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श्रमिक हो रहे जागरूक, योजनाओं का ले रहे लाभ
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श्रमिक हो रहे जागरूक, योजनाओं का ले रहे लाभ
बिजनौर। जिले में मातृत्व, शिशु एवं बालिका मदद योजना को लेकर लोग जागरूक हो रहे हैं। दो सालों में 5898 श्रमिकों को इसका लाभ मिला है। हालांकि आवेदन करीब साढ़े छह हजार लोगों ने किया था, लेकिन अधिकतर फार्मों में गलती होने की वजह से निरस्त कर दिया गया है।
श्रम विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक पंजीकृत श्रमिक ही इस योजना का लाभ ले सकता है। यह लाभ शुरू के दो बच्चे होने पर सरकार की तरफ से दिया जाएगा। मातृत्व, शिशु एवं बालिका मदद योजना के तहत पुत्री होने पर श्रमिक को 25 हजार रुपये और पुत्र होने पर 20 हजार रुपये दिए जाएंगे। सत्र 2019-2020 में इस योजना के तहत 936 लोगों को लाभ मिला है। इसके साथ ही सत्र 2020-2021 में 4962 श्रमिकों को इसका लाभ मिला है। अगर कानूनी रूप से बालिका गोद ली गई है तो भी श्रमिक को इस योजना के तहत 25 हजार रुपये का लाभ मिलेगा। सहायक श्रम आयुक्त उमेश कुमार ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य बच्चे और मां को कुपोषण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से निजात दिलाना है। जिले में मातृत्व, शिशु एवं बालिका मदद योजना करीब साढ़े छह हजार लोगों ने आवेदन किया था। मगर फार्मों में गलती या आवेदन समय निकलने की वजह से उन कुछ आवेदन को निरस्त कर दिए गए। शिशु होने के एक साल तक इस योजना के तहत श्रमिक आवेदन कर सकता है। इसके बाद आवेदन नहीं किया जा सकता है।
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बिजनौर। जिले में मातृत्व, शिशु एवं बालिका मदद योजना को लेकर लोग जागरूक हो रहे हैं। दो सालों में 5898 श्रमिकों को इसका लाभ मिला है। हालांकि आवेदन करीब साढ़े छह हजार लोगों ने किया था, लेकिन अधिकतर फार्मों में गलती होने की वजह से निरस्त कर दिया गया है।
श्रम विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक पंजीकृत श्रमिक ही इस योजना का लाभ ले सकता है। यह लाभ शुरू के दो बच्चे होने पर सरकार की तरफ से दिया जाएगा। मातृत्व, शिशु एवं बालिका मदद योजना के तहत पुत्री होने पर श्रमिक को 25 हजार रुपये और पुत्र होने पर 20 हजार रुपये दिए जाएंगे। सत्र 2019-2020 में इस योजना के तहत 936 लोगों को लाभ मिला है। इसके साथ ही सत्र 2020-2021 में 4962 श्रमिकों को इसका लाभ मिला है। अगर कानूनी रूप से बालिका गोद ली गई है तो भी श्रमिक को इस योजना के तहत 25 हजार रुपये का लाभ मिलेगा। सहायक श्रम आयुक्त उमेश कुमार ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य बच्चे और मां को कुपोषण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से निजात दिलाना है। जिले में मातृत्व, शिशु एवं बालिका मदद योजना करीब साढ़े छह हजार लोगों ने आवेदन किया था। मगर फार्मों में गलती या आवेदन समय निकलने की वजह से उन कुछ आवेदन को निरस्त कर दिए गए। शिशु होने के एक साल तक इस योजना के तहत श्रमिक आवेदन कर सकता है। इसके बाद आवेदन नहीं किया जा सकता है।
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