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गंगा से कुतों ने खींचे दो शव, एक के दोनों पैर गायब
Updated Mon, 18 Jun 2018 11:05 PM IST
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गंगा से कुत्तों ने खींचे दो शव
कछला गंगाघाट का मामला, दोनों जलप्रवाह के होने की आशंका
अमर उजाला ब्यूरो
उझानी (बदायूं)। कछला घाट पर सोमवार प्रात: दो क्षत-विक्षत शव गंगा किनारे नजर आने पर लोगों का जमघट लग गया। दोनों शवों को कुत्ते खींच लाए थे। इनमें एक के दोनों पैर तो दूसरे का हाथ गायब था। शव पहचानने लायक भी नहीं थे। दोनों शव जलप्रवाह के होने की आशंका बनी हुई है।
प्रात: करीब नौ बजे गंगा किनारे दो शव बिल्सी क्षेत्र के श्रद्धालु हरीओम ने पड़े देखे। दोनों घाट से चंद कदम आगे पड़े थे। हरीओम ने इसकी जानकारी दुकानदारों को दी तो मौके पर लोग इकट्ठे हो गए लेकिन दोपहर बाद तक दोनों शव मौके पर ही पड़े रहे। चश्मदीद लोगों की मानें तो एक शव के दोनों पैर गायब थे जबकि दूसरे का एक हाथ नजर नहीं आया। उनके चेहरे भी फूल गए थे। माना जा रहा है कि शव करीब 10-15 दिन पुराने हैं। शव के आसपास कुत्ते भी थे। लोगों ने कुत्तों को तो खदेड़ दिया लेकिन दोनों शव का अंतिम संस्कार करने की जरूरत महसूस नहीं की गई। गंगा में इस तरह से शव किनारे पहुंचने का यह कोई पहला मामला नहीं है। दो-तीन महीनों में एक-दो बार शव बहकर किनारे आ ही जाते हैं। ये वही शव होते हैं जिनको जलप्रवाह कर दिया जाता है। जलस्तर में वृद्धि भी उन्हें किनारे की ओर धकेल देती है। जलप्रवाह के ज्यादातर शव सर्पदंश के शिकार महिला-पुरुषों या फिर अविवाहितों के होते हैं। अविवाहितों में कुछेक का तो दाह संस्कार भी कर दिया जाता है लेकिन सर्पदंश के शिकार का दाह संस्कार करना लोग उचित नहीं समझते।
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इंसेट
सर्पदंश से महिला की मौत
उझानी। कछला घाट के पास रहने वाले राधेलाल की 50 वर्षीय पत्नी मंजू को रविवार रात झोपड़ीनुमा घर में सांप ने काट लिया। घरवालों ने तड़के तक उसकी नीम-हकीमों से इलाज भी कराया लेकिन सुबह में उसने दमतोड़ दिया। बाद में जलप्रवाह रीति से उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। ब्यूरो
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कछला गंगाघाट का मामला, दोनों जलप्रवाह के होने की आशंका
अमर उजाला ब्यूरो
उझानी (बदायूं)। कछला घाट पर सोमवार प्रात: दो क्षत-विक्षत शव गंगा किनारे नजर आने पर लोगों का जमघट लग गया। दोनों शवों को कुत्ते खींच लाए थे। इनमें एक के दोनों पैर तो दूसरे का हाथ गायब था। शव पहचानने लायक भी नहीं थे। दोनों शव जलप्रवाह के होने की आशंका बनी हुई है।
प्रात: करीब नौ बजे गंगा किनारे दो शव बिल्सी क्षेत्र के श्रद्धालु हरीओम ने पड़े देखे। दोनों घाट से चंद कदम आगे पड़े थे। हरीओम ने इसकी जानकारी दुकानदारों को दी तो मौके पर लोग इकट्ठे हो गए लेकिन दोपहर बाद तक दोनों शव मौके पर ही पड़े रहे। चश्मदीद लोगों की मानें तो एक शव के दोनों पैर गायब थे जबकि दूसरे का एक हाथ नजर नहीं आया। उनके चेहरे भी फूल गए थे। माना जा रहा है कि शव करीब 10-15 दिन पुराने हैं। शव के आसपास कुत्ते भी थे। लोगों ने कुत्तों को तो खदेड़ दिया लेकिन दोनों शव का अंतिम संस्कार करने की जरूरत महसूस नहीं की गई। गंगा में इस तरह से शव किनारे पहुंचने का यह कोई पहला मामला नहीं है। दो-तीन महीनों में एक-दो बार शव बहकर किनारे आ ही जाते हैं। ये वही शव होते हैं जिनको जलप्रवाह कर दिया जाता है। जलस्तर में वृद्धि भी उन्हें किनारे की ओर धकेल देती है। जलप्रवाह के ज्यादातर शव सर्पदंश के शिकार महिला-पुरुषों या फिर अविवाहितों के होते हैं। अविवाहितों में कुछेक का तो दाह संस्कार भी कर दिया जाता है लेकिन सर्पदंश के शिकार का दाह संस्कार करना लोग उचित नहीं समझते।
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सर्पदंश से महिला की मौत
उझानी। कछला घाट के पास रहने वाले राधेलाल की 50 वर्षीय पत्नी मंजू को रविवार रात झोपड़ीनुमा घर में सांप ने काट लिया। घरवालों ने तड़के तक उसकी नीम-हकीमों से इलाज भी कराया लेकिन सुबह में उसने दमतोड़ दिया। बाद में जलप्रवाह रीति से उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। ब्यूरो
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