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...तो निरस्त नहीं होंगे फर्जी मेडिकल प्रमाण पत्र बने डीएल

Sun, 08 Jul 2018 12:45 AM IST
Updated Sun, 08 Jul 2018 12:45 AM IST
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...तो निरस्त नहीं होंगे फर्जी मेडिकल प्रमाण पत्र बने डीएल
 एआरटीओ कार्यालय में फर्जी मेडिकल प्रमाण पत्र पर ड्राइविंग लाइसेंस बनाए जाने का खुलासा होने के बाद अफसर लीपापोती में जुटे हैं। कार्रवाई करने के बजाय जांच प्रक्रिया लंबी बताकर जालसाजों को बचाने की कोशिश की जा रही है। इस फर्जीवाड़े का कोई संज्ञान लेने वाला नहीं है।
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जिला अस्पताल के चिकित्सक ने डीएल आवेदन को आए आवेदनों में करीब 30-35 फर्जी मेडिकल रिपोर्ट की पुष्टि की थी, परंतु इसका एआरटीओ विभाग पर कोई फर्क नहीं पड़ा। जैसे कार्य पहले चल रहा था आज भी वैसे ही आवेदन आ रहे हैं और डीएल बन रहे हैं। नियम तो यह था कि फर्जी मेडिकल रिपोर्ट पाए जाने पर उन्हें निरस्त किया जाना चाहिए था या फिर आवेदकों के दोबारा से मेडिकल कराने चाहिए थे। जरूरी था कि देखा जाता कि फर्जी मेडिकल रिपोर्ट आईं कहां से? कौन बनवा रहा था? परंतु एआरटीओ विभाग में ऐसा कुछ नहीं हुआ। न तो विभाग ने स्वयं इस मामले की जांच की और न ही मेडिकल रिपोर्ट को फर्जी माना।
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बिल्सी रोड पर स्थित एआरटीओ में फैले भ्रष्टाचार का पता तभी चलता है, जब स्वयं भुक्तभोगी डीएम दरबार पहुंचे या फिर किसी से शिकायत करे। यहां के एक-एक करके कई मामले सामने आ चुके हैं। एक मामले की सिविल लाइंस थाने में रिपोर्ट भी दर्ज हुई थी। इससे पहले भी फर्जी लाइसेंस बन चुके थे। जिसका खुलासा भी हुआ था। तीसरा बड़ा खुलासा बीते दिन हुआ था। जिसमें बहुत बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया था। इसको अंजाम देने वालों ने जिला अस्पताल के चिकित्सक के फर्जी हस्ताक्षर तक कर लिए थे और उनके हस्ताक्षरों पर फर्जी मेडिकल रिपोर्ट तक तैयार कर ली। इतना ही नहीं इन मेडिकल रिपोर्ट को ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए प्रयोग किया गया। चिकित्सक को इसका तब पता चला जब जिला अस्पताल में मेडिकल रिपोर्ट बनवाने वालों की संख्या स्वयं कम हो गई। शक हुआ तो डॉ. पीयूष कुमार अग्रवाल अपनी टीम के साथ एआरटीओ दफ्तर पहुंच गए। उन्होंने स्वयं आवेदनों में लगी मेडिकल रिपोर्ट चेक की। उसके बाद डॉ. अग्रवाल ने उन मेडिकल रिपोर्ट को फर्जी करार दिया। इतना ही नहीं उन्होंने इसके बारे में एआरटीओ कार्यालय को भी बताया। साथ ही ऐसे मेडिकल रिपोर्ट लाने वालों के खिलाफ कार्रवाई और रोकथाम की मांग की।
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इस मामले को करीब एक सप्ताह गुजरने जा रहा है परंतु अब तक न तो फर्जी मेडिकल रिपोर्ट बनवाने वाले पकड़े गए और न ही मामले मे कोई कार्रवाई की गई। जबकि स्वयं चिकित्सक इन मेडिकल रिपोर्ट को फर्जी करार दे चुके हैं।

 
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