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Bijnor News: साहनपुर किले में हुई शस्त्रों की पूजा
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नजीबाबाद। साहनपुर किले में शस्त्र पूजन के साथ दशहरा मनाने की परंपरा चली आ रही है। पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह ने अपनी माता अंजलि देवी, पत्नी भावना सिंह और पुत्री सारिका और सादिका के साथ साहनपुर किले में शस्त्र पूजन का भव्य समारोह आयोजित किया। पंडित पंकज शर्मा ने पूजन कराया।
परिजनों ने क्षेत्रवासियों को विजयदशमी की मिष्ठान के साथ पर्व की शुभकामनाएं दीं। आयोजन में डॉ.कौशल, वेद प्रकाश शर्मा, डॉ.तेजपाल वर्मा, राजकुमार प्रजापति, झालू के लोकेंद्र सिंह, ओमपाल एड., अजीम अहमद, जितेंद्र, गौतम, डॉ.भूपेंद्र तोमर, अरविंद ढाका सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे। साहनपुर किले के बाद पूर्व सांसद ने काली मंदिर, मोटा महादेव मंदिर, रानी सती मंदिर जाकर पंडित शशिनाथ की देखरेख में पूजन किया।
साहनपुर रियासत से जुड़े थे 1800 गांव
साहनपुर रियासत से जमींदारी प्रथा के रूप में करीब 1800 गांव जुड़े थे। लगान कर के रूप में साहनपुर रियासत की गद्दी पर बैठे मुखिया को नजराना भेंट किया जाता था। जमींदारी व्यवस्था बदलने के बावजूद दशहरा पर्व मनाने की परंपरा नहीं बदली। पारंपरिक विजयदशमी बनाने की जिम्मेदारी वर्तमान में पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह ने अपने कंधों पर ली। राजा चरत सिंह से विरासत में मिले शस्त्र पूजन और दशहरा पर्व मनाने का दायित्व पूर्व राज्यमंत्री भारतेंद्र सिंह के पिता राजा देवेंद्र सिंह पर आई थी।
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परिजनों ने क्षेत्रवासियों को विजयदशमी की मिष्ठान के साथ पर्व की शुभकामनाएं दीं। आयोजन में डॉ.कौशल, वेद प्रकाश शर्मा, डॉ.तेजपाल वर्मा, राजकुमार प्रजापति, झालू के लोकेंद्र सिंह, ओमपाल एड., अजीम अहमद, जितेंद्र, गौतम, डॉ.भूपेंद्र तोमर, अरविंद ढाका सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे। साहनपुर किले के बाद पूर्व सांसद ने काली मंदिर, मोटा महादेव मंदिर, रानी सती मंदिर जाकर पंडित शशिनाथ की देखरेख में पूजन किया।
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साहनपुर रियासत से जुड़े थे 1800 गांव
साहनपुर रियासत से जमींदारी प्रथा के रूप में करीब 1800 गांव जुड़े थे। लगान कर के रूप में साहनपुर रियासत की गद्दी पर बैठे मुखिया को नजराना भेंट किया जाता था। जमींदारी व्यवस्था बदलने के बावजूद दशहरा पर्व मनाने की परंपरा नहीं बदली। पारंपरिक विजयदशमी बनाने की जिम्मेदारी वर्तमान में पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह ने अपने कंधों पर ली। राजा चरत सिंह से विरासत में मिले शस्त्र पूजन और दशहरा पर्व मनाने का दायित्व पूर्व राज्यमंत्री भारतेंद्र सिंह के पिता राजा देवेंद्र सिंह पर आई थी।
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