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प्राइवेट विद्यालयों को मात दे रहा गोठा का परिषदीय विद्यालय।
Updated Wed, 06 Sep 2017 10:03 AM IST
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वजीरगंज।
सरकारी विद्यालयों की देख रेख की जिम्मेदारी परिषद के अधीन होती है। प्रत्येक वर्ष पांच से आठ हजार रुपये तक रखरखाव के लिए अनुदान में दिए जाते हैं किंतु महंगाई के इस दौर में ये धनराशि ऊंट के मुंह मे जीरा साबित हो रही है। आवश्यक संसाधन न होने से ऐसे में अध्यापक मायूस हो जाते हैं। इन मायूसी के मध्य प्रकाश की किरण बन कर उभरा है वजीरगंज विकास क्षेत्र का पूर्व माध्यमिक विद्यालय गोठा। जहां के शिक्षक मनोज कुमार वार्ष्णेय ने सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से ऐसा विकास किया है जो प्रदेश के अन्य शिक्षकों के लिए प्रेरणा बन चुका है।
बच्चों के लिए व्हाइट बोर्ड से लेकर विद्यालय के प्रांगण में स्थित पौधे तक सामुदायिक सहभागिता की देन है। शिक्षक मनोज नियुक्ति वर्ष 2013 में हुई थी। शीघ्र ही उन्होंने ग्रामवासियों का दिल जीत लिया। जिस विद्यालय में कभी छात्र उपस्थिति 40-50 प्रतिशत रहती थी तो नामांकन 61 था वह वर्तमान में 138 हो गया है बच्चे प्राइवेट स्कूलों से नाम कटवाकर विद्यालय में दखिला करा रहे हैं वर्तमान माह में छात्र उपस्थिति 100 प्रतिशत चल रही है। मनोज कुमार ने सामुदायिक सहभगिता की शुरुआत विद्यालय में ईको क्लब के गठन के साथ की। इस क्लब के माध्यम से विद्यालय में प्रत्येक बच्चे के जन्मदिवस पर पौधरोपण एवं उसकी देखभाल की जिम्मेदारी उसी बच्चे को देकर भावनात्मक संबंध बनाया जा रहा है। आज गोठा के विद्यालय में कांवेंट जैसी सुविधाएं हैं। प्रोजेक्टर से लेकर अत्याधुनिक विज्ञान प्रयोगशाला, कम्प्यूटर लैब, स्मार्ट क्लास, जनरेटर, साउंड सिस्टम, इंवर्टर आदि हैं। मनोज कुमार वार्ष्णेय के अनुसार विद्यालय के प्रधानाध्यापक नेत्रपाल सिंह चौहान और शिक्षिका सुधा सिंह के सहयोग से ही वे विद्यालय को यहां तक ला सके हैं। विद्यालय समय के बाद मनोज कमजोर और प्रतिभाशाली छात्र छात्राओं को समय देते हैं। इसी तरह विद्यालय में सामुदायिक सहभागिता का पता इसी बात से लगाया जा सकता है कि बिना बाउंड्री वाल के विद्यालय में अनेक प्रकार के फूल खिलते हैं
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साहित्य के क्षेत्र में निकाली गोठा संकल्प पत्रिका
शिक्षक मनोज वार्ष्णेय ने विद्यालय की पत्रिका कोटा संकल्प प्रकाशित की जो बेसिक के इतिहास में किसी विद्यालय की ओर से प्रकाशित पहली पत्रिका है
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मीना मंच में विद्यालय की अलग पहचान
बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए गठित मीना मंच एवं मीना मंच कक्ष जनपद ही नहीं प्रदेश में अपनी एक अलग पहचान रखता है जिसमें 600 से अधिक पुस्तकों से सुसज्जित पुस्तकालय है।
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अनेक बार सम्मानित हो चुके हैं मनोज
शिक्षक मनोज वार्ष्णेय को 2014 में जनपद का उत्कृष्ट शिक्षक चुना गया। 2015 में एससीईआरटी की ओर से उन्हें राज्यस्तरीय नवाचारी शिक्षक सम्मान दिया गया तो 2016 में राष्ट्रीय स्तर पर विज्ञान विषय में आपको मार्गदर्शक शिक्षक सम्मान प्राप्त हुआ।
