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नूरपुर - हिंदुस्तान में रहने वालों को हिंदू कहे जाने पर एतराज क्यों : पुंडरीक गोस्वामी
Wed, 01 Mar 2023 12:32 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Wed, 01 Mar 2023 12:32 AM IST
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- कहा - जिस व्यक्ति में सत्य, करुणा, प्रेम व इंसानियत है वही मानव है
फोटो समाचार
नूरपुर (बिजनौर)। ग्राम मोरना में चल रहा श्रीमद् भागवत कथा के वाचक आचार्य पुंडरीक गोस्वामी महाराज ने कहा कि जिस व्यक्ति में सत्य, करुणा, प्रेम व इंसानियत है वही मानव है। इन चारों गुणों के बिना मनुष्य पशु के समान है। भारत को हिंदू राष्ट्र कहने में आपत्ति करने वालों पर उन्होंने कहा कि यूरोप में रहने वालों को यूरोपियन, अफ्रीका में रहने वालों को अफ्रीकन कहा जाता है तो हिंदुस्तान में रहने वालों को हिंदू कहे जाने पर एतराज क्यों किया जाता है।
मंगलवार को कथा आरंभ होने से पहले पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि आध्यात्म जीवन का सार है। आध्यात्म को अपनाने वाला व्यक्ति कभी दुखी नहीं हो सकता। कहा कि भगवत गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि मनुष्य को फल की चिंता किए बिना कर्म करना चाहिए। सच्चे मन व लगन के साथ कोई कार्य करने से उसका फल जरूर मिलता है। जिस व्यक्ति में करुणा, प्रेम, सत्य व इंसानियत है वही सही मायनों में मानव है। इनके बिना मनुष्य का जीवन पशु के समान है। ओम शब्द की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि ओम संपूर्ण ब्रह्मांड में मौजूद है। उन्होंने कहा कि भारत देश अनेकता में एकता उदाहरण है। जितने पहनावे व बोलियां यहां हैं उतनी विश्व के किसी देश में नहीं हैं। इस दौरान श्रीमद् भागवत कथा के आयोजक इंजीनियर परमवीर सिंह मौजूद रहे।
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नूरपुर (बिजनौर)। ग्राम मोरना में चल रहा श्रीमद् भागवत कथा के वाचक आचार्य पुंडरीक गोस्वामी महाराज ने कहा कि जिस व्यक्ति में सत्य, करुणा, प्रेम व इंसानियत है वही मानव है। इन चारों गुणों के बिना मनुष्य पशु के समान है। भारत को हिंदू राष्ट्र कहने में आपत्ति करने वालों पर उन्होंने कहा कि यूरोप में रहने वालों को यूरोपियन, अफ्रीका में रहने वालों को अफ्रीकन कहा जाता है तो हिंदुस्तान में रहने वालों को हिंदू कहे जाने पर एतराज क्यों किया जाता है।
मंगलवार को कथा आरंभ होने से पहले पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि आध्यात्म जीवन का सार है। आध्यात्म को अपनाने वाला व्यक्ति कभी दुखी नहीं हो सकता। कहा कि भगवत गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि मनुष्य को फल की चिंता किए बिना कर्म करना चाहिए। सच्चे मन व लगन के साथ कोई कार्य करने से उसका फल जरूर मिलता है। जिस व्यक्ति में करुणा, प्रेम, सत्य व इंसानियत है वही सही मायनों में मानव है। इनके बिना मनुष्य का जीवन पशु के समान है। ओम शब्द की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि ओम संपूर्ण ब्रह्मांड में मौजूद है। उन्होंने कहा कि भारत देश अनेकता में एकता उदाहरण है। जितने पहनावे व बोलियां यहां हैं उतनी विश्व के किसी देश में नहीं हैं। इस दौरान श्रीमद् भागवत कथा के आयोजक इंजीनियर परमवीर सिंह मौजूद रहे।
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