन्नी डालकर कैंप कर रहे बाढ़ पीड़ितों को जंगली जानवरों और सांप-कीड़ों को डर सताता रहता है। मोमबत्ती की रोशनी में बाढ़ पीड़ित वहीं रह रहे हैं। दिन में कुछ बाढ़ पीड़ित अपने गांवों को नावों से जाकर देख आते हैं। सबसे बड़ी चिंता ग्रामीणों को पानी में लंबे समय से घिरे अपने मकानों को लेकर है। प्रशासन से मिली सहायता भी रास नहीं आ रही है।
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खतरे के निशान से ऊपर बह रही गंगा
लगातार चार दिनों से गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से सात से आठ सेमी ऊपर चल रहा है। 29 अगस्त को एक सेमी ही खतरे के निशान से गंगा नीचे आई थी। उसके बाद फिर से पानी बढ़ गया। उसहैत क्षेत्र के एक स्कूल में रोके गए बाढ़ पीड़ितों को रात में मच्छरों ने परेशान कर रखा है। आसपास पानी भरे होने के कारण उन्हें मलेरिया, डेंगू जैसे रोग होने का खतरा है। हालांकि, स्वास्थ्य सेवाएं इनको प्रशासन की ओर से दी जा रही हैं। सहसवान क्षेत्र के बाढ़ ग्रस्त इलाकों में खागी नगला में कटान का खतरा मंडरा रहा है। घटते-बढ़ते पानी की वजह से गंगा क्षेत्र में कटान कर सकती है। भमरौलिया गांव पानी में पूरी तरह से घिरा हुआ है।
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खेती में नुकसान का आंकलन नहीं करा रहा प्रशासन
बाढ़ पीड़ित किसान अपने सैकड़ों बीघा जमीन गवां चुके हैं। गंगा और महावा नदी के संगम के स्थल पर कटान ने पहले ही खेतों को काट दिया था। किसानों के बचे हुए खेतों में गंगा का पानी भरा हुआ है। अभी तक प्रशासन मुआवजे के लिए आकलन नहीं कर सका है। इसलिए बाढ़ पीड़ितों को जल्दी मुआवजा भी मिलने की उम्मीद नहीं है। बाढ़ पीड़ित किसानों को इस बार अपनी फसलें नहीं मिल सकेंगी। उन्हें मुआवजा नहीं मिला तो बाढ़ के बाद भी परिवार चलाने का संकट बना रहेगा।

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केवल एक दिन खतरे के निशान से नीचे रही गंगा
कछला में खतरे का निशान 162.40 मीटर पर है। 30 अगस्त को 162.48 मीटर, 31 अगस्त को 162.47 मीटर और एक सितंबर को 162.48 मीटर रिकार्ड किया गया। चार अगस्त से गंगा में पानी बढ़ना शुरू हुआ था और सात से 10 अगस्त तक चरम पर रहा था।
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फैक्ट फाइल
गंगा का जलस्तर- 162.58 मीटर
नरौरा से छोड़ा पानी - 1,69,626 क्यूसेक
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