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46 किमी लंबी बदायूं सिंचाई परियोजना को बजट की दरकार
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बदायूं। बरेली और बदायूं के किसानों के लिए फायदेमंद साबित होने वाली 46 किलोमीटर लंबी नहर निर्माण की बदायूं सिंचाई परियोजना पर बजट के संकट है। शासन से मंजूर 630 करोड़ रुपये के सापेक्ष कार्यदायी संस्था को सिर्फ 100 करोड़ रुपये ही मिल सके। वर्ष-2015 तक नहर की धारा टेल तक पहुंचाने का खाका तैयार करे बैठे अफसरों के लिए बजट उपलब्ध नहीं हो पाया। पुराने आंकड़े पर ही गौर करें तो परियोजना को पूरा करने के लिए अभी पांच सौ करोड़ रुपया चाहिए। इसके लिए बाढ़ खंड ने शासन को प्रस्ताव भी भेज दिया जो अभी तक लंबित पड़ा है। अब तो बजट की रकम मिलने के बाद ही टेल तक नहर की धारा पहुंच पाएगी।
बदायूं सिंचाई परियोजना को मंजूरी तत्कालीन अखिलेश यादव की सरकार में मिली थी। बाढ़ खंड ने प्रस्ताव तो मायावती की अगुवाई वाली प्रदेश सरकार में भेजा गया था, लेकिन अखिलेश सरकार बनने के बाद इसके लिए छह सौ 30 करोड़ रुपये मंजूर किए गए। बरेली रामगंगा से बदायूं की दातागंज तहसील के हजरतपुर तक 46 किलोमीटर लंबी नहर से करीब 60 गांव के किसानों को फायदा मिलना है। बाढ़ खंड ने सौ करोड़ रुपया मिलते ही निर्माण कार्य वर्ष-2012 में ही शुरू करा दिया, निर्माण पूरा करने के लिए तीन साल का समय भी तय था, लेकिन बाढ़ खंड को सौ करोड़ रुपये मिलने के बाद धेला भी नहीं मिल पाया। निर्माणाधीन नहर की हकीकत पर गौर करें तो कई स्थानों पर तो उसकी खुदाई का काम भी पूरा नहीं हो पाया है। जहां खुदाई हो चुकी है, वहां उसके कुलावे भी नहीं बन पाए हैं।
बताते हैं कि निर्माण कार्य को रफ्तार देने के लिए बाढ़ खंड ने वर्ष-2014 में बाकी की रकम अवमुक्त कराने के लिए शासन स्तर पर प्रस्ताव बनाकर भेज दिया था। अगले साल तक जवाब नहीं मिला तो बाढ़ खंड के अफसरों ने शासन स्तर पर संपर्क साधकर बड़े अफसरों को भी बता दिया था कि जमीन के सर्किल रेट में इजाफा हो जाने की वजह से उन्हें रिवाइज बजट मुहैया कराया जाए। रिवाइज प्रस्ताव भी दे दिया गया था। इधर, इलाके के लोगों का कहना है कि बाढ़ खंड नहर के निर्माण को रफ्तार देने में नाकाम रहा है। उन्हें तो जमीन सर्किल रेट के आधार पर कीमत मिलनी चाहिए। बता दें कि बदायूं सिंचाई परियोजना का सबसे बड़ा फायदा भी जिले के ही किसानों को होगा। यह बात अफसर भी जानते हैं। नहर की जो दूरी है, उसमें बरेली का हिस्सा तो महज छह किलोमीटर ही आता है।
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हजरतपुर के दो दर्जन को नहीं होगा कोई खास फायदा
हजरतपुर क्षेत्र के गांव धुबरी, हसौरा, चंगासी, चितरी, वमनपुरा आदि करीब दो दर्जन गांव ऐसे हैं जो रामगंगा में बाढ़ के साथ चपेट में आ जाते हैं। ग्रामीणों के लिए बाढ़ के दिनों में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बताते हैं कि बदायूं सिंचाई परियोजना बदायूं के तहत रामगंगा से हजरतपुर तक जो नहर निर्माणाधीन है, उसका कुछ हिस्सा इन्हीं गांवों से होकर गुजरता है। बाढ़ की वजह से इन गांवों में पहले से ही नमी का माहौल रहता है।
फैक्ट फाइल
इतने गांव को होगा फायदा- 60
नहर परियोजना की लंबाई -46 किलोमीटर
परियोजना का मंजूर बजट- 630 करोड़
अभी तक खोदी गई नहर-22 किलोमीटर
कटरी से जुड़े गांव- 25
रिवाइज होने के बाद में मिलेगा फायदा
