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...तुम्हारा दिल दुखाने की हिमाकत हम नहीं करते
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...तुम्हारा दिल दुखाने की हिमाकत हम नहीं करते
धामपुर। गांव बगदाद अंसार में सोमवार रात्रि आल इंडिया मुशायरे का आयोजन हुआ। उद्घाटन बीडीसी सदस्य शमशाद हुसैन, शेरकोट के समाजसेवी हाजी सुल्तान ने फीटा काटकर किया। शेरकोट के बसपा नगराध्यक्ष हाजी सुलतान अंसारी ने मुशायरे की समा रोशन की।
मुशायरे का आगाज कलकत्ता से आए शब्बीर कमाल ने नात-ए-पाक ‘इलाही तू अकेला है मगर सारा जहां तेरा है, मकी तेरी मका तेरा जमीनों आसमां तेरा’ से किया। निकहत मुरादाबादी ने कहा ‘जो तू चाहे के लोगों के दिलों में हो अदब तेरा, तेरे लहजे में भी कुछ सादगी होना जरूरी है’। मुंबई से आए युवा शायर अली फाजिल ने कहा ‘दिल का जहर उसकी जबां से जब फिजा में घुल गया, मिसले गिजा बागे चमन में बंद हवा चलने लगी’। सुल्तानजहां पूरनपुरी ने कहा ‘तुम्हारा दिल दुखाने की हिमाकत हम नहीं करते, ये किसने कह दिया तुमसे मुहब्बत हम नहीं करते’। इरशाद धामपुरी ने कहा ‘अबद की महफिलें हर सू सजाई जाएंगी, जब तलक भी ये उर्दू जबान बाकी है’।
उत्तराखंड से आए शायर आलम मुसाफिर ने कहा ‘सोचता हूं ख्वाब उसके सारे बहा दूं पानी में, जी चाहता है कि अब तो आग लगा दूं पानी में’। शाहरुख कलकत्ता, करी शब्बीर कमर, इब्राहीम हमदम, अनवर धड़ाधड़, हाफिज रियाजुद्दीन, अर्स अंसारी, शालिम बगदादी, हमजा अंसारी आदि ने भी कलाम किए। डॉ. आसिफ अंसारी, आफताब अहमद, रफियत मनी हैदराबाद, इरशाद अली पंजाब, बिलाल अहमद अंसारी दिल्ली, आमिर हुसैन, मोहम्मद अहतेशाम, यूनुस अंसारी, इकबाल अंसारी आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता हाजी नौशाद अंसारी, संचालन सुहेल नूर कलकत्ता ने किया। मुजफ्फर हुसैन, डॉ. मुजफ्फर अली ने अतिथियों का आभार जताया।
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धामपुर। गांव बगदाद अंसार में सोमवार रात्रि आल इंडिया मुशायरे का आयोजन हुआ। उद्घाटन बीडीसी सदस्य शमशाद हुसैन, शेरकोट के समाजसेवी हाजी सुल्तान ने फीटा काटकर किया। शेरकोट के बसपा नगराध्यक्ष हाजी सुलतान अंसारी ने मुशायरे की समा रोशन की।
मुशायरे का आगाज कलकत्ता से आए शब्बीर कमाल ने नात-ए-पाक ‘इलाही तू अकेला है मगर सारा जहां तेरा है, मकी तेरी मका तेरा जमीनों आसमां तेरा’ से किया। निकहत मुरादाबादी ने कहा ‘जो तू चाहे के लोगों के दिलों में हो अदब तेरा, तेरे लहजे में भी कुछ सादगी होना जरूरी है’। मुंबई से आए युवा शायर अली फाजिल ने कहा ‘दिल का जहर उसकी जबां से जब फिजा में घुल गया, मिसले गिजा बागे चमन में बंद हवा चलने लगी’। सुल्तानजहां पूरनपुरी ने कहा ‘तुम्हारा दिल दुखाने की हिमाकत हम नहीं करते, ये किसने कह दिया तुमसे मुहब्बत हम नहीं करते’। इरशाद धामपुरी ने कहा ‘अबद की महफिलें हर सू सजाई जाएंगी, जब तलक भी ये उर्दू जबान बाकी है’।
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उत्तराखंड से आए शायर आलम मुसाफिर ने कहा ‘सोचता हूं ख्वाब उसके सारे बहा दूं पानी में, जी चाहता है कि अब तो आग लगा दूं पानी में’। शाहरुख कलकत्ता, करी शब्बीर कमर, इब्राहीम हमदम, अनवर धड़ाधड़, हाफिज रियाजुद्दीन, अर्स अंसारी, शालिम बगदादी, हमजा अंसारी आदि ने भी कलाम किए। डॉ. आसिफ अंसारी, आफताब अहमद, रफियत मनी हैदराबाद, इरशाद अली पंजाब, बिलाल अहमद अंसारी दिल्ली, आमिर हुसैन, मोहम्मद अहतेशाम, यूनुस अंसारी, इकबाल अंसारी आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता हाजी नौशाद अंसारी, संचालन सुहेल नूर कलकत्ता ने किया। मुजफ्फर हुसैन, डॉ. मुजफ्फर अली ने अतिथियों का आभार जताया।
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