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स्वैच्छिक हुआ तो फसल बीमा से मोड़ लिया मुंह
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स्वैच्छिक हुआ तो फसल बीमा से मोड़ लिया मुंह
बिजनौर। फसल बीमा योजना स्वैच्छिक की गई तो किसानों ने इससे मुंह सा मोड़ लिया है। योजना में अब केवल चार हजार किसान ही जुड़े हुए हैं। बाकि किसानों ने फसल बीमा योजना का लाभ लेने से इंकार कर दिया है। इससे किसानों का कई करोड़ रुपये का सालाना प्रीमियम बच रहा है।
फसलों में संभावित नुकसान होने पर भी किसानों को नुकसान से बचाने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना संचालित की जा रही है। किसान बैंकों से किसान क्रेडिट कार्ड पर ऋण निकालते हैं। किसान जो ऋण निकालते हैं पहले उसके साथ फसल बीमा योजना को अनिवार्य बनाया गया था। योजना में बैंक से ऋण लेते ही किसान की फसल बीमित हो जाती थी। किसान को यह लिखना पड़ता था कि उसे किस फसल के लिए ऋण चाहिए। किसान जितना ऋण लेता था उसका दो प्रतिशत प्रीमियम ब्याज के साथ अतिरिक्त देना होता था। यानि किसान पर सात प्रतिशत ब्याज लगता था तो प्रीमियम जोड़कर किसान को नौ प्रतिशत ब्याज देना होता था।
इस योजना का किसान विरोध करते थे। किसान योजना को स्वैच्छिक बनाने की मांग करते थे। किसानों की मांग पर गन्ने को योजना से बाहर कर दिया गया था। इस वित्तीय वर्ष की शुरूआत में इस योजना को केंद्र सरकार ने स्वैच्छिक कर दिया था। योजना के स्वैच्छिक होते ही अधिकतर किसानों ने इससे दूरी बना ली है। जिले में किसानों के दो लाख 99 हजार 454 किसान क्रेडिट कार्ड बने हुए हैं। किसान हर साल एक हजार करोड़ से अधिक का कर्ज लेते हैं। यानि किसान के करीब 20 करोड़ रुपये इस योजना के प्रीमियम में ही चले जाते थे और मुआवजे के नाम पर कुछ लाख रुपये ही कुछ किसानों को मिलते थे। लेकिन अब केवल पांच हजार किसान ही योजना का लाभ ले रहे हैं। इतने किसान ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ ले रहे हैं।
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तीन हजार किसानों ने लिया लाभ
खरीफ की फसल के लिए केवल तीन हजार दो किसानों ने ही फसल बीमा योजना का लाभ लिया है। इन किसानों ने एक हजार 19 हेक्टेयर जमीन पर सात करोड़ 11 लाख रुपये का ऋण लिया है। इस राशि पर किसानों को 14 लाख 22 हजार एक रुपये का प्रीमियम कटा है।
किसान को नहीं माना इकाई
किसानों को इस योजना में सबसे बड़ी आपत्ति थी कि योजना में नुकसान की इकाई किसान को माना जाए। योजना में पूूरे गांव की फसल तबाह होने पर ही किसान बीमा क्लेम लेने का अधिकार रखता था। एक किसान के नुकसान को नुकसान नहीं माना जाता था।
किसान ले सकते हैं लाभ
जिला कृषि अधिकारी डॉ. अवधेश मिश्र के अनुसार फसल बीमा योजना स्वैच्छिक है। जो किसान चाहे इसका लाभ ले सकता है। अब यह योजना अनिवार्य नहीं है।
बीमा और मुआवजे की सूची
फसल बीमित किसान बीमित राशि प्रीमियम मुआवजा
रबी 2015 565 184 4.09 2.23
खरीफ 2016 27418 12262 245.25 41.15
रबी 2016 10388 6202 43.68 0.97
खरीफ 2017 3637 959 19.18 30.41
रबी 2017 1995 790 11.85 1.54
खरीफ 2018 1515 658 13.17 23.46
रबी 2018 1253 657 9.86 0.17
खरीफ 2019 877 782 15.60 25.82
रबी 2019 1575 924 13.86 3.95
खरीफ 2020 3002 711 14.22 0
कुल 52225 24129 390.76 129.7
