{"_id":"5a5cc7504f1c1b62268b4825","slug":"161516029776-budaun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"साले-बहनोई के शवों की अंत्येष्टि, नम हुई हर आंख","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
साले-बहनोई के शवों की अंत्येष्टि, नम हुई हर आंख
Updated Mon, 15 Jan 2018 11:50 PM IST
विज्ञापन
दातागंज में वलिंप करते मृतक निर्वेश के परिवार वाले।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
बदायूं। रविवार रात चलती कार में आग लगने से ठेकेदार साले-बहनोई की मौत के बाद सोमवार को पोस्टमार्टम हाउस से लेकर अस्पताल तक कोहराम मचा रहा। महिलाएं अस्पताल में रो रही थीं तो पोस्टमार्टम हाउस पर पुरुषों की भीड़ लगी थी। कोई दहाड़े मारकर रो रहा था तो कोई उदास चेहरा लिए मौत का मातम मना रहा था। दोनों के घरों पर भी चीखें गूंज रही थीं। लोग दोनों के अच्छे व्यवहार का जिक्र करते हुए मनहूस घड़ी को कोस रहे थे। दोनों के गांवों में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
बिसौली। वजीरगंज थाना क्षेत्र के ग्राम वनकोटा के पास अपनी सेंट्रो कार में बहनोई निर्वेश के साथ उमेश की जलकर मौत हो गई थी। कोतवाली क्षेत्र के गांव मदनजुडी निवासी उमेश के पिता रोशन के पास मात्र दो बीघा कृषि भूमि थी। इसी से पहले घर का गुजारा होता था। उमेश ने बहनोई निर्वेश के साथ जैक से लिंटर उठाने का काम सीखा और बाद में इसी काम की फर्म खोलकर ठेका लेना शुरू कर दिया। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति में तेजी से सुधार हुआ था। बूढे़ माता-पिता खुशी से जीवन गुजार रहे थे। दो छोटे भाई मोहित (20) और आशीष (15) पढ़ाई कर रहे थे। न जाने किसकी नजर लगी और उमेश की मौत हो गई। उमेश के दस साल के भांजे देव (12) की छुट्टी चल रही थीं। देव की मां प्रवेश भी दो दिन पहले से मायके मदनजुडी आई थीं। इसलिए उमेश अपने बहनोई और भांजे को लेकर अपने घर आ रहा था। उमेश की पत्नी कविता का रो रोकर बुरा हाल था। उमेश की एक वर्षीय पुत्री गुड़िया है। देर शाम पोस्टमार्टम के बाद शव लाकर गांव में ही अंतिम संस्कार कर दिया गया। पूरे गांव में मातम का माहौल है।
दातागंज। निर्वेश के शव का गांव में अंतिम संस्कार कर दिया गया। निर्वेश के परिवार के लोग सदमे में थे। हर कोई उसकी तारीफ कर रहा था। लोगों ने बताया कि निर्वेश खुद कम पढ़ा लिखा था पर उसने अपने परिवार को शिक्षित और संपन्न करने के लिए काफी मेहनत की थी। नौनी टिकन्ना गांव के मूल निवासी यह लोग बीस साल से दातागंज कस्बे के बादामनगर मोहल्ले में रह रहे थे। पिता पातीराम ग्रामीण डाक सेवक हैं। दलित परिवार के निर्वेश के चाचा श्रीपाल गांव के प्रधान भी रह चुके हैं।
बिसौली। वजीरगंज थाना क्षेत्र के ग्राम वनकोटा के पास अपनी सेंट्रो कार में बहनोई निर्वेश के साथ उमेश की जलकर मौत हो गई थी। कोतवाली क्षेत्र के गांव मदनजुडी निवासी उमेश के पिता रोशन के पास मात्र दो बीघा कृषि भूमि थी। इसी से पहले घर का गुजारा होता था। उमेश ने बहनोई निर्वेश के साथ जैक से लिंटर उठाने का काम सीखा और बाद में इसी काम की फर्म खोलकर ठेका लेना शुरू कर दिया। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति में तेजी से सुधार हुआ था। बूढे़ माता-पिता खुशी से जीवन गुजार रहे थे। दो छोटे भाई मोहित (20) और आशीष (15) पढ़ाई कर रहे थे। न जाने किसकी नजर लगी और उमेश की मौत हो गई। उमेश के दस साल के भांजे देव (12) की छुट्टी चल रही थीं। देव की मां प्रवेश भी दो दिन पहले से मायके मदनजुडी आई थीं। इसलिए उमेश अपने बहनोई और भांजे को लेकर अपने घर आ रहा था। उमेश की पत्नी कविता का रो रोकर बुरा हाल था। उमेश की एक वर्षीय पुत्री गुड़िया है। देर शाम पोस्टमार्टम के बाद शव लाकर गांव में ही अंतिम संस्कार कर दिया गया। पूरे गांव में मातम का माहौल है।
विज्ञापन
दातागंज। निर्वेश के शव का गांव में अंतिम संस्कार कर दिया गया। निर्वेश के परिवार के लोग सदमे में थे। हर कोई उसकी तारीफ कर रहा था। लोगों ने बताया कि निर्वेश खुद कम पढ़ा लिखा था पर उसने अपने परिवार को शिक्षित और संपन्न करने के लिए काफी मेहनत की थी। नौनी टिकन्ना गांव के मूल निवासी यह लोग बीस साल से दातागंज कस्बे के बादामनगर मोहल्ले में रह रहे थे। पिता पातीराम ग्रामीण डाक सेवक हैं। दलित परिवार के निर्वेश के चाचा श्रीपाल गांव के प्रधान भी रह चुके हैं।
विज्ञापन