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48 घंटों में बुखार से 12 और लोगों की मौत
अमर उजाला ब्यूरो,बदायूं
Updated Sat, 02 Sep 2017 11:03 PM IST
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जिले में बुखार का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। अलग-अलग स्थानों पर 48 घंटों में बुखार से 12 लोगों की मौत हो गई। इसके अलावा अनेक लोग पीड़ित हैं। कई मौतों के बाद भी स्वास्थ्य महकमे ने लोगों की सुध नहीं ली है।
बिनावर कस्बा निवासी 40 वर्षीय विनोद कुमार अपनी पत्नी, तीन बच्चों और भाई के साथ 31 अगस्त को मां वैष्णो देवी के दर्शन करने जम्मू गया था। परिवार वालों के मुताबिक विनोद को वहां बुखार आया और सीने में दर्द हुआ। हालत बिगड़ने पर उसे कटरा के एक अस्पताल में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। इस बात की खबर जब परिवार वालों को दी तो कोहराम मच गया। सीओ सिटी और बिनावर एसओ संजय राय के फैक्स कराने पर वहां अस्पताल से शव परिवार को सौंपा गया। वहीं गांव रहपुरा निवासी 38 वर्षीय रामसेवक पुत्र रामपाल कश्यप को दोपहर बदायूं इलाज के लिए ला रहे थे। बिनावर से निकलते ही टेंपो में ही रामसेवक की मौत हो गई। दूसरी ओर मूसाझाग क्षेत्र के गांव रायपुर निवासी दिनेश के तीन वर्षीय पुत्र अनिकेत को बुखार की शिकायत पर परिवार वाले बदायूं इलाज के लिए ले जा रहे थे कि इसी दौरान उसकी मौत हो गई। गांव तजपुरा में मोरपाल के 17 वर्षीय पुत्र राजवीर की भी मौत हो गई। उसका इलाज झोलाछाप डॉक्टर से चल रहा था। बदायूं लाते समय उसने दम तोड़ दिया। समरेर ब्लॉक के काला कुंडा गांव के नेम सिंह (45) की बरेली ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई। बछलिया गांव के 10 वर्षीय रोहित पुत्र राजेश को भी बुखार आने पर परिवार वाले उसे बरेली के रुहेलखंड अस्पताल ले जा रहे थे। रास्ते में उसकी मौत हो गई। वहीं आठ वर्षीय भारत की शुक्रवार को मौत हो गई। कछला के रफानीनगला के 23 वर्षीय बबलू को चार दिन से बुखार आ रहा था। परिवार वाले शनिवार सुबह उसे बरेली ले जा रहे थे, रास्ते में बबलू ने दम तोड़ दिया। बगरैन के गांव पैंपल में 40 वर्षीय सुनीता पत्नी पुरुषोत्तम को बुखार आया था। उसकी मौत हो गई। गरगैया गांव में 18 वर्षीय शरद तथा कुंवरपाल की भी बुखार से मौत हो गई। परिवार वालों का रो-रोकर बुुरा हाल है। ग्रामीणों का कहना है कई लोग बुखार की चपेट में हैं। जिन्हें सरकारी अस्पतालों की ओर से किसी भी प्रकार का इलाज मुहैया नहीं कराया जा रहा है। झोलाछाप डॉक्टर को दिखाने के लिए मजबूर हैं। ग्रामीणों में दहशत बनी है। इधर, कुंवरगांव क्षेत्र के गांव ऐरुइया निवासी फूलादेवी (65) की भी बुखार से मौत हो गई।
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बिनावर कस्बा निवासी 40 वर्षीय विनोद कुमार अपनी पत्नी, तीन बच्चों और भाई के साथ 31 अगस्त को मां वैष्णो देवी के दर्शन करने जम्मू गया था। परिवार वालों के मुताबिक विनोद को वहां बुखार आया और सीने में दर्द हुआ। हालत बिगड़ने पर उसे कटरा के एक अस्पताल में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। इस बात की खबर जब परिवार वालों को दी तो कोहराम मच गया। सीओ सिटी और बिनावर एसओ संजय राय के फैक्स कराने पर वहां अस्पताल से शव परिवार को सौंपा गया। वहीं गांव रहपुरा निवासी 38 वर्षीय रामसेवक पुत्र रामपाल कश्यप को दोपहर बदायूं इलाज के लिए ला रहे थे। बिनावर से निकलते ही टेंपो में ही रामसेवक की मौत हो गई। दूसरी ओर मूसाझाग क्षेत्र के गांव रायपुर निवासी दिनेश के तीन वर्षीय पुत्र अनिकेत को बुखार की शिकायत पर परिवार वाले बदायूं इलाज के लिए ले जा रहे थे कि इसी दौरान उसकी मौत हो गई। गांव तजपुरा में मोरपाल के 17 वर्षीय पुत्र राजवीर की भी मौत हो गई। उसका इलाज झोलाछाप डॉक्टर से चल रहा था। बदायूं लाते समय उसने दम तोड़ दिया। समरेर ब्लॉक के काला कुंडा गांव के नेम सिंह (45) की बरेली ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई। बछलिया गांव के 10 वर्षीय रोहित पुत्र राजेश को भी बुखार आने पर परिवार वाले उसे बरेली के रुहेलखंड अस्पताल ले जा रहे थे। रास्ते में उसकी मौत हो गई। वहीं आठ वर्षीय भारत की शुक्रवार को मौत हो गई। कछला के रफानीनगला के 23 वर्षीय बबलू को चार दिन से बुखार आ रहा था। परिवार वाले शनिवार सुबह उसे बरेली ले जा रहे थे, रास्ते में बबलू ने दम तोड़ दिया। बगरैन के गांव पैंपल में 40 वर्षीय सुनीता पत्नी पुरुषोत्तम को बुखार आया था। उसकी मौत हो गई। गरगैया गांव में 18 वर्षीय शरद तथा कुंवरपाल की भी बुखार से मौत हो गई। परिवार वालों का रो-रोकर बुुरा हाल है। ग्रामीणों का कहना है कई लोग बुखार की चपेट में हैं। जिन्हें सरकारी अस्पतालों की ओर से किसी भी प्रकार का इलाज मुहैया नहीं कराया जा रहा है। झोलाछाप डॉक्टर को दिखाने के लिए मजबूर हैं। ग्रामीणों में दहशत बनी है। इधर, कुंवरगांव क्षेत्र के गांव ऐरुइया निवासी फूलादेवी (65) की भी बुखार से मौत हो गई।
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