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खुद आत्मनिर्भर बन हजारों महिलाओं को स्वावलंबी
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जिनौर के गांव नैनसी वाला में गन्ने की पौध तैयार करती महिला स्वाति रानी(फाइल फोटो)।
- फोटो : BIJNOR
समूह की राह पकड़ स्वावलंबी बनीं महिलाएं
बिजनौर। लगन और मेहनत से काम किया जाए तो सफलता निश्चित ही मिलेगी। कुछ ऐसा ही जनपद की सैकड़ों महिलाओं ने कर दिखाया है। इन महिलाओं ने गन्ने की पौध तैयार कर दो करोड़ रुपये से अधिक कमा लिए। महिलाएं खुद ही आत्मनिर्भर नहीं, बल्कि दूसरी महिलाओं के लिए भी रोजगार के दरवाजे खोल दिए।
गन्ना विभाग की ओर से जनपद में 195 महिला समूह का गठन किया। एक समूह में 20 से 30 महिलाओं को शामिल किया गया, जिसका मकसद था, गरीब महिलाओं को रोजगार मिल सके। गन्ना विभाग ने इन महिलाओं को बाकायदा प्रशिक्षण दिया, जिससे गन्ने की पौध तैयार की जा सके। गन्ना विभाग की मंशा पर महिलाएं खरी उतरीं। महिलाओं ने मेहनत और लगने से काम करते हुए एक करोड़ पौध तैयार कर डाली। इन पौध को गन्ना विभाग के जरिये किसानों को बेचा गया।
पछेती बुवाई में ज्यादा रही मांग
महिलाओं ने सिंगल बड से पौध तैयार की जो 25 दिन पहले ही तैयार कर लिया जाता है। ऐसे में किसान गेहूं की कटाई कर गन्ने की पछेती बुवाई में सिंगल बड से तैयार पौध का इस्तेेमाल करता है, जिसके चलते रही ज्यादा मांग।
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प्रदेश में बनाया दूसरा स्थान
धामपुर के गांव नैंसीवाला की रानी लक्ष्मी बाई समूह की अध्यक्ष स्वाति रानी ने बताया कि उन्होंने अपनी टीम के साथ इस साल साढ़े तीन लाख पौधे तैयार किए हैं। पौध किसानों को बेची। एक पौध पर एक रुपया तीस पैसे गन्ना विभाग से अनुदान मिला और एक रुपया तीस पैसे किसानों से मूल्य मिला। बेहतर काम करने पर गन्ना आयुक्त तरफ से घोषित परिणाम में दूसरा स्थान पाया।
घर का खर्च चलाना हुआ आसान
अफजलगढ़ के गांव कल्लूवाला के जागृति महिला समूह की अध्यक्ष सत्तो देवी ने बताया कि उन्होंने टीम के साथ करीब इस बार तीन लाख 36 हजार पौध तैयार की। समूह में 14 महिलाएं रोजगार पा रही हैं। जिससे घर का खर्च चलाना आसान हुआ है। घर के आंगन में ही पौध तैयार करती हैं।
जिले में 195 महिला समूह हैं, जिन्होंने गन्ने की सिंगल बड विधि से पौध तैयार कर किसानों को मुहैया कराई। करीब 1100 किसानों ने पौध खरीदी है, जिस पर समूह की महिलाओं से एक करोड़ से अधिक अनुदान दिया गया है। करीब इतना ही मूल्य किसानों से समूहों को मिला है। जिले के दो समूहों ने बेहतर प्रदर्शन कर प्रदेश में दूसरा स्थान बनाया है।
- यशपाल सिंह, जिला गन्ना अधिकारी
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बिजनौर। लगन और मेहनत से काम किया जाए तो सफलता निश्चित ही मिलेगी। कुछ ऐसा ही जनपद की सैकड़ों महिलाओं ने कर दिखाया है। इन महिलाओं ने गन्ने की पौध तैयार कर दो करोड़ रुपये से अधिक कमा लिए। महिलाएं खुद ही आत्मनिर्भर नहीं, बल्कि दूसरी महिलाओं के लिए भी रोजगार के दरवाजे खोल दिए।
गन्ना विभाग की ओर से जनपद में 195 महिला समूह का गठन किया। एक समूह में 20 से 30 महिलाओं को शामिल किया गया, जिसका मकसद था, गरीब महिलाओं को रोजगार मिल सके। गन्ना विभाग ने इन महिलाओं को बाकायदा प्रशिक्षण दिया, जिससे गन्ने की पौध तैयार की जा सके। गन्ना विभाग की मंशा पर महिलाएं खरी उतरीं। महिलाओं ने मेहनत और लगने से काम करते हुए एक करोड़ पौध तैयार कर डाली। इन पौध को गन्ना विभाग के जरिये किसानों को बेचा गया।
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पछेती बुवाई में ज्यादा रही मांग
महिलाओं ने सिंगल बड से पौध तैयार की जो 25 दिन पहले ही तैयार कर लिया जाता है। ऐसे में किसान गेहूं की कटाई कर गन्ने की पछेती बुवाई में सिंगल बड से तैयार पौध का इस्तेेमाल करता है, जिसके चलते रही ज्यादा मांग।
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प्रदेश में बनाया दूसरा स्थान
धामपुर के गांव नैंसीवाला की रानी लक्ष्मी बाई समूह की अध्यक्ष स्वाति रानी ने बताया कि उन्होंने अपनी टीम के साथ इस साल साढ़े तीन लाख पौधे तैयार किए हैं। पौध किसानों को बेची। एक पौध पर एक रुपया तीस पैसे गन्ना विभाग से अनुदान मिला और एक रुपया तीस पैसे किसानों से मूल्य मिला। बेहतर काम करने पर गन्ना आयुक्त तरफ से घोषित परिणाम में दूसरा स्थान पाया।
घर का खर्च चलाना हुआ आसान
अफजलगढ़ के गांव कल्लूवाला के जागृति महिला समूह की अध्यक्ष सत्तो देवी ने बताया कि उन्होंने टीम के साथ करीब इस बार तीन लाख 36 हजार पौध तैयार की। समूह में 14 महिलाएं रोजगार पा रही हैं। जिससे घर का खर्च चलाना आसान हुआ है। घर के आंगन में ही पौध तैयार करती हैं।
जिले में 195 महिला समूह हैं, जिन्होंने गन्ने की सिंगल बड विधि से पौध तैयार कर किसानों को मुहैया कराई। करीब 1100 किसानों ने पौध खरीदी है, जिस पर समूह की महिलाओं से एक करोड़ से अधिक अनुदान दिया गया है। करीब इतना ही मूल्य किसानों से समूहों को मिला है। जिले के दो समूहों ने बेहतर प्रदर्शन कर प्रदेश में दूसरा स्थान बनाया है।
- यशपाल सिंह, जिला गन्ना अधिकारी

महिला संतो देवी।- फोटो : BIJNOR

बिजनौर के गांव खिजरपुर में गन्ने की पौध पर दवाई का स्प्रे करते कर्मचारी।- फोटो : BIJNOR