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वायरस अभी जिंदा है...
Updated Sat, 29 Sep 2018 11:05 PM IST
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बुखार का वायरस अभी जिंदा है...
बढ़ रही बुखार पीड़ितों की संख्या, अब और संभलने की जरूरत
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। मलेरिया रूपी वायरस खत्म करने में स्वास्थ्य विभाग अभी फेल है। अब तो मौसम भी पूरी तरह से नहीं बदला है। अब भी मौसम में गर्मी है, जिससे बुखार पीड़ितों की संख्या में कुछ बढ़ोतरी हुई है। दो-चार दिन पहले मरीजों में कुछ कमी आई थी। मृत्युदर भी काफी हद तक कम हो गई थी। परंतु अब फिर बुखार से मरने की खबरें आ रही हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के साथ जनता को भी संभलने की जरूरत है।
जिले में 22 अगस्त से बुखार ने लोगों को निगलना शुरू किया था। 26-27 अगस्त तक मृतकों की संख्या बढ़कर करीब 20-25 तक पहुंच गई। उसके बाद तो बुखार ने ऐसी रफ्तार पकड़ी कि किसी भी दिन दस-पंद्रह से कम लोगों की जान नहीं गई। अभी बीच में दो-एक दिन ऐसे गुजरे, जिस दिन एक या दो लोगों की मौत हुई। एक दिन तो पूरा जिला शांत रहा। तब ऐसा लगा कि अब जिले में किसी पर बुखार का कहर नहीं टूटेगा। बुखार पर कुछ कंट्रोल हुआ परंतु अब दो दिन से बुखार के मृत्यु के केस फिर से आने लगे हैं। इधर, जिला अस्पताल में भी मरीजों की संख्या बढ़ी है। शनिवार दोपहर तक अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की भीड़ रही। मरीजों को डॉक्टर से परामर्श लेने के लिए ओपीडी से बाहर तक लाइन लगानी पड़ी। वहीं पर्चा काउंटर पर भी मरीजों की भीड़ रही। इसी तरह इमरजेंसी के भी हालात रहे। दिन भर इमरजेंसी में मरीजों की लाइन नहीं टूटी। पूरे दिन मरीजों का आना-जाना और भर्ती होना चलता रहा। ----------------
क्या कहते हैं चिकित्सक
मरीजों की संख्या धीरे-धीरे घट रही है। जो नए मरीज हैं, उनके लिए बचाव की जरूरत है। वह सबसे पहले तो मच्छरों से बचाव रखें। स्वच्छ भोजन खाएं और पानी पिए। बुखार के समय अधिक से अधिक पानी पिएं। पैरासीटामोल टेबलेट खाएं। बुखार नहीं उतरे तो जिला अस्पताल आकर डॉक्टर को दिखाएं, तभी दवा लें।
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-डॉ. मोहित यादव, ईएमओ जिला अस्पताल
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बदलते मौसम में वैसे भी लोगों को बचाव रखना चाहिए। इस दौरान लोगों को थोड़ी दिक्कत होती है लेकिन सावधानी बरतनी भी जरूरी है। लोगों को मच्छरों से बचने के लिए मच्छरदानी का उपयोग करना चाहिए। छोटे बच्चों को पूरे कपड़े पहनाएं। स्वास्थ्य में कुछ खराबी दिखे तो डॉक्टर से परामर्श जरूर लें। -डॉ. आशु अग्रवाल, फिजीशियन जिला अस्पताल
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कुंवरगांव में बुखार से बालक की मौत
कुंवरगांव (बदायूं)। समरेर, दातागंज और जगत के बाद संवेदनशील घोषित किए गए सालारपुर ब्लाक क्षेत्र में बुखार का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। आज सैकड़ों लोग बुखार से तप रहे हैं और इससे जान जा रही है। सालारपुर ब्लाक क्षेत्र के ग्राम कैली निवासी सुरेश के चार वर्षीय बेटे श्रीकृष्ण को दो दिन पहले बुखार आया था। बुखार से ऐसी हालत बिगड़ी कि परिवार वाले बालक को प्राइवेट अस्पताल ले गए। फिर वहीं भर्ती करा दिया। डॉक्टर ने उसकी हालत भी गंभीर बताई। तभी से श्रीकृष्ण वहीं भर्ती था और उसका इलाज चल रहा था। शनिवार सुबह श्रीकृष्ण की बुखार से मौत हो गई। इससे बालक के परिवार में कोहराम मच गया। बालक के परिवार वालों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में मुड़ कर नहीं देखा। कुछ समय पहले टीम गांव आई थी। परंतु उसके बाद दोबारा नहीं आई। जबकि गांव में एक नहीं कई लोग बीमार हुए। सभी ने इसी तरह प्राइवेट अस्पतालों में जाकर दवा ली।
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बुखार का वायरस अभी जिंदा है...
बढ़ रही बुखार पीड़ितों की संख्या, अब और संभलने की जरूरत
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। मलेरिया रूपी वायरस खत्म करने में स्वास्थ्य विभाग अभी फेल है। अब तो मौसम भी पूरी तरह से नहीं बदला है। अब भी मौसम में गर्मी है, जिससे बुखार पीड़ितों की संख्या में कुछ बढ़ोतरी हुई है। दो-चार दिन पहले मरीजों में कुछ कमी आई थी। मृत्युदर भी काफी हद तक कम हो गई थी। परंतु अब फिर बुखार से मरने की खबरें आ रही हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के साथ जनता को भी संभलने की जरूरत है।
जिले में 22 अगस्त से बुखार ने लोगों को निगलना शुरू किया था। 26-27 अगस्त तक मृतकों की संख्या बढ़कर करीब 20-25 तक पहुंच गई। उसके बाद तो बुखार ने ऐसी रफ्तार पकड़ी कि किसी भी दिन दस-पंद्रह से कम लोगों की जान नहीं गई। अभी बीच में दो-एक दिन ऐसे गुजरे, जिस दिन एक या दो लोगों की मौत हुई। एक दिन तो पूरा जिला शांत रहा। तब ऐसा लगा कि अब जिले में किसी पर बुखार का कहर नहीं टूटेगा। बुखार पर कुछ कंट्रोल हुआ परंतु अब दो दिन से बुखार के मृत्यु के केस फिर से आने लगे हैं। इधर, जिला अस्पताल में भी मरीजों की संख्या बढ़ी है। शनिवार दोपहर तक अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की भीड़ रही। मरीजों को डॉक्टर से परामर्श लेने के लिए ओपीडी से बाहर तक लाइन लगानी पड़ी। वहीं पर्चा काउंटर पर भी मरीजों की भीड़ रही। इसी तरह इमरजेंसी के भी हालात रहे। दिन भर इमरजेंसी में मरीजों की लाइन नहीं टूटी। पूरे दिन मरीजों का आना-जाना और भर्ती होना चलता रहा। ----------------
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क्या कहते हैं चिकित्सक
मरीजों की संख्या धीरे-धीरे घट रही है। जो नए मरीज हैं, उनके लिए बचाव की जरूरत है। वह सबसे पहले तो मच्छरों से बचाव रखें। स्वच्छ भोजन खाएं और पानी पिए। बुखार के समय अधिक से अधिक पानी पिएं। पैरासीटामोल टेबलेट खाएं। बुखार नहीं उतरे तो जिला अस्पताल आकर डॉक्टर को दिखाएं, तभी दवा लें।
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-डॉ. मोहित यादव, ईएमओ जिला अस्पताल
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बदलते मौसम में वैसे भी लोगों को बचाव रखना चाहिए। इस दौरान लोगों को थोड़ी दिक्कत होती है लेकिन सावधानी बरतनी भी जरूरी है। लोगों को मच्छरों से बचने के लिए मच्छरदानी का उपयोग करना चाहिए। छोटे बच्चों को पूरे कपड़े पहनाएं। स्वास्थ्य में कुछ खराबी दिखे तो डॉक्टर से परामर्श जरूर लें। -डॉ. आशु अग्रवाल, फिजीशियन जिला अस्पताल
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कुंवरगांव में बुखार से बालक की मौत
कुंवरगांव (बदायूं)। समरेर, दातागंज और जगत के बाद संवेदनशील घोषित किए गए सालारपुर ब्लाक क्षेत्र में बुखार का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। आज सैकड़ों लोग बुखार से तप रहे हैं और इससे जान जा रही है। सालारपुर ब्लाक क्षेत्र के ग्राम कैली निवासी सुरेश के चार वर्षीय बेटे श्रीकृष्ण को दो दिन पहले बुखार आया था। बुखार से ऐसी हालत बिगड़ी कि परिवार वाले बालक को प्राइवेट अस्पताल ले गए। फिर वहीं भर्ती करा दिया। डॉक्टर ने उसकी हालत भी गंभीर बताई। तभी से श्रीकृष्ण वहीं भर्ती था और उसका इलाज चल रहा था। शनिवार सुबह श्रीकृष्ण की बुखार से मौत हो गई। इससे बालक के परिवार में कोहराम मच गया। बालक के परिवार वालों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में मुड़ कर नहीं देखा। कुछ समय पहले टीम गांव आई थी। परंतु उसके बाद दोबारा नहीं आई। जबकि गांव में एक नहीं कई लोग बीमार हुए। सभी ने इसी तरह प्राइवेट अस्पतालों में जाकर दवा ली।