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बिजनौर: दूसरे राज्यों से आई महिला कामगारों को रोजगार मिलना शुरू, स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी पांच सौ से ज्यादा महिलाएं
Mon, 11 May 2020 10:36 PM IST
मेरठ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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Published by: मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 11 May 2020 10:36 PM IST
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- फोटो : PTI
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लाॅकडाउन के दौरान दूसरे राज्यों से आई महिला कामगारों को राष्ट्रीय आजीविका मिशन ने रोजगार देना शुरू कर दिया है। ग्यारह ब्लॉक में पांच सौ से अधिक महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर काम मिला है।
जिले में लाॅकडाउन के बाद 13548 महिला व पुरुष कामगार महाराष्ट्र, उत्तराखंड, दिल्ली, पंजाब ,राजस्थान तथा हरियाणा राज्य से आए हैं। इनके मनरेगा में जिले में 1603 परिवारों के नौ मई तक जॉब कार्ड बने हैं।
389 मनरेगा कार्यस्थल पर काम शुरू हुआ है। इनमें बाहरी श्रमिकों समेत 15945 कामगारों को काम मिला है। राष्ट्रीय आजीविका मिशन ने महिला श्रमिक को स्वयं सहायता समूह से जोड़कर ग्राम स्तर के लघु उद्योग शुरू करने को प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया है।
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मिशन के जिला उपायुक्त ज्ञान सिंह ने बताया कि प्रथम चरण में 1500 महिलाओं को समूहों से जोड़ने का लक्ष्य है। जिले के 11 ब्लाक में पांच सौ से अधिक महिलाएं जुड़ गई हैं। नजीबाबाद ब्लॉक में सबसे अधिक 55 महिलाएं समूह से जुड़ी हैं।
समूहों को काम शुरू करने को पंद्रह हजार रिवाल्विंग फंड मिलता है। जो महिलाएं कामगार क्वारंटीन सेंटरों पर हैं, उनकी स्वीकृति मंगाकर समूहों में शामिल किया जा रहा है। गांवों में पशुपालन तथा सिलाई कढ़ाई के व्यवसाय समूह अधिक हैं।
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जिले में लाॅकडाउन के बाद 13548 महिला व पुरुष कामगार महाराष्ट्र, उत्तराखंड, दिल्ली, पंजाब ,राजस्थान तथा हरियाणा राज्य से आए हैं। इनके मनरेगा में जिले में 1603 परिवारों के नौ मई तक जॉब कार्ड बने हैं।
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389 मनरेगा कार्यस्थल पर काम शुरू हुआ है। इनमें बाहरी श्रमिकों समेत 15945 कामगारों को काम मिला है। राष्ट्रीय आजीविका मिशन ने महिला श्रमिक को स्वयं सहायता समूह से जोड़कर ग्राम स्तर के लघु उद्योग शुरू करने को प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया है।
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मिशन के जिला उपायुक्त ज्ञान सिंह ने बताया कि प्रथम चरण में 1500 महिलाओं को समूहों से जोड़ने का लक्ष्य है। जिले के 11 ब्लाक में पांच सौ से अधिक महिलाएं जुड़ गई हैं। नजीबाबाद ब्लॉक में सबसे अधिक 55 महिलाएं समूह से जुड़ी हैं।
समूहों को काम शुरू करने को पंद्रह हजार रिवाल्विंग फंड मिलता है। जो महिलाएं कामगार क्वारंटीन सेंटरों पर हैं, उनकी स्वीकृति मंगाकर समूहों में शामिल किया जा रहा है। गांवों में पशुपालन तथा सिलाई कढ़ाई के व्यवसाय समूह अधिक हैं।