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सरकारी विद्यालयों की देख रेख की जिम्मेदारी परिषद के अधीन होती है। प्रत्येक वर्ष पांच से आठ हजार रुपये तक रखरखाव के लिए अनुदान में दिए जाते हैं किंतु महंगाई के इस दौर में ये धनराशि ऊंट के मुंह मे जीरा साबित हो रही है। आवश्यक संसाधन न होने से ऐसे में अध्यापक मायूस हो जाते हैं। इन मायूसी के मध्य प्रकाश की किरण बन कर उभरा है वजीरगंज विकास क्षेत्र का पूर्व माध्यमिक विद्यालय गोठा। जहां के शिक्षक मनोज कुमार वार्ष्णेय ने सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से ऐसा विकास किया है जो प्रदेश के अन्य शिक्षकों के लिए प्रेरणा बन चुका है।
बच्चों के लिए व्हाइट बोर्ड से लेकर विद्यालय के प्रांगण में स्थित पौधे तक सामुदायिक सहभागिता की देन है। शिक्षक मनोज नियुक्ति वर्ष 2013 में हुई थी। शीघ्र ही उन्होंने ग्रामवासियों का दिल जीत लिया। जिस विद्यालय में कभी छात्र उपस्थिति 40-50 प्रतिशत रहती थी तो नामांकन 61 था वह वर्तमान में 138 हो गया है बच्चे प्राइवेट स्कूलों से नाम कटवाकर विद्यालय में दखिला करा रहे हैं वर्तमान माह में छात्र उपस्थिति 100 प्रतिशत चल रही है। मनोज कुमार ने सामुदायिक सहभगिता की शुरुआत विद्यालय में ईको क्लब के गठन के साथ की। इस क्लब के माध्यम से विद्यालय में प्रत्येक बच्चे के जन्मदिवस पर पौधरोपण एवं उसकी देखभाल की जिम्मेदारी उसी बच्चे को देकर भावनात्मक संबंध बनाया जा रहा है। आज गोठा के विद्यालय में कांवेंट जैसी सुविधाएं हैं। प्रोजेक्टर से लेकर अत्याधुनिक विज्ञान प्रयोगशाला, कम्प्यूटर लैब, स्मार्ट क्लास, जनरेटर, साउंड सिस्टम, इंवर्टर आदि हैं। मनोज कुमार वार्ष्णेय के अनुसार विद्यालय के प्रधानाध्यापक नेत्रपाल सिंह चौहान और शिक्षिका सुधा सिंह के सहयोग से ही वे विद्यालय को यहां तक ला सके हैं। विद्यालय समय के बाद मनोज कमजोर और प्रतिभाशाली छात्र छात्राओं को समय देते हैं। इसी तरह विद्यालय में सामुदायिक सहभागिता का पता इसी बात से लगाया जा सकता है कि बिना बाउंड्री वाल के विद्यालय में अनेक प्रकार के फूल खिलते हैं
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साहित्य के क्षेत्र में निकाली गोठा संकल्प पत्रिका
शिक्षक मनोज वार्ष्णेय ने विद्यालय की पत्रिका कोटा संकल्प प्रकाशित की जो बेसिक के इतिहास में किसी विद्यालय की ओर से प्रकाशित पहली पत्रिका है
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मीना मंच में विद्यालय की अलग पहचान
बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए गठित मीना मंच एवं मीना मंच कक्ष जनपद ही नहीं प्रदेश में अपनी एक अलग पहचान रखता है जिसमें 600 से अधिक पुस्तकों से सुसज्जित पुस्तकालय है।
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अनेक बार सम्मानित हो चुके हैं मनोज
शिक्षक मनोज वार्ष्णेय को 2014 में जनपद का उत्कृष्ट शिक्षक चुना गया। 2015 में एससीईआरटी की ओर से उन्हें राज्यस्तरीय नवाचारी शिक्षक सम्मान दिया गया तो 2016 में राष्ट्रीय स्तर पर विज्ञान विषय में आपको मार्गदर्शक शिक्षक सम्मान प्राप्त हुआ।