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एसएनसीयू में नवजातों को बढ़ा इंफेक्शन का खतरा
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बदायूं। महिला अस्पताल के एसएनसीयू में लगातार बच्चों की संख्या बढ़ने से इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ गया है। हालात यह हो गए हैं कि एक-एक वार्मर पर दो-दो बच्चे भर्ती किए गए हैं। इससे न सिर्फ गंभीर बच्चों को खतरा बढ़ा है, बल्कि स्टाफ की परेशानियां भी बढ़ गई हैं। उन्होंने विभाग से अतिरिक्त स्टाफ और वार्मर बढ़ाए जाने की मांग की है।
एसएनसीयू में अब तक 12 वार्मर थे। गुरुवार को दातागंज स्वास्थ्य केंद्र से एक और वार्मर मंगवाया गया है। अब एसएनसीयू में 13 वार्मर हो गए हैं लेकिन इन पर 23 बच्चों को भर्ती किया गया है। इनमें से 11 वार्मर ऐसे हैं, जिन पर दो-दो बच्चे भर्ती हैं। ऐसे में गंभीर बच्चों को इंफेक्शन का खतरा बढ़ा है। एक बच्चे से दूसरे बच्चें में इंफेक्शन फैलने का डर है। शायद ऐसा हुआ तो स्वास्थ्य विभाग के पास कोई जबाव नहीं होगा, जबकि नवजातों को सबसे पहले इंफेक्शन से ही बचाया जाता है। एसएनसीयू के अंदर किसी बाहरी व्यक्ति या फिर बच्चे की मां को भी जाने की अनुमति नहीं दी जाती। इसकी बावजूद स्वास्थ्य विभाग इसके प्रति गंभीर नहीं है।
-चिकित्सकों को चुनौती बने जुड़वा बच्चे
-एसएनसीयू में दो ऐसे बच्चे लाए गए हैं, जो जुड़वा हैं। उनमें से एक का वजन 820 ग्राम है जबकि दूसरे का वजन एक किलो है। चिकित्सकों के मुताबिक आमतौर पर बच्चे का वजन ढाई किलो से कम नहीं होना चाहिए। ऐसे में दोनों बच्चे चिकित्सकों को चुनौती बने हैं। उनके उपचार में कोई कोताही नहीं बरती जा रही है।
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आज पहुंचेगी यूनिसेफ की टीम
-एसएनसीयू में लगातार बच्चों की संख्या बढ़ने से चिंतित चिकित्सकों ने यूनिसेफ को सूचना दी है। वार्मर बढ़ाने और बच्चों के उचित उपचार के लिए यूनिसेफ की टीम शुक्रवार को एसएनसीयू पहुंचेगी। उसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।
एसएनसीयू में वार्मर बढ़ाने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। हमने गुरुवार को ही तीन वार्मर मंगवाए थे। उनमें से कितने एसएनसीयू पहुंचे है। इसका पता कर रहे हैं। बाकी वार्मर की जल्द व्यवस्था की जाएगी।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद, सीएमओ
-एसएनसीयू में लगातार बच्चों की संख्या बढ़ रही है। एक-एक वार्मर पर दो-दो बच्चों को रखा जा रहा है। ऐसे में इंफेक्शन का खतरा है। फिर भी हम कोशिश कर रहे हैं कि बच्चों का सही तरह से इलाज हो। उनमें इंफेक्शन नहीं फैले।
डॉ. संदीप वार्ष्णेय, बाल रोग विशेषज्ञ
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एसएनसीयू में अब तक 12 वार्मर थे। गुरुवार को दातागंज स्वास्थ्य केंद्र से एक और वार्मर मंगवाया गया है। अब एसएनसीयू में 13 वार्मर हो गए हैं लेकिन इन पर 23 बच्चों को भर्ती किया गया है। इनमें से 11 वार्मर ऐसे हैं, जिन पर दो-दो बच्चे भर्ती हैं। ऐसे में गंभीर बच्चों को इंफेक्शन का खतरा बढ़ा है। एक बच्चे से दूसरे बच्चें में इंफेक्शन फैलने का डर है। शायद ऐसा हुआ तो स्वास्थ्य विभाग के पास कोई जबाव नहीं होगा, जबकि नवजातों को सबसे पहले इंफेक्शन से ही बचाया जाता है। एसएनसीयू के अंदर किसी बाहरी व्यक्ति या फिर बच्चे की मां को भी जाने की अनुमति नहीं दी जाती। इसकी बावजूद स्वास्थ्य विभाग इसके प्रति गंभीर नहीं है।
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-चिकित्सकों को चुनौती बने जुड़वा बच्चे
-एसएनसीयू में दो ऐसे बच्चे लाए गए हैं, जो जुड़वा हैं। उनमें से एक का वजन 820 ग्राम है जबकि दूसरे का वजन एक किलो है। चिकित्सकों के मुताबिक आमतौर पर बच्चे का वजन ढाई किलो से कम नहीं होना चाहिए। ऐसे में दोनों बच्चे चिकित्सकों को चुनौती बने हैं। उनके उपचार में कोई कोताही नहीं बरती जा रही है।
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आज पहुंचेगी यूनिसेफ की टीम
-एसएनसीयू में लगातार बच्चों की संख्या बढ़ने से चिंतित चिकित्सकों ने यूनिसेफ को सूचना दी है। वार्मर बढ़ाने और बच्चों के उचित उपचार के लिए यूनिसेफ की टीम शुक्रवार को एसएनसीयू पहुंचेगी। उसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।
एसएनसीयू में वार्मर बढ़ाने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। हमने गुरुवार को ही तीन वार्मर मंगवाए थे। उनमें से कितने एसएनसीयू पहुंचे है। इसका पता कर रहे हैं। बाकी वार्मर की जल्द व्यवस्था की जाएगी।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद, सीएमओ
-एसएनसीयू में लगातार बच्चों की संख्या बढ़ रही है। एक-एक वार्मर पर दो-दो बच्चों को रखा जा रहा है। ऐसे में इंफेक्शन का खतरा है। फिर भी हम कोशिश कर रहे हैं कि बच्चों का सही तरह से इलाज हो। उनमें इंफेक्शन नहीं फैले।
डॉ. संदीप वार्ष्णेय, बाल रोग विशेषज्ञ