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घोटालों में फंसी फर्म से लिया जा रहा काम

Thu, 30 Jun 2022 12:18 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 30 Jun 2022 12:18 AM IST
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Work being taken from a firm caught in scams
घोटालों में फंसी फर्म से लिया जा रहा काम
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बिजनौर। स्वास्थ्य विभाग में घोटालों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। कहने को तो स्वास्थ्य विभाग के एनएचएम से तमाम तरह की योजनाएं चलाई जा रही हैं। लेकिन स्वास्थ्य विभाग को भी कार्रवाई के उपचार की जरूरत हैं। बीते सालों में स्वास्थ्य विभाग में कई घोटाले हुए हैं। इन घोटालों में कर्मचारी से लेकर अधिकारी तक का नाम जुड़ा। अधिकारी आए, जांच की और घोटाला उजागर हुआ, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने घोटाला करने वाली फर्म के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।
कई सालों से घोटालों में फंसी फर्म ही अभी भी स्वास्थ्य विभाग में काम कर रही हैं। इसके साथ ही अब एनएचएम में हुई गड़बड़ी की जांच करने के लिए लखनऊ से दोबारा टीम आने की उम्मीद है। जुलाई के पहले सप्ताह में टीम बिजनौर दोबारा जांच करने आ सकती है। स्वास्थ्य विभाग के घोटालों के सिलसिले में एक व्यक्ति ने स्वास्थ्य विभाग में काम करने वाली फर्म के मालिक पर फर्जी आयकर नंबर/जीएसटी नंबर पर भुगतान करने का आरोप लगाया था। उस व्यक्ति ने एक फर्म पर स्वास्थ्य विभाग बिजनौर में फर्जी आयकर और जीएसटी नंबर की बिल बुक पर करोड़ का भुगतान करने का आरोप लगा था। जिस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। साल 2016 में भी एनएचएम में तीन करोड़ 10 लाख 95 हजार 769 रुपये का घोटाला हुआ था। घोटाले में एनएचएम के लिपिक और डीपीएम कार्यालय के लेखा प्रबंधक को दोषी मानते हुए जेल भेज दिया गया, जो अब जमानत पर बाहर आ चुके हैं। यह भुगतान चार फर्जी फर्म के नाम पर कर दिया गया था। इसके बाद यह मामला सीबीआई देहरादून को सौंप दिया गया था।
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दो साल पहले पकड़ी गई भारी अनियमितताएं
घोटालों का सिलसिला यहीं नहीं रुका, इसके बाद साल 2020 में भी एनएचएम में करीब सवा दो करोड़ का घोटाला सामने आया। यह घोटाला स्वयं मिशन निदेशक, एनएचएम स्तर से पकड़ा गया था। फर्जी जीएसटी वाले बिल पर ऑडिटर की टिप्पणी के बावजूद सीएमओ कार्यालय, सीएचसी, पीएचसी स्तर से दो करोड़ 24 लाख 40 हजार 520 रुपये का भुगतान कर दिया गया। इसके साथ ही लाखों की अन्य वित्तीय अनियमितताएं भी पकड़ में आई थीं। इसके बाद डीएम के आदेश पर एक जांच कमेटी गठित की गई थी। लेकिन फर्म, अधिकारी और कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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रोक हटाई और कर दिया भुगतान
इन घोटोलों के बाद शासन की ओर से एक पत्र आया, जिसमें स्वास्थ्य विभाग को फर्मों का भुगतान न करने का निर्देश दिया गया था। जिसके बाद तत्काल सीएमओ ने सभी सीएचसी और पीएचसी को फर्म का भुगतान न करने का पत्र भेज दिया था। लेकिन इसके कुछ दिनों बाद ही सीएमओ ने सभी सीएचसी और पीएचसी को एक और पत्र जारी किया। जिसमें सीएचसी और पीएचसी प्रभारियों को निर्देश दिया गया कि अग्रिम आदेश आने तक पुराना पत्र स्थगित कर भुगतान कर दिया जाए। जिसके बाद सीएचसी और पीएचसी ने सभी फर्मों का भुगतान कर दिया। इसके बाद अब 2022 में एनएचएम में फिर गड़बड़ी समाने आईं। जिसकी जांच लखनऊ से आई दो सदस्य टीम ने की। जांच में अभी तक स्वास्थ्य विभाग में काम कर रही फर्मों द्वारा एक करोड़ की जीएसटी चोरी का मामला साफ हो पाया है। हालांकि जांच अधिकारियों द्वारा लखनऊ में मामले की जांच की जा रही है। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग ने बिना जीपीएस लगाए और लॉक बुक तैयार किए ही गाड़ियों का भुगतान कर दिया। जिसके चलते करीब पांच सालों में पांच करोड़ से ज्यादा का भुगतान इन गाड़ियों के नाम पर किया जा चुका है। इसके बाद के दोबारा जुलाई के पहले सप्ताह में जांच टीम के बिजनौर आने की उम्मीद है।

मेरे समय में कोई गड़बड़ी नहीं हुई : सीएमओ
सीएमओ डॉ. विजय कुमार गोयल का कहना है कि मेरे स्तर से कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। जांच अधिकारी की ओर से जो मांगे गए, उससे संबंधित कागज उपलब्ध करा दिए गए हैं।
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