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स्वाइन फ्लू को लेकर जिला अस्पताल प्रशासन सतर्क
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स्वाइन फ्लू इलाज के लिए वार्ड तो बनाया, जांच की सुविधा नहीं
बिजनौर। स्वाइन फ्लू के अंदेशे को लेकर जिला अस्पताल प्रशासन सतर्क हो गया है। इसके लिए दस बेड वाला वार्ड आरक्षित किया गया है। लेकिन हैरत की बात ये है कि जिला अस्पताल में इस बीमारी की जांच की सुविधा ही नहीं है। बीमारी के लक्षण प्रतीत होने पर मरीज को जांच के लिए मेडिकल कॉलेज ही भेजा जाएगा।
शासन के निर्देश पर जिला महिला अस्पताल के पुराने भवन में तृतीय तल पर 10 बेड वाला स्वाइन फ्लू वार्ड बनाया गया है। लगभग दो माह पूर्व इसी अस्पताल को कोविड एल-2 वाला 98 विंग बनाया गया। इसी में कोरोना के मरीज भर्ती हैं। दोनों बीमारियों के लक्षण एक जैसे होने के कारण वहीं पर स्वाइन फ्लू वार्ड बनाने की व्यवस्था की गई है। लेकिन जिला अस्पताल में स्वाइन फ्लू की जांच की सुविधा ही नहीं है। लक्षण दिखाई देने पर मरीजों को जांच के लिए मेडिकल कॉलेज भेजा जाता है।
जिला अस्पताल के सीएमएस डा. ज्ञानचंद का कहना है कि लंबे समय तक खांसी, बुखार रहना और हाथ-पैर टूटना आदि इस बीमारी के प्रमुख लक्षण हैं। तीन-चार दिन में मरीज की हालत खराब होने लगती है। समय रहते ही कुशल चिकित्सक से दवा न लेने पर असमय मृत्यु तक हो जाती है। सीएमएस ने बताया कि अभी तक जिले में स्वाइन फ्लू का केस नहीं मिला है। इसके बावजूद शासन के निर्देशानुसार अस्पताल में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। दवा की पर्याप्त व्यवस्था है। अगर इस बीमारी के लक्षण वाला कोई मरीज आता है, तो उसे सबसे पहले जांच के लिए एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाएगा।
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बीमारी से बचाव के उपाय
- स्वाइन फ्लू वाले मरीज से दूर रहना चाहिए।
- एक-दूसरे के संपर्क में आने से बीमारी का खतरा रहता है।
- संपर्क में आते ही बीमारी का वायरस दूसरे में पहुंच जाता है।
- सबसे महत्वपूर्ण मास्क का प्रयोग ही इसका बचाव है।
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बिजनौर। स्वाइन फ्लू के अंदेशे को लेकर जिला अस्पताल प्रशासन सतर्क हो गया है। इसके लिए दस बेड वाला वार्ड आरक्षित किया गया है। लेकिन हैरत की बात ये है कि जिला अस्पताल में इस बीमारी की जांच की सुविधा ही नहीं है। बीमारी के लक्षण प्रतीत होने पर मरीज को जांच के लिए मेडिकल कॉलेज ही भेजा जाएगा।
शासन के निर्देश पर जिला महिला अस्पताल के पुराने भवन में तृतीय तल पर 10 बेड वाला स्वाइन फ्लू वार्ड बनाया गया है। लगभग दो माह पूर्व इसी अस्पताल को कोविड एल-2 वाला 98 विंग बनाया गया। इसी में कोरोना के मरीज भर्ती हैं। दोनों बीमारियों के लक्षण एक जैसे होने के कारण वहीं पर स्वाइन फ्लू वार्ड बनाने की व्यवस्था की गई है। लेकिन जिला अस्पताल में स्वाइन फ्लू की जांच की सुविधा ही नहीं है। लक्षण दिखाई देने पर मरीजों को जांच के लिए मेडिकल कॉलेज भेजा जाता है।
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जिला अस्पताल के सीएमएस डा. ज्ञानचंद का कहना है कि लंबे समय तक खांसी, बुखार रहना और हाथ-पैर टूटना आदि इस बीमारी के प्रमुख लक्षण हैं। तीन-चार दिन में मरीज की हालत खराब होने लगती है। समय रहते ही कुशल चिकित्सक से दवा न लेने पर असमय मृत्यु तक हो जाती है। सीएमएस ने बताया कि अभी तक जिले में स्वाइन फ्लू