-नहर से जुड़े गांवों के लोगों को जमीन के रूप में अब जो मूल्य मिलेगा। वह पहले से अधिक होगा। इसके लिए प्रस्ताव रिवाइज कर विभाग की ओर से शासन को भेज दिया गया है।
बदायूं सिंचाई परियोजना को लेकर वह शासन स्तर पर अफसरों से संपर्क में हैं। रिवाइज रेट में प्रस्ताव भी भेज दिया गया है। बजट की धनराशि अवमुक्त होते ही निर्माण कार्य फिर से रफ्तार पकड़ लेगा।
- राजीव कुमार सिंधू, सहायक अभियंता।
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बदायूं सिंचाई परियोजना को मंजूरी तत्कालीन अखिलेश यादव की सरकार में मिली थी। बाढ़ खंड ने प्रस्ताव तो मायावती की अगुवाई वाली प्रदेश सरकार में भेजा गया था, लेकिन अखिलेश सरकार बनने के बाद इसके लिए छह सौ 30 करोड़ रुपये मंजूर किए गए। बरेली रामगंगा से बदायूं की दातागंज तहसील के हजरतपुर तक 46 किलोमीटर लंबी नहर से करीब 60 गांव के किसानों को फायदा मिलना है। बाढ़ खंड ने सौ करोड़ रुपया मिलते ही निर्माण कार्य वर्ष-2012 में ही शुरू करा दिया, निर्माण पूरा करने के लिए तीन साल का समय भी तय था, लेकिन बाढ़ खंड को सौ करोड़ रुपये मिलने के बाद धेला भी नहीं मिल पाया। निर्माणाधीन नहर की हकीकत पर गौर करें तो कई स्थानों पर तो उसकी खुदाई का काम भी पूरा नहीं हो पाया है। जहां खुदाई हो चुकी है, वहां उसके कुलावे भी नहीं बन पाए हैं।
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बताते हैं कि निर्माण कार्य को रफ्तार देने के लिए बाढ़ खंड ने वर्ष-2014 में बाकी की रकम अवमुक्त कराने के लिए शासन स्तर पर प्रस्ताव बनाकर भेज दिया था। अगले साल तक जवाब नहीं मिला तो बाढ़ खंड के अफसरों ने शासन स्तर पर संपर्क साधकर बड़े अफसरों को भी बता दिया था कि जमीन के सर्किल रेट में इजाफा हो जाने की वजह से उन्हें रिवाइज बजट मुहैया कराया जाए। रिवाइज प्रस्ताव भी दे दिया गया था। इधर, इलाके के लोगों का कहना है कि बाढ़ खंड नहर के निर्माण को रफ्तार देने में नाकाम रहा है। उन्हें तो जमीन सर्किल रेट के आधार पर कीमत मिलनी चाहिए। बता दें कि बदायूं सिंचाई परियोजना का सबसे बड़ा फायदा भी जिले के ही किसानों को होगा। यह बात अफसर भी जानते हैं। नहर की जो दूरी है, उसमें बरेली का हिस्सा तो महज छह किलोमीटर ही आता है।
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हजरतपुर के दो दर्जन को नहीं होगा कोई खास फायदा
हजरतपुर क्षेत्र के गांव धुबरी, हसौरा, चंगासी, चितरी, वमनपुरा आदि करीब दो दर्जन गांव ऐसे हैं जो रामगंगा में बाढ़ के साथ चपेट में आ जाते हैं। ग्रामीणों के लिए बाढ़ के दिनों में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बताते हैं कि बदायूं सिंचाई परियोजना बदायूं के तहत रामगंगा से हजरतपुर तक जो नहर निर्माणाधीन है, उसका कुछ हिस्सा इन्हीं गांवों से होकर गुजरता है। बाढ़ की वजह से इन गांवों में पहले से ही नमी का माहौल रहता है।
फैक्ट फाइल
इतने गांव को होगा फायदा- 60
नहर परियोजना की लंबाई -46 किलोमीटर
परियोजना का मंजूर बजट- 630 करोड़
अभी तक खोदी गई नहर-22 किलोमीटर
कटरी से जुड़े गांव- 25
रिवाइज होने के बाद में मिलेगा फायदा
-नहर से जुड़े गांवों के लोगों को जमीन के रूप में अब जो मूल्य मिलेगा। वह पहले से अधिक होगा। इसके लिए प्रस्ताव रिवाइज कर विभाग की ओर से शासन को भेज दिया गया है।
बदायूं सिंचाई परियोजना को लेकर वह शासन स्तर पर अफसरों से संपर्क में हैं। रिवाइज रेट में प्रस्ताव भी भेज दिया गया है। बजट की धनराशि अवमुक्त होते ही निर्माण कार्य फिर से रफ्तार पकड़ लेगा।
- राजीव कुमार सिंधू, सहायक अभियंता।