Budaun News: राजकीय मेडिकल कॉलेज से 11 जूनियर डॉक्टर निष्कासित, नर्सिंग के छात्रों को पीटने का आरोप
बदायूं में मारपीट के मामले में राजकीय मेडिकल कॉलेज के 11 जूनियर डॉक्टरों को निष्कासित कर दिया गया है। प्राचार्य ने यह कार्रवाई की है। वहीं नर्सिंग छात्रों के क्लास में जाने पर रोक लगा दी है।
विस्तार
बदायूं के राजकीय मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टर व नर्सिंग छात्रों के बीच वर्चस्व की लड़ाई में दोनों ही फंस गए हैं। छात्रों के साथ मारपीट करने वाले 11 जूनियर डॉक्टरों को अनिश्चितकालीन के लिए कॉलेज से निष्काष्ति कर दिया गया है। मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय टीम गठित की गई है। वहीं 16 नर्सिग छात्रों पर भी अनुशासनहीनता के चलते क्लास पर रोक लगा दी है।
सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के राजकीय मेडिकल कॉलेज के बीएससी नर्सिंग के छात्र व जूनियर डॉक्टरों के बीच रविवार को जमकर मारपीट हो गई। झगड़ा वर्चस्व को लेकर हुआ था। बताया गया कि एमबीबीएस की पढ़ाई कर डॉक्टर बने छात्रों का कहना था कि नर्सिंग करने के बाद तुमको हम लोगों के अधीन ही काम करने का मौका मिलेगा। यह बात उस समय हुई जब छात्र व जूनियर डॉक्टर लंच के समय एक जगह एकत्र हुए। दोनों ओर से टिप्पणी की गई। नर्सिंग के छात्र खुद को किसी डॉक्टर से कम नहीं बता रह थे तो जूनियर डॉक्टर खुद को सुपर बता रहे थे।
बेल्ट और बैट से छात्रों को पीटा था
नर्सिंग छात्रों व डॉक्टरों में कहासुनी हुई तो कॉलेज प्रशासन ने दोनों पक्षों को वहां से अपने-अपने कमरों में भेज दिया। दिन में करीब 11.50 बजे जूनियर डॉक्टर एकत्र हो गए और नर्सिंग के छात्रों के कमरे के नीचे पहुंचकर ईंट-पत्थर फेंकने लगे। नीचे मिले छात्रों को पीटकर घायल कर दिया। एक छात्र को जमीन पर गिराकर ईंट, बेल्ट और बैट से पीटने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।
इस घटना के बाद सिविल लाइंस पुलिस ने छात्र वीर प्रताप यादव की तहरीर पर डॉक्टर मेघान्शू सिंह, शिवांग मणि त्रिपाठी, अखिलेश यादव, तुसार, रवि गुप्ता, रितुराज सिंह, सविन्दल, अभिषेक गिरि, रवि सिंह व अज्ञात डॉक्टर्स के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। सोमवार को छह डॉक्टरों को गिरफ्तार कर उनका शांतिभंग में चालान किया गया।
सोमवार रात मेडिकल प्रशासन ने 11 जूनियर डॉक्टरों का अनिश्चितकाल के लिए निष्कासित कर दिया। वहीं झगड़े से जुड़े सभी 16 नर्सिंग छात्रों को क्लास से वंचित करने की कार्रवाई कर दी। हालांकि नर्सिंग छात्रों पर हुई कार्रवाई के बारे में अधिकारिक तौर पर जानकारी नहीं दी जा रही है।
अब न डॉक्टर डयूटी कर सकेंगे और न ही नर्सिंग के 16 छात्र क्लास में जाकर पढ़ाई कर सकेंगे। इस पूरे मामले की जांच के लिए मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर विपिन कुमार के नेतृत्व में टीम गठित की है। जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाने की बात राजकीय मेडिकल कॉलेज प्रशासन कह रहा है।
यह डॉक्टर करेंगे मामले की जांच
पांच सदस्यीय जांच कमेटी में डॉ विपिन कुमार, डॉ. श्रीनिवासन, डॉ मनीष, डॉ शिवम व डॉ. शुचिता यादव को जांच अधिकारी बनाया गया है। जांच रिपोर्ट प्राचार्य को तीन दिनों में देनी होगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही विभागीय कार्रवाई अमल लाई जाएगी।
प्राचार्य ने की कार्रवाई
कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर डॉ अरूण कुमार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए 11 एमबीबीएस के वह छात्र जो ट्रेनिंग कर रह थे उनको अनिश्चितकाल के लिए कॉलेज से निष्कासित कर दिया गया है। इसके अलावा पांच सदस्यीय टीम को पूरे मामले की जांच की जिम्मेदारी सौंपी है।