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सड़क पर नहीं सलाखों के पीछे है अपराधियों की जगह: एसएसपी
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बदायूं। नए एसएसपी अशोक कुमार त्रिपाठी ने चार्ज संभालते ही अधीनस्थों से अपनी मंशा स्पष्ट करते हुए कहा कि अपराधी की जगह सड़क पर नहीं बल्कि सलाखों के पीछे है। अधिकारी अभी से यह देख लें कि कौन अपराधी उनके क्षेत्र में घूम रहा है। उसे तत्काल जेल पहुंचाएं, अन्यथा संबंधित इंस्पेक्टर या थाना इंचार्ज जिम्मेदार होंगे।
यह बात उन्होंने बुधवार को पत्रकारों के बीच कही। 2009 बैच के आईपीएस अशोक कुमार त्रिपाठी ने कहा कि सरकार की मंशा समाज के हर वर्ग को सुरक्षा देना है। उसी मंशा के अनुरूप वह काम करेंगे। बोले, अपराधी चाहे कितना ही प्रभावशाली क्यों न हो, उसे समाज में आतंक फैलाने नहीं दिया जाएगा। करीब एक साल तक इटावा में एसएसपी रहे त्रिपाठी ने कहा कि अपराध नियंत्रण में जनसहयोग सबसे अहम होता है। उन्होंने कहा कि जिले में जो बड़ी घटनाएं घटित हुई हैं। उनका जल्द वर्कआउट कराया जाएगा। देखा जाएगा कि उनके पीछे किन लोगों की भूमिका है। वे लोग बिल्कुल परेशान न हों, जो वास्तव में निर्दोष हैं। वे किसी दलाल के चक्कर में न पड़कर पुलिस से मिलें और अपने साक्ष्य जरूर दें, जिससे उन्हें फर्जी नामजदगी से निकाला जा सके। उन्होंने कहा कि अभी उन्होंने चार्ज संभाला है। आने वाले समय में जिले की सीमा से लगे सभी जनपदों के पुलिस अधिकारियों से संपर्क करेंगे, जिससे अपराधियों तक पहुंचने में आसानी रहे।
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राष्ट्रपति पदक प्राप्त हैं एसएसपी
क्राइम कंट्रोल और अच्छे कार्यों के लिए एसएसपी को राष्ट्रपति पदक, गोल्ड मेडल और सिल्वर मेडल मिल चुका है। इससे पूर्व त्रिपाठी हमीरपुर, जालौन और एटा में एसएसपी रहे। इससे पहले वह एसटीएफ, नोयडा और गाजियाबाद में एसपी सिटी जबकि झांसी और कानपुर में सीओ के पद पर रहे।
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यह बात उन्होंने बुधवार को पत्रकारों के बीच कही। 2009 बैच के आईपीएस अशोक कुमार त्रिपाठी ने कहा कि सरकार की मंशा समाज के हर वर्ग को सुरक्षा देना है। उसी मंशा के अनुरूप वह काम करेंगे। बोले, अपराधी चाहे कितना ही प्रभावशाली क्यों न हो, उसे समाज में आतंक फैलाने नहीं दिया जाएगा। करीब एक साल तक इटावा में एसएसपी रहे त्रिपाठी ने कहा कि अपराध नियंत्रण में जनसहयोग सबसे अहम होता है। उन्होंने कहा कि जिले में जो बड़ी घटनाएं घटित हुई हैं। उनका जल्द वर्कआउट कराया जाएगा। देखा जाएगा कि उनके पीछे किन लोगों की भूमिका है। वे लोग बिल्कुल परेशान न हों, जो वास्तव में निर्दोष हैं। वे किसी दलाल के चक्कर में न पड़कर पुलिस से मिलें और अपने साक्ष्य जरूर दें, जिससे उन्हें फर्जी नामजदगी से निकाला जा सके। उन्होंने कहा कि अभी उन्होंने चार्ज संभाला है। आने वाले समय में जिले की सीमा से लगे सभी जनपदों के पुलिस अधिकारियों से संपर्क करेंगे, जिससे अपराधियों तक पहुंचने में आसानी रहे।
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राष्ट्रपति पदक प्राप्त हैं एसएसपी
क्राइम कंट्रोल और अच्छे कार्यों के लिए एसएसपी को राष्ट्रपति पदक, गोल्ड मेडल और सिल्वर मेडल मिल चुका है। इससे पूर्व त्रिपाठी हमीरपुर, जालौन और एटा में एसएसपी रहे। इससे पहले वह एसटीएफ, नोयडा और गाजियाबाद में एसपी सिटी जबकि झांसी और कानपुर में सीओ के पद पर रहे।
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