नोट : राशि लाख रुपये में है। विकास भवन से आंकड़े लिए गए हैं।
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बिजनौर। फसल बीमा योजना स्वैच्छिक की गई तो किसानों ने इससे मुंह सा मोड़ लिया है। योजना में अब केवल चार हजार किसान ही जुड़े हुए हैं। बाकि किसानों ने फसल बीमा योजना का लाभ लेने से इंकार कर दिया है। इससे किसानों का कई करोड़ रुपये का सालाना प्रीमियम बच रहा है।
फसलों में संभावित नुकसान होने पर भी किसानों को नुकसान से बचाने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना संचालित की जा रही है। किसान बैंकों से किसान क्रेडिट कार्ड पर ऋण निकालते हैं। किसान जो ऋण निकालते हैं पहले उसके साथ फसल बीमा योजना को अनिवार्य बनाया गया था। योजना में बैंक से ऋण लेते ही किसान की फसल बीमित हो जाती थी। किसान को यह लिखना पड़ता था कि उसे किस फसल के लिए ऋण चाहिए। किसान जितना ऋण लेता था उसका दो प्रतिशत प्रीमियम ब्याज के साथ अतिरिक्त देना होता था। यानि किसान पर सात प्रतिशत ब्याज लगता था तो प्रीमियम जोड़कर किसान को नौ प्रतिशत ब्याज देना होता था।
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इस योजना का किसान विरोध करते थे। किसान योजना को स्वैच्छिक बनाने की मांग करते थे। किसानों की मांग पर गन्ने को योजना से बाहर कर दिया गया था। इस वित्तीय वर्ष की शुरूआत में इस योजना को केंद्र सरकार ने स्वैच्छिक कर दिया था। योजना के स्वैच्छिक होते ही अधिकतर किसानों ने इससे दूरी बना ली है। जिले में किसानों के दो लाख 99 हजार 454 किसान क्रेडिट कार्ड बने हुए हैं। किसान हर साल एक हजार करोड़ से अधिक का कर्ज लेते हैं। यानि किसान के करीब 20 करोड़ रुपये इस योजना के प्रीमियम में ही चले जाते थे और मुआवजे के नाम पर कुछ लाख रुपये ही कुछ किसानों को मिलते थे। लेकिन अब केवल पांच हजार किसान ही योजना का लाभ ले रहे हैं। इतने किसान ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ ले रहे हैं।
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तीन हजार किसानों ने लिया लाभ
खरीफ की फसल के लिए केवल तीन हजार दो किसानों ने ही फसल बीमा योजना का लाभ लिया है। इन किसानों ने एक हजार 19 हेक्टेयर जमीन पर सात करोड़ 11 लाख रुपये का ऋण लिया है। इस राशि पर किसानों को 14 लाख 22 हजार एक रुपये का प्रीमियम कटा है।
किसान को नहीं माना इकाई
किसानों को इस योजना में सबसे बड़ी आपत्ति थी कि योजना में नुकसान की इकाई किसान को माना जाए। योजना में पूूरे गांव की फसल तबाह होने पर ही किसान बीमा क्लेम लेने का अधिकार रखता था। एक किसान के नुकसान को नुकसान नहीं माना जाता था।
किसान ले सकते हैं लाभ
जिला कृषि अधिकारी डॉ. अवधेश मिश्र के अनुसार फसल बीमा योजना स्वैच्छिक है। जो किसान चाहे इसका लाभ ले सकता है। अब यह योजना अनिवार्य नहीं है।
बीमा और मुआवजे की सूची
फसल बीमित किसान बीमित राशि प्रीमियम मुआवजा
रबी 2015 565 184 4.09 2.23
खरीफ 2016 27418 12262 245.25 41.15
रबी 2016 10388 6202 43.68 0.97
खरीफ 2017 3637 959 19.18 30.41
रबी 2017 1995 790 11.85 1.54
खरीफ 2018 1515 658 13.17 23.46
रबी 2018 1253 657 9.86 0.17
खरीफ 2019 877 782 15.60 25.82
रबी 2019 1575 924 13.86 3.95
खरीफ 2020 3002 711 14.22 0
कुल 52225 24129 390.76 129.7
नोट : राशि लाख रुपये में है। विकास भवन से आंकड़े लिए गए हैं।