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वियोग हटाकर भगवान से संयोग कराती है भागवत कथा
Updated Sun, 11 Nov 2018 05:36 PM IST
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भगवान से संयोग कराती है भागवत कथा
उझानी (बदायूं)। बहादुरगंज मोहल्ले में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन रामानुजाचार्य गोपालाचार्य महाराज ने कथा सुनने का महत्व समझाया। उन्होंने मंगलाचरण की कथा भी सुनाई। कहा कि वियोग की स्थिति खत्म करके भगवान से संयोग स्थापित करने का सबसे सरल माध्यम ही कथा है।
रामानुजाचार्य गोपालाचार्य महाराज ने मानव जीवन में धर्म और सत्य का स्थान सर्वोपरि बताया। कहा कि भगवान की प्राप्ति के लिए मानव को सच्चे मन से स्मरण करना चाहिए। जिसने अपने जीवन में कथा नहीं सुनी, वह आत्मघाती है। मनुष्य तो भगवान का ही अंश है। समस्त जीवों में भगवान विराजे हैं। इसलिए कथा का श्रवण करते समय मन को एकाग्र रखना आवश्यक है। कथा सुनना स्वर्गामृत से भी श्रेष्ठ माना गया है। कलयुग में कथा ही ईश्वर तक पहुंचने का ऐसा माध्यम है जो आसानी से प्राप्त हो जाता है। गोपालाचार्य महाराज ने महाभारत काल का उदाहरण भी दिया। कहा कि श्री कृष्ण भगवान ने धर्म की रक्षा के लिए ही पांडवों का साथ दिया था। पूरा जगत मिथ्या है, अगर कुछ सत्य है तो वह भगवान और भजन है। महिलाओं को भी गृहस्थी के कामकाज से समय निकाल कर कथा सुनना चाहिए। मन में भाव अच्छे हों। भगवान तो भाव के ही भूखे हैं। कथा की व्यवस्थाओं में महेंद्र राठौर, जयपाल सिंह, अवधेश शर्मा, भगवान सिंह और पुष्पेंद्र का सहयोग रहा।
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उझानी (बदायूं)। बहादुरगंज मोहल्ले में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन रामानुजाचार्य गोपालाचार्य महाराज ने कथा सुनने का महत्व समझाया। उन्होंने मंगलाचरण की कथा भी सुनाई। कहा कि वियोग की स्थिति खत्म करके भगवान से संयोग स्थापित करने का सबसे सरल माध्यम ही कथा है।
रामानुजाचार्य गोपालाचार्य महाराज ने मानव जीवन में धर्म और सत्य का स्थान सर्वोपरि बताया। कहा कि भगवान की प्राप्ति के लिए मानव को सच्चे मन से स्मरण करना चाहिए। जिसने अपने जीवन में कथा नहीं सुनी, वह आत्मघाती है। मनुष्य तो भगवान का ही अंश है। समस्त जीवों में भगवान विराजे हैं। इसलिए कथा का श्रवण करते समय मन को एकाग्र रखना आवश्यक है। कथा सुनना स्वर्गामृत से भी श्रेष्ठ माना गया है। कलयुग में कथा ही ईश्वर तक पहुंचने का ऐसा माध्यम है जो आसानी से प्राप्त हो जाता है। गोपालाचार्य महाराज ने महाभारत काल का उदाहरण भी दिया। कहा कि श्री कृष्ण भगवान ने धर्म की रक्षा के लिए ही पांडवों का साथ दिया था। पूरा जगत मिथ्या है, अगर कुछ सत्य है तो वह भगवान और भजन है। महिलाओं को भी गृहस्थी के कामकाज से समय निकाल कर कथा सुनना चाहिए। मन में भाव अच्छे हों। भगवान तो भाव के ही भूखे हैं। कथा की व्यवस्थाओं में महेंद्र राठौर, जयपाल सिंह, अवधेश शर्मा, भगवान सिंह और पुष्पेंद्र का सहयोग रहा।
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