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गांवों में कोरोना : बिजनौर में बिना उपकरणों के घर-घर जाकर मरीज ढूंढ रही स्वाथ्य विभाग की टीम, कैसे हो सही जांच

Tue, 11 May 2021 11:52 PM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Tue, 11 May 2021 11:52 PM IST
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When there is no equipment, how will the correct investigation be done
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
कोरोना मरीजों की पहचान के लिए घर-घर जाकर जांच करने वाली निगरानी समिति की टीमों के पास बुखार व ऑक्सीजन का स्तर मापने के उपकरण नहीं हैं। उत्तर प्रदेश के बिजनौर में उपकरण के बिना मात्र खानापूर्ति की जा रही है। ये टीमें घरों पर जाकर परिवार के मुखिया का नाम, सदस्यों की संख्या तथा बीमार व्यक्ति के विषय में जानकारी ले रही हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि बिना जांच किए, केवल जानकारी से सही हालात कैसे पता चल सकेंगे।
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नींदडू़ खास में आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर आधारित निगरानी समिति की आठ टीमें बनाई गई हैं। गांव में 1453 परिवार हैं। टीमों को रोजाना 50 घरों का सर्वे करने के साथ थर्मल स्कैनर से बुखार और पल्स ऑक्सीमीटर से पल्स रेट चेक कर ऑक्सीजन का स्तर मापना है, किंतु जब किसी टीम के पास बुखार व ऑक्सीजन का स्तर मापने के उपकरण ही नहीं हैं।
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ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि उपकरण के अभाव में इस कार्य में लगी टीमें किस प्रकार अपनी जिम्मेदारी को सही ढंग से अंजाम दे सकेंगी। डोर-टू-डोर जाकर बुखार व कोरोना मरीजों का पता लगाने वाली टीमों को किसी प्रकार का निजी सुरक्षा कवच (पीपीई किट) उपलब्ध नहीं कराया गया है। इसके बावजूद वे कोरोना कर्फ्यू के दौरान अपना जीवन जोखिम में डालकर घर घर जाकर स्वास्थ्य सर्वेक्षण के कार्य और रोगियों का पता लगाने में लगी हैं।
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उधर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र धामपुर के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. मनीष राज शर्मा ने बताया कि सहायक विकास अधिकरी (पंचायत) के माध्यम से हर गांव की निगरानी समिति को उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। समिति सदस्यों को इन्हीं के माध्यम से घर घर जाकर रोजाना 50 से 60 मरीजों की जांच करनी है। रोग के लक्षण पाए जाने पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता चिकित्सा अधिकारियों से संपर्क कर रोगी को आवश्यक दवाई उपलब्ध कराएगी। कोरोना लक्षण मिलने पर मरीज को घर पर ही क्वारंटीन किया जाएगा।

दूसरी ओर एडीओ पंचायत अनिल कुमार का कहना है कि हर गांव में एक पल्स ऑक्सीमीटर और एक थर्मल स्केनर का सेट पहले ही उपलब्ध कराया जा चुका है। निगरानी समिति के सदस्यों को उसी के माध्यम से घर घर जाकर बुखार व पल्स रेट की जांच कर मरीजों का पता लगाना तथा उनका उपचार कराना है।


उधर, ग्राम विकास अधिकारी राकेश कुमार ने बताया कि ऑक्सीमीटर और थर्मल स्केनर प्रधानों के यहां रखे गए थे। प्रधानी बदलने के बाद अब प्रधान इन उपकरणों को निगरानी समिति को देने में आनाकानी कर रहे हैं। कुछ उपकरण टूटने की बात कह रहे हैं। सर्वेक्षण कर रही टीमों को नए उपकरण खरीदकर दिए जाएंगे।
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