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महिलाएं तैयार करेंगी गन्ने की रोगमुक्त पौध
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बिजनौर में बरकातपुर चीनी मिल में गन्ने की पौध तैयार करती महिलाएं।
- फोटो : BIJNOR
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महिलाएं तैयार करेंगी गन्ने की रोगमुक्त पौध
बिजनौर। किसानों के खेतों में रोगमुक्त गन्ने की खेती कराने की कमान अब स्वयं सहायता समूहों को दी जाएगी। मिशन शक्ति अभियान के तहत स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं गन्ने की पौध तैयार करेंगी। इस तरह तैयार गन्ने की रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होगी। यानि किसान को स्वस्थ बीज मिलेगा और महिलाओं की आमदनी भी होगी। इस अभियान में जिले में 180 स्वयं सहायता समूह खोले जाएंगे।
स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को रोजगार के लिए बहुत काम किया जा रहा है। खेती से भी महिलाओं को जोड़ने की योजना है। गन्ना जिले की प्रमुख फसल है। गन्ने में कई तरह के रोग खासतौर रेड रॉट का असर देखने को मिल रहा है। किसानों को रोगमुक्त गन्ने के खेत तैयार करने को प्रेरित किया जा रहा है। ऐसा सिंगल बड विधि से गन्ना बोकर किया जा सकता है। इसमें गन्ने की पोरी पर स्थित उसकी आंख को काटकर पोट्रे में बोया जाता है। इससे पौधा अंकुरित होने के बाद उसे खेत में बो दिया जाता है। इस तरह की पौध से तैयार गन्ने की रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है।
खेती में उलझे किसान अपने घर में पौध तैयार नहीं कर सकते हैं। इस काम को अब स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को देने की तैयारी है। महिलाएं अपने घर में भी ये काम कर सकती हैं। इसके लिए ज्यादा जमीन की जरूरत नहीं होती है। नौ गन्ना समितियों में हर समिति पर 20-20 स्वयं सहायता समूहों को इसके लिए तैयार किया जाएगा। 68 स्वयं सहायता समूल पहले से ही काम कर रहे हैं।
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ऐसे होगा है पौधे पर काम
महिलाओं को गन्ना विभाग द्वारा गन्ना नर्सरी से बेचा जाएगा। महिलाएं गन्ने की आंख को कोकोपीट में पोट्रे में दबाकर पौध तैयार करेंगी। एक पौधे को किसान को डेढ़ रुपये में बेचा जाएगा। डेढ़ रुपये की सब्सिडी गन्ना विभाग द्वारा महिलाओं को दी जाएगी। यानि एक पौध तीन रुपये की बिकेगी। गन्ने की आंख निकालकर गन्ने का जो भाग बिकेगा उसे भी बेचा जाएगा। एक गन्ने से कम से कम 20 आंख निकलेंगी।
महिलाओं को मिलेगा रोजगार
बरकातपुर चीनी मिल के गन्ना महाप्रबंधक विश्वासराज सिंह के अनुसार सिंगल बड से गन्ने की पौध तैयार कराई जा रही हैं। इससे महिलाओं को भी रोजगार मिला है।
महिलाओं, किसानों दोनों को होगा फायदा
जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह के अनुसार स्वयं सहायता समूहों को काम दिया जा रहा है। इस अभियान से महिलाओं व किसानों दोनों को फायदा होगा।
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बिजनौर। किसानों के खेतों में रोगमुक्त गन्ने की खेती कराने की कमान अब स्वयं सहायता समूहों को दी जाएगी। मिशन शक्ति अभियान के तहत स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं गन्ने की पौध तैयार करेंगी। इस तरह तैयार गन्ने की रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होगी। यानि किसान को स्वस्थ बीज मिलेगा और महिलाओं की आमदनी भी होगी। इस अभियान में जिले में 180 स्वयं सहायता समूह खोले जाएंगे।
स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को रोजगार के लिए बहुत काम किया जा रहा है। खेती से भी महिलाओं को जोड़ने की योजना है। गन्ना जिले की प्रमुख फसल है। गन्ने में कई तरह के रोग खासतौर रेड रॉट का असर देखने को मिल रहा है। किसानों को रोगमुक्त गन्ने के खेत तैयार करने को प्रेरित किया जा रहा है। ऐसा सिंगल बड विधि से गन्ना बोकर किया जा सकता है। इसमें गन्ने की पोरी पर स्थित उसकी आंख को काटकर पोट्रे में बोया जाता है। इससे पौधा अंकुरित होने के बाद उसे खेत में बो दिया जाता है। इस तरह की पौध से तैयार गन्ने की रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है।
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खेती में उलझे किसान अपने घर में पौध तैयार नहीं कर सकते हैं। इस काम को अब स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को देने की तैयारी है। महिलाएं अपने घर में भी ये काम कर सकती हैं। इसके लिए ज्यादा जमीन की जरूरत नहीं होती है। नौ गन्ना समितियों में हर समिति पर 20-20 स्वयं सहायता समूहों को इसके लिए तैयार किया जाएगा। 68 स्वयं सहायता समूल पहले से ही काम कर रहे हैं।
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ऐसे होगा है पौधे पर काम
महिलाओं को गन्ना विभाग द्वारा गन्ना नर्सरी से बेचा जाएगा। महिलाएं गन्ने की आंख को कोकोपीट में पोट्रे में दबाकर पौध तैयार करेंगी। एक पौधे को किसान को डेढ़ रुपये में बेचा जाएगा। डेढ़ रुपये की सब्सिडी गन्ना विभाग द्वारा महिलाओं को दी जाएगी। यानि एक पौध तीन रुपये की बिकेगी। गन्ने की आंख निकालकर गन्ने का जो भाग बिकेगा उसे भी बेचा जाएगा। एक गन्ने से कम से कम 20 आंख निकलेंगी।
महिलाओं को मिलेगा रोजगार
बरकातपुर चीनी मिल के गन्ना महाप्रबंधक विश्वासराज सिंह के अनुसार सिंगल बड से गन्ने की पौध तैयार कराई जा रही हैं। इससे महिलाओं को भी रोजगार मिला है।
महिलाओं, किसानों दोनों को होगा फायदा
जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह के अनुसार स्वयं सहायता समूहों को काम दिया जा रहा है। इस अभियान से महिलाओं व किसानों दोनों को फायदा होगा।

बिजनौर में बरकातपुर चीनी मिल में गन्ने की पौध तैयार करती महिलाएं।- फोटो : BIJNOR