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जिले में वर्ल्ड बैंक की टीम ने ओडीेेएफ की हकीकत जानी
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Fri, 22 Jul 2016 12:53 AM IST
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बिजनौर में आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते सीडीओ।
- फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर में वर्ल्ड बैंक की टीम ने जिले में ओडीएफ की हकीकत जानने के गांव धर्मपुरा में बने शौचालयों का निरीक्षण किया। टीम ने कहा कि कहा अब कम जगह में कम पानी की आवश्यकता वाले शौचालय बनेंगे। इस सिस्टम में मल को खाद में आसानी से बदला जा सकेगा।
सीडीओ इंद्रमणि त्रिपाठी के मुताबिक जिले में 1128 ग्राम पंचायत हैं। 195 ग्राम ओडीएफ हो गई हैं। गणतंत्र दिवस तक जिले को शत-प्रतिशत ओडीएफ घोषित करने का लक्ष्य है। बृहस्पतिवार को विश्व बैंक के प्रतिनिधि तथा वाटर एवं सैनिटेशन कार्यक्रम के विशेषज्ञ अरुण कुमार डभाल व वकील अहमद ने ओडीएफ गांव धर्मपुरा जाकर घरों में बने शौचालयों को देखा। जिला पंचायतराज अधिकारी अर्थात डीपीआरओ मनीष कुमार के अनुसार नई तकनीक से बनने वाले शौचालयों का एक दिवसीय प्रशिक्षण बिजनौर के एक बैंक्वटहाल में ब्लॉककर्मियों व प्रधानों को दिया गया है। कम लागत में बनने वाले इन शौचालयों की सफाई कम पानी में होगी। इसमें मात्र एक से डेढ़ लीटर पानी की जरूरत पड़ेगी। विश्व बैंक के प्रतिनिधियों ने जिले में ओडीएफ में हुए काम को सराहा। कहा इस अभियान के बाद लोगों में क्रांतिकारी वैचारिक परिवर्तन आया है। ग्रामीणों से बातचीत से महिलाओं में बदलाव आने की बात सामने आई है। अब लोगों को नई तकनीक से शौचालय बनवाने के लिए प्रेरित करने की जरूरत है।
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सीडीओ इंद्रमणि त्रिपाठी के मुताबिक जिले में 1128 ग्राम पंचायत हैं। 195 ग्राम ओडीएफ हो गई हैं। गणतंत्र दिवस तक जिले को शत-प्रतिशत ओडीएफ घोषित करने का लक्ष्य है। बृहस्पतिवार को विश्व बैंक के प्रतिनिधि तथा वाटर एवं सैनिटेशन कार्यक्रम के विशेषज्ञ अरुण कुमार डभाल व वकील अहमद ने ओडीएफ गांव धर्मपुरा जाकर घरों में बने शौचालयों को देखा। जिला पंचायतराज अधिकारी अर्थात डीपीआरओ मनीष कुमार के अनुसार नई तकनीक से बनने वाले शौचालयों का एक दिवसीय प्रशिक्षण बिजनौर के एक बैंक्वटहाल में ब्लॉककर्मियों व प्रधानों को दिया गया है। कम लागत में बनने वाले इन शौचालयों की सफाई कम पानी में होगी। इसमें मात्र एक से डेढ़ लीटर पानी की जरूरत पड़ेगी। विश्व बैंक के प्रतिनिधियों ने जिले में ओडीएफ में हुए काम को सराहा। कहा इस अभियान के बाद लोगों में क्रांतिकारी वैचारिक परिवर्तन आया है। ग्रामीणों से बातचीत से महिलाओं में बदलाव आने की बात सामने आई है। अब लोगों को नई तकनीक से शौचालय बनवाने के लिए प्रेरित करने की जरूरत है।
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