फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bijnor News ›   Wild animal killed in the department's failure

वन विभाग की नाकामी में मारा गया अनुसूचि प्रथम का वन्य जीव गुलदार

Mon, 06 Jan 2020 11:27 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 06 Jan 2020 11:27 PM IST
विज्ञापन
Wild animal killed in the department's failure
नजीबाबाद के भोगपुर में मृत गुलदार को ले जाते पुलिसकर्मी, बीच में डीएम रमाकांत पांडेय। - फोटो : NAZIBABAD
विभाग की नाकामी में मारा गया वन्य जीव गुलदार
विज्ञापन

बिजनौर। वन विभाग की लापरवाही में ही वन्य जीव और इंसानों के बीच संघर्ष बढ़ता गया। इसी कारण छह इंसानों की जान चली गई और दुर्लभ जीव में शामिल गुलदार भी मारा गया। मोहंडिया में गुलदार को पकड़ने के लिए कोशिशें तो की जा रही हैं, मगर सरसरी तौर पर। गुलदार को पकड़ने के लिए प्रशासन ने अब तक केवल दो विशेषज्ञ भेजे वो भी कुछ घंटे के लिए।
गांव मोहंडिया में गुलदार को पकड़ने के लिए अब तक शासन स्तर से कोई मदद नहीं की गई। यहां तक कि उसे ट्रैंकुलाइज करने की अनुमति तक नहीं दी गई है। गांव वाले दिन में खेतों में अकेले नहीं जा रहे, रात के समय खेतों में जाना मौत का सबब बन सकता है। गांव वालों का कहना हे कि गुलदार को पकड़ने में हीला हवाली की जा रही है। इससे पहले गुलदार ने जब चार लोग और मारे तब उसे पकड़ने की कोशिशें नजीबाबाद क्षेत्र में की गईं, लेकिन बाद में गुलदार के मंडावर की ओर हमले करने पर नजीबाबाद की कोशिशें कम कर दी गईं। सभी मौतें मोहंडिया में छिपी मादा गुलदार के सिर पर ही डाल दी गईं। छह इंसानों की मौत के बाद एक गुलदार की भी जान चली गई तो वन विभाग के अफसरों के हाथ पैर फूले हैं। अब एक नहीं तीन गुलदार द्वारा इंसानों को मारने की बात अफसर कह रहे हैं। अब प्रेमपुरी में एक बच्चे को मारने वाले गुलदार को पकड़ने के लिए भी वन विभाग वाले पिंजरा लगाने की बात कह रहे हैं।
विज्ञापन

दुर्लभ जीव है गुलदार
गुलदार अनुसूची प्रथम का वन्य जीव है। यह दुर्लभ जीवों की श्रेणी में आता है। इसी वजह से गांव मोहंडिया के जंगल में छिपी मादा गुलदार को अब तक वन विभाग ने मारने की कोशिश नहीं की है। उसे आदमखोर घोषित नहीं किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

ऐसा होता है गुलदार
गुलदार के शरीर पर हल्के धब्बे होते हैं। गुलदार अधिकतम 58 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ता है। यह एक बार में छह मीटर तक की छलांग लगा सकता है। इसका वजन 50 से 90 किलोग्राम तक होता है। मादा गुलदार और नर गुलदार अलग अलग रहते हैं।
तो शावकों को छोड़ देती है मां
गुलदार स्वभाव से बेहद शर्मीला जीव होता है। यह इंसानों से दूर ही रहता है। प्रणय के समय ये खेतों को अपना आशियाना बनाते हैं। नर व मादा गुलदार अलग अलग रहते हैं। अगर इंसान गुलदार के शावकों को उठा ले तो इंसानी गंध आने के कारण मादा गुलदार शावकों को छोड़ देती है।

जनाक्रोश में मारा गया गुलदार
बिजनौर। डीएम रमाकांत पांडेय के अनुसार गुलदार ने पहले भी एक बच्चे को मारा था। वह प्रशांत को मारकर शव के पास ही बैठा था। इससे साफ है कि वह आदमखोर हो गया था। मौके पर जनाक्रोश था। दुर्भाग्य है कि गुलदार मारा गया। उसे बचाने की पूरी कोशिश की गई थी। लोगों ने गुलदार पर गोलियां चलाईं इससे वह मारा गया। अगर कोई व्यक्ति आकर कहता है कि उसकी गोली से गुलदार मरा तो उसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। वहां तमाम लोग मौजूद थे। खुद वह भी वहां मौजूद थे।

नजीबाबाद के भोगपुर में मृत गुलदार को देखते डीएम रमाकांत पांडेय और प्रशासनिक अधिकारी।

नजीबाबाद के भोगपुर में मृत गुलदार को देखते डीएम रमाकांत पांडेय और प्रशासनिक अधिकारी।- फोटो : NAZIBABAD

नजीबाबाद के भोगपुर में आदमखोर मृत गुलदार को खेत से बाहर लाते ग्रामीण।

नजीबाबाद के भोगपुर में आदमखोर मृत गुलदार को खेत से बाहर लाते ग्रामीण।- फोटो : NAZIBABAD

नजीबाबाद के भोगपुर में आदमखोर गुलदार को मारकर खेत से लाती ग्रामीणों की भीड़।

नजीबाबाद के भोगपुर में आदमखोर गुलदार को मारकर खेत से लाती ग्रामीणों की भीड़।- फोटो : NAZIBABAD

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed