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यहां तो रोडवेज बसों के सामने खड़ी होती हैं डग्गमार बसें
Updated Wed, 20 Jun 2018 06:28 PM IST
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...यहां तो रोडवेज के सामने
खड़ी होती हैं डग्गमार बसें
दिल्ली तक होता है संचालन, डीएम और एसएसपी की सख्ती का नहीं दिखा असर
अमर उजाला ब्यूूरो
बदायूं। डीएम हो एसएसपी, डग्गामार वाहन चालकों को किसी का खौफ नहीं है। वजह यह कि एआरटीओ विभाग और संबंधित थाने, चौकियों से इन लोगों की साठगांठ रहती है। हालात यह हैं कि दिल्ली को जाने-आने वाली बसों का अड्डा रोडवेज की बगल में है। कई डग्गामार बसें सवारियों भरने को रोडवेज चौराहे पर सरकारी बसों के आगे खड़ी रहती हैं। खास बात यह कि घाटा होने के बावजूद इन डग्गामार बस वालों से रोडवेज के अधिकारी-कर्मचारी भी कुछ नहीं कहते।
पिछले महीने सड़क सुरक्षा सप्ताह के दौरान डग्गमार वाहनों पर लगाम लगाने की कोशिश की गई थी। तत्कालीन एआरटीओ अमिताभ राय ने लगातार चेकिंग अभियान भी चलाया था। डीएम दिनेश कुमार सिंह ने कई बार सड़क पर खड़े होकर सवारियां लटकाकर चलने वाले वाहनों को सीज कराया था। एसएसपी के निर्देश पर पुलिस ने सघन चेकिंग अभियान चलाया था। एसएसपी के निर्देश पर पुलिस ने रोडवेज चौराहे पर डग्गामार बसों को कई बार दौड़ाया। इससे कुछ दिन स्थिति में सुधार दिखा। मगर हालात दोबारा पहले से बदतर हो गए।
50 रुपये के लालच में जान जोखिम में डालते हैं लोग
रोडवेज के बराबर में प्राइवेट बस अड्डा है। यहां से कुछ डग्गामार बसों का संचालन होता है। इनमें एसी बसें भी शामिल हैं। ज्यादातर डग्गामार बसें दिल्ली के आनंद बिहार तक जाती हैं। इन बसों का किराया रोडवेज बसों से 50 रुपये कम है। 50 रुपये के लालच में ही लोग डग्गामार बसों में बैठकर जान जोखिम में डालकर दिल्ली तक का सफर तय करते हैं। इन डग्गामार बसों की संख्या रविवार की रात बढ़ जाती है।
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सवारियां लटकाकर चौकी, थाने के सामने से गुजरते हैं वाहन
जिले में डग्गामार वाहनों की संख्या बढ़ती जा रही है। शहर में डग्गामार वाहनों के कई अड्डे हैं। जहां से ऑटो, मैजिक आदि वाहनों में सवारियों को लटकाकर ले जाया जाता है। सवारियां लटके वाहन थाने, चौकी के सामने से गुजरते हैं, लेकिन पुलिस वाले कुछ नहीं कहते।
परमिट 60 का, दूरी तय कर रहे 300 किमी
शासनादेश के अनुसार यूपी सड़क परिवहन निगम से परमिट लकेर प्राइवेट बस वाले 60 किलोमीटर तक के दायरे में सवारियां ढो सकते हैं। मगर साठ-गांठ के चलते वाहन दिल्ली-लखनऊ तक चलाए जा रहे हैं।
बदायूं से रवाना होने वाली रोडवेज बसो की संख्या - 126
वर्जन ----
शहर में बढ़ रहे प्राइवेट तथा डग्गामार वाहनों की संख्या पर अंकुश लगाने के लिए एआरएम और पुलिस अधिकारियों के साथ में संयुक्त रूप से अभियान जल्द चलाया जाएगा। जिसके लिए कवायद शुरू कर दी गई है।
- सुहैल अहमद, एआरटीओ
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...यहां तो रोडवेज के सामने
खड़ी होती हैं डग्गमार बसें
दिल्ली तक होता है संचालन, डीएम और एसएसपी की सख्ती का नहीं दिखा असर
अमर उजाला ब्यूूरो
बदायूं। डीएम हो एसएसपी, डग्गामार वाहन चालकों को किसी का खौफ नहीं है। वजह यह कि एआरटीओ विभाग और संबंधित थाने, चौकियों से इन लोगों की साठगांठ रहती है। हालात यह हैं कि दिल्ली को जाने-आने वाली बसों का अड्डा रोडवेज की बगल में है। कई डग्गामार बसें सवारियों भरने को रोडवेज चौराहे पर सरकारी बसों के आगे खड़ी रहती हैं। खास बात यह कि घाटा होने के बावजूद इन डग्गामार बस वालों से रोडवेज के अधिकारी-कर्मचारी भी कुछ नहीं कहते।
पिछले महीने सड़क सुरक्षा सप्ताह के दौरान डग्गमार वाहनों पर लगाम लगाने की कोशिश की गई थी। तत्कालीन एआरटीओ अमिताभ राय ने लगातार चेकिंग अभियान भी चलाया था। डीएम दिनेश कुमार सिंह ने कई बार सड़क पर खड़े होकर सवारियां लटकाकर चलने वाले वाहनों को सीज कराया था। एसएसपी के निर्देश पर पुलिस ने सघन चेकिंग अभियान चलाया था। एसएसपी के निर्देश पर पुलिस ने रोडवेज चौराहे पर डग्गामार बसों को कई बार दौड़ाया। इससे कुछ दिन स्थिति में सुधार दिखा। मगर हालात दोबारा पहले से बदतर हो गए।
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50 रुपये के लालच में जान जोखिम में डालते हैं लोग
रोडवेज के बराबर में प्राइवेट बस अड्डा है। यहां से कुछ डग्गामार बसों का संचालन होता है। इनमें एसी बसें भी शामिल हैं। ज्यादातर डग्गामार बसें दिल्ली के आनंद बिहार तक जाती हैं। इन बसों का किराया रोडवेज बसों से 50 रुपये कम है। 50 रुपये के लालच में ही लोग डग्गामार बसों में बैठकर जान जोखिम में डालकर दिल्ली तक का सफर तय करते हैं। इन डग्गामार बसों की संख्या रविवार की रात बढ़ जाती है।
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सवारियां लटकाकर चौकी, थाने के सामने से गुजरते हैं वाहन
जिले में डग्गामार वाहनों की संख्या बढ़ती जा रही है। शहर में डग्गामार वाहनों के कई अड्डे हैं। जहां से ऑटो, मैजिक आदि वाहनों में सवारियों को लटकाकर ले जाया जाता है। सवारियां लटके वाहन थाने, चौकी के सामने से गुजरते हैं, लेकिन पुलिस वाले कुछ नहीं कहते।
परमिट 60 का, दूरी तय कर रहे 300 किमी
शासनादेश के अनुसार यूपी सड़क परिवहन निगम से परमिट लकेर प्राइवेट बस वाले 60 किलोमीटर तक के दायरे में सवारियां ढो सकते हैं। मगर साठ-गांठ के चलते वाहन दिल्ली-लखनऊ तक चलाए जा रहे हैं।
बदायूं से रवाना होने वाली रोडवेज बसो की संख्या - 126
वर्जन ----
शहर में बढ़ रहे प्राइवेट तथा डग्गामार वाहनों की संख्या पर अंकुश लगाने के लिए एआरएम और पुलिस अधिकारियों के साथ में संयुक्त रूप से अभियान जल्द चलाया जाएगा। जिसके लिए कवायद शुरू कर दी गई है।
- सुहैल अहमद, एआरटीओ