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विश्व अस्थमा दिवस : घबराएं नहीं, आसानी से ठीक होता है अस्थमा

Tue, 04 May 2021 11:58 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 04 May 2021 11:58 PM IST
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World Asthma Day: Do not panic, asthma is easily cured
विश्व अस्थमा दिवस : घबराएं नहीं, आसानी से ठीक होता है अस्थमा
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बिजनौर। अस्थमा का आसानी से इलाज किया जा सकता है। इसमें घबराने वाली कोई बात नहीं है। पिछले 60 वर्षों में आई मेडिकल क्रांति ने लाखों लोगों को स्वतंत्र रूप से और आसानी से सांस लेने के काबिल बनाया है। इन सालों में अस्थमा मरीजों के दिमाग में उठने वाली नकारात्मक भावनाओं से लेकर उनके दिमाग में उस बीमारी के रूप में अपनी छवि बनाने में सफल हुआ है। जिसका आसानी से इलाज किया जा सकता है। अगर दर्ज किए गए इतिहास की शुरुआत से देखा जाए तो सांस लेने में होने वाली तकलीफ से सभी लोग परिचित थे। इस बीमारी की जांच चिंताजनक विषय है, क्योंकि खांसी और सांस न आने के लक्षणों को अकसर टीबी से जोड़ दिया जाता था, जो बिल्कुल गलत है।
भवगती हॉस्पिटल के सीनियर चेस्ट फिजीशियन डॉ. अनिल कुमार अग्रवाल के अनुसार आज इनहेलेशन थेरेपी अस्थमा के इलाज का मुख्य आधार है। सांस लेने वाली दवाएं अस्थमा जैसी सांस की बीमारियों के इलाज या उनका प्रबंधन करने का अभिन्न अंग हैं। इससे सीधे फेफड़ों में दवाएं पहुंचती हैं। इसलिए काफी तेजी से और बहुत कम डोज पर काम करती है, जिससे साइड का डर कम हो जाता है। सांस लेने के माध्यम से ली जाने वाली दवाआें से रोग की स्थिति सुधारने, लक्षणों को नियंत्रित करने, सांस लेने की गति तेज होने पर उसे कम करने और जीवन की गुणवत्ता को सुधारने में मदद मिलती है।
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उन्होंने बताया कि फेफड़ों तक दवाइयों को पहुंचाने वाले उपकरण दवाइयों जितने ही महत्वपूर्ण होते हैं। इस समय बाजार में मौजूद इनहेलर डिवाइसेज में दबावयुक्त मीटर्ड डोज इनहेलर्स (एमडीआई), ड्राई पाउडर इनहेलर्स (डीपीआई) और नेब्युलाइजर्स शामिल हैं। भारत में लगभग 90 फीसदी चिकित्सकों ने क्लीनिक में पहली बार आने वाले अस्थमा के कम से कम 40 फीसदी मरीजों को इनहेलर डिवाइस का प्रयोग करने की सलाह दी है। इसलिए अस्थमा रोगियों को इनहेलर से परहेज नहीं करना चाहिए।
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