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आलू के दिन सुधरे, गेहूं की बल्ले-बल्ले
Updated Tue, 30 Jan 2018 06:36 PM IST
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आलू के दिन सुधरे, गेहूं की भी बल्ले-बल्ले
मौसम अनुकूल हुआ तो खिले उत्पादकों के चेहरे
दलहन में सरसों और मसूर का उत्पादन रहेगा ठीक
अमर उजाला ब्यूरो
उझानी (बदायूं)।
पिछले कई दिनों से पड़ रही कड़ाके की ठंड से निजात मिलते ही फसलों पर भी हरियाली छा गई है। पाला और कोहरे के प्रकोप से जूझ रहे सब्जियों के राजा को राहत मिली तो उसके दिन सुधरने लग गए हैं। कमोवेश ऐसा ही हाल गेहूं का भी है। गेहूं उत्पादन बंपर होने की उम्मीद के साथ ही उत्पादकों के चेहरों पर रौनक लौट आई है।
दिसंबर के अंतिम दिनों और जनवरी की शुरुआत में मौसम ने जिस तरह से पिछेती गेहूं की फसल को चपेट में लेना शुरू किया था, उससे उत्पादकों की परेशानी बढ़ गई थी। गेहूं उत्पादक इस सोच में पड़ गए थे कि मौसम का मिजाज ठीक नहीं रहा तो पैदावार भी प्रभावित होगी लेकिन चार-पांच दिनों से तापमान सामान्य होने लग गया। सुबह-शाम की ठंड ने गेहूं की बल्ले-बल्ले कर दी है। उम्मीद है कि उत्पादन प्रति बीघा चार क्विंटल के करीब रहेगा। अगेती गेहूं की फसल तो पहले ही ठीक है।
आलू की फसल पर संकट के बादल भी मौसम के साथ छंट गए हैं। अब तो झुलसा रोग की आशंका भी नहीं रही। सब्जी फसलों में ही टमाटर, शिमला मिर्च, गोभी, मटर के साथ दलहन में सरसों और मसूर से अच्छे उत्पादन के अनुमान के बीच वैज्ञानिकों की माने तो मौसम में नमी बरकरार रही तो सभी फसलों को फायदा रहेगा। सरसों पर माहु का अंदेशा भी टल गया है। पाला पड़ने की स्थिति में माहु और झुलसा नुकसानदेह बन जाता है।
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क्या कहते हैं किसान
नरऊ निवासी किसान महावीर सिंह ने बताया कि आलू की फसल में नुकसान की आशंका थी लेकिन मौसम अनुरूप हो जाने से अब कोई नुकसान नहीं होगा। शुरू में आलू की फसल का झुलसा लगा था। हल्की सिंचाई करने से स्थिति सामान्य हो गई।
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अहीरटोला मोहल्ला निवासी अनेकपाल यादव का कहना है कि इस बार शिमला मिर्च से किसानों को फायदा उम्मीद की अनुरूप हुआ है। शिमला मिर्च की फसल के लिहाज से मौसम भी ठीक रहा था। साथ ही रेट भी अच्छा मिल गया।
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क्षेत्र के गांव बमनौसी निवासी सत्यवीर सिंह ने बताया कि करीब के गांवों में किसानों को फसल का वाजिब दाम नहीं मिल पाता। फसलों की अच्छी पैदावार का सही फायदा तो उसी हालत में होगा जब प्रदेश सरकार गेहूं के समर्थन मूल्य में वृद्धि करे।
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आलू के दिन सुधरे, गेहूं की भी बल्ले-बल्ले
मौसम अनुकूल हुआ तो खिले उत्पादकों के चेहरे
दलहन में सरसों और मसूर का उत्पादन रहेगा ठीक
अमर उजाला ब्यूरो
उझानी (बदायूं)।
पिछले कई दिनों से पड़ रही कड़ाके की ठंड से निजात मिलते ही फसलों पर भी हरियाली छा गई है। पाला और कोहरे के प्रकोप से जूझ रहे सब्जियों के राजा को राहत मिली तो उसके दिन सुधरने लग गए हैं। कमोवेश ऐसा ही हाल गेहूं का भी है। गेहूं उत्पादन बंपर होने की उम्मीद के साथ ही उत्पादकों के चेहरों पर रौनक लौट आई है।
दिसंबर के अंतिम दिनों और जनवरी की शुरुआत में मौसम ने जिस तरह से पिछेती गेहूं की फसल को चपेट में लेना शुरू किया था, उससे उत्पादकों की परेशानी बढ़ गई थी। गेहूं उत्पादक इस सोच में पड़ गए थे कि मौसम का मिजाज ठीक नहीं रहा तो पैदावार भी प्रभावित होगी लेकिन चार-पांच दिनों से तापमान सामान्य होने लग गया। सुबह-शाम की ठंड ने गेहूं की बल्ले-बल्ले कर दी है। उम्मीद है कि उत्पादन प्रति बीघा चार क्विंटल के करीब रहेगा। अगेती गेहूं की फसल तो पहले ही ठीक है।
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आलू की फसल पर संकट के बादल भी मौसम के साथ छंट गए हैं। अब तो झुलसा रोग की आशंका भी नहीं रही। सब्जी फसलों में ही टमाटर, शिमला मिर्च, गोभी, मटर के साथ दलहन में सरसों और मसूर से अच्छे उत्पादन के अनुमान के बीच वैज्ञानिकों की माने तो मौसम में नमी बरकरार रही तो सभी फसलों को फायदा रहेगा। सरसों पर माहु का अंदेशा भी टल गया है। पाला पड़ने की स्थिति में माहु और झुलसा नुकसानदेह बन जाता है।
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क्या कहते हैं किसान
नरऊ निवासी किसान महावीर सिंह ने बताया कि आलू की फसल में नुकसान की आशंका थी लेकिन मौसम अनुरूप हो जाने से अब कोई नुकसान नहीं होगा। शुरू में आलू की फसल का झुलसा लगा था। हल्की सिंचाई करने से स्थिति सामान्य हो गई।
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अहीरटोला मोहल्ला निवासी अनेकपाल यादव का कहना है कि इस बार शिमला मिर्च से किसानों को फायदा उम्मीद की अनुरूप हुआ है। शिमला मिर्च की फसल के लिहाज से मौसम भी ठीक रहा था। साथ ही रेट भी अच्छा मिल गया।
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क्षेत्र के गांव बमनौसी निवासी सत्यवीर सिंह ने बताया कि करीब के गांवों में किसानों को फसल का वाजिब दाम नहीं मिल पाता। फसलों की अच्छी पैदावार का सही फायदा तो उसी हालत में होगा जब प्रदेश सरकार गेहूं के समर्थन मूल्य में वृद्धि करे।