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गर्भवती शिक्षिका को अवकाश न देना पड़ा महंगा

Wed, 10 Apr 2019 01:29 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 10 Apr 2019 01:29 AM IST
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गर्भवती शिक्षिका को अवकाश न देना पड़ा महंगा
बदायूं। बेसिक शिक्षा विभाग का हाल बेहाल है। यहां साठगांठ के बाद हर वह काम हो सकता है, जो गलत है, वहीं सही काम कराने के लिए एड़ी से चोटी तक का जोर लगाना पड़ता है। ऐसा ही एक मामला बेसिक विभाग में फिर नजर मेें आया है, जिसमें गर्भवती महिला शिक्षक ने दो माह पूर्व प्रसूति अवकाश के लिए आवेदन किया, लेकिन अवकाश नहीं मिला। इस पर शिक्षिका की शिकायत पर सीडीओ ने बीएसए को पूरी रिपोर्ट समेत तलब किया। सीडीओ का कड़ा रुख देख बीएसए ने संबंधित लिपिक को निलंबित कर दिया। साथ ही शिक्षिका का अवकाश भी स्वीकृत कर दिया गया।
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एक गर्भवती महिला शिक्षक ने सीडीओ निशा अनंत से शिकायत की। ब्लॉक उझानी के प्राथमिक विद्यालय अढौली में तैनात शिक्षिका सुगंध का कहना था कि दो फरवरी को खंड शिक्षा अधिकारी के माध्यम से बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में अवकाश का प्रार्थनापत्र दिया, लेकिन दो माह से ज्यादा निकल जाने के बाद भी प्रसूति अवकाश नहीं मिला।
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इस पर सीडीओ ने महिला शिक्षक की सभी रिपोर्ट और अन्य कागज देखे, जिसमें उन्होंने पाया कि अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट में दो अप्रैल को डिलीवरी की संभावित तिथि दी गई है, जबकि बीएसए कार्यालय से एक अप्रैल को जारी पत्र में शिक्षिका से मुख्य चिकित्साधिकारी का चिकित्सा प्रमाण पत्र एवं परीक्षण कराने की टिप्पणी अंकित की गई थी। इस पर सीडीओ ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि इससे लगता है कि अनावश्यक रूप से आधारहीन आपत्तियां लगाकर जान-बूझकर विलंब किया जा रहा है, जो सही नहीं है। सीडीओ ने बीएसए रामपाल सिंह राजपूत को प्रसूति अवकाश से संबंधित सभी आवेदन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। ऐसे में सीडीओ का कड़ा रुख देखकर बीएसए ने पटल देख रहे वरिष्ठ लिपिक मुनीश कुमार को निलंबित कर दिया, साथ ही ब्लाक दहगवां में उपस्थिति दर्ज कराने के आदेश दिए। साथ ही इस प्रकरण की जांच सहसवान और दातागंज बीईओ को सौंप दी। बीएसए ने बताया कि संबंधित लिपिक द्वारा समय से फाइल नहीं दी गई थी, जिस वजह से अवकाश स्वीकृत नहीं हो सका। लिपिक को निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही महिला शिक्षक का प्रसूति अवकाश भी स्वीकृत कर दिया गया है।
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