सर्जिकल वार्ड में मरीज-डॉक्टर में झड़प, हंगामा

Bareily Bureauबरेली ब्यूरो Updated Wed, 26 Sep 2018 11:05 PM IST
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सर्जिकल वार्ड में मरीज-
डॉक्टर में झड़प, हंगामा
मरीज ट्रांसफर करने पर गर्माए, कई साथी बुलाए, सीएमएस ने सुलझाया मामला
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। जिला अस्पताल के सर्जिकल वार्ड में मरीज ट्रांसफर करने के दौरान बुधवार सुबह जमकर हंगामा हुआ। एक मरीज और डॉक्टर आपस में भिड़ गए। मरीज ने गालीगलौज कर दी और अपने कई साथियों को बुला लिया। बात मारपीट तक पहुंच गई लेकिन तब तक सीएमएस और कई अन्य डॉक्टर पहुंच गए, जिन्होंने जैसे-तैसे मामला संभाला और मरीज को दूसरे वार्ड में ट्रांसफर कराया। इस दौरान काफी देर तक अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल रहा।
बात सुबह करीब नौ बजे की है। जिला अस्पताल में तीन-चार दिन पहले बुखार पीड़ितों की संख्या अधिक थी। इससे मरीजों को जहां जगह मिली, वहीं भर्ती कराए गए। इमरजेंसी वार्ड पहले से फुल चल रहा था। बाकी मेडिकल और पेइंग वार्ड में भी कोई बेड खाली नहीं था। इससे मरीजों को सर्जिकल वार्ड में भी भर्ती किया गया। वैसे सर्जिकल वार्ड मारपीट या सड़क हादसों में घायलों के लिए है। मजबूरी में यहां मरीजों को भर्ती किया था। बुधवार सुबह करीब नौ बजे डॉ. रिशिम अग्रवाल मरीजों को देखने पहुंचे थे। वार्ड में बुखार पीड़ितों को भर्ती देखा तो उन्होंने बुखार के मरीजों को पेइंग या मेडिकल वार्ड में ट्रांसफर करने को कहा। इस दौरान कुछ मरीज तो मान गए, लेकिन एक मरीज ने दूसरे वार्ड में जाने का विरोध किया। इसी बात पर डॉक्टर और मरीज में गहमा-गहमी हो गई। इस पर मरीज ने अपने कुछ साथियों को फोन करके बुला लिया। मामला गाली-गलौज से मारपीट तक पहुंच पाता, उससे पहले डॉ. रिशिम अग्रवाल ने सीएमएस डॉ. भारत भूषण पुष्कर को सूचना दे दी। इससे सीएमएस और अस्पताल के कई अन्य डॉक्टर वार्ड में पहुंच गए। उन्होंने बमुश्किल मरीजों को शांत किया और उन्हें एक-एक करके दूसरे वार्ड में शिफ्ट कराया।
वर्जन--
डॉ. रिशिम अग्रवाल बुखार पीड़ित मरीज को दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर रहे थे। मरीज दूसरे वार्ड में नहीं होना चाह रहा था। इसी बात को लेकर कहासुनी हो गई थी और कुछ नहीं है। यह मामला उसी समय निपट गया था।
डॉ. भारत भूषण पुष्कर, सीएमएस जिला अस्पताल
2.
अब जिला अस्पताल में मलेरिया किट घोटाला
करीब चार हजार किट गायब होने का अनुमान
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। जिले में करीब बीस हजार मलेरिया किट घोटाले की चर्चा आम होने के बाद जिला अस्पताल में भी किट घोटाले की बात सामने आई है। अनुमान है कि करीब चार हजार मलेरिया किट गायब हुुई हैं। अभी विभाग के पास कोई पुख्ता सुबूत नहीं है। अधिकारियों ने मामले की जांच कराने को कहा है। जनपद के स्वास्थ्य केंद्रों पर मलेरिया की जांच करने के लिए करीब 18 हजार मलेरिया किट मोहैया कराई गईं थीं। इसी तरह जिला और महिला अस्पताल को भी किट दी गई थीं। संबंधित विभाग के एक कर्मचारी की माने तो जिला अस्पताल की पैथोलॉजी में अधिकतर जांचें स्लाइड से की गईं। जबकि मलेरिया किटों को बचा लिया गया। किट से उन्हीं मरीजों की जांच की गई, जो अस्पताल में भर्ती थे या किसी कर्मचारी के नजदीकी थे। कर्मचारी की माने तो यह किटें एक-एक हजार करके या पांच-पांच सौ करके ली गईं थीं। अगर इस मामले की सही से जांच कराई जाए तो पूरा घोटाला खुलकर सामने आ सकता है। अनुमान है कि जिला अस्पताल की पैथोलॉजी में ही चार हजार किटें गायब हुई हैं। यह किटें कहां गईं, इसकी किसी को जानकारी नहीं हैं और न ही किसी अधिकारी ने अब तक इस मामले की जांच कराने की जरूरत समझी है।
वर्जन--
मलेरिया किट गायब होने के संबंध में डीजी की ओर से रिपोर्ट मांगी गई थी। उसकी हमने रिपोर्ट बनाकर भी भेज दी। जिला अस्पताल में मलेरिया किट गायब हुईं हैं, इसकी जानकारी नहीं हैं। अगर ऐसा है तो मामले की जांच कराते हैं। तभी कोई कार्रवाई होगी।
डॉ. आशाराम, सीएमओ
3.
सीएचसी में क्लीनिक चलाने वाले कुष्ठ रोग सहायक पर कार्रवाई तय
सीएमओ बोले: जांच रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा एक्शन
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अपना क्लीनिक चलाते मिले कुष्ठ रोग सहायक पर कार्रवाई तय मानी जा रही। सीएमओ ने कहा है कि इस संबंध में एमओआईसी से रिपोर्ट मांगी गई है। इसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
सीएचसी में निजी क्लीनिक चलाने का खुलासा तब हुआ था कि मंगलवार को कुछ मरीज नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर दवा लेने के लिए पहुंचे थे। उस समय कुष्ठ रोग सहायक नरेश कुमार अपने कमरे में बैठे थे। उन्होंने ही मरीजों को देखा था और उन्हें दवा दी थी। आरोप है कि उन्होंने दवा देने के बाद मरीजों से चार सौ रुपये मांगे। इससे मरीज बिफर गए, उन्होंने सीएचसी में हंगामा कर दिया। साथ ही आरोप लगाया कि सीएचसी में निशुल्क दवा दी जाती है, तो उनसें चार सौ रुपये किस बात के लिए जा रहे हैं। हंगामे की सूचना पर एमओआईसी डॉ. डीके सिंह मौके पर पहुंच गए। उन्होंने मामला बिगड़ता देख तुरंत कुष्ठ रोग सहायक का कमरा खाली करा दिया। इस मामले की चर्चा हुई तो अन्य बातें भी निकलकर सामने आईं। लोगों ने बताया कि यहां कई महीनों से सीएचसी में निजी क्लीनिक चल रहा था। इसमें सरकारी दवाओं के साथ कुछ बाहरी दवाइयां भी मिलीं। इधर, मामला सीएमओ डॉ. आशाराम के संज्ञान में पहुंचने पर उन्होंने बताया कि इस संबंध में एमओआईसी दातागंज से रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट आने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। अगर आरोप सही निकले तो कार्रवाई में देरी नहीं होगी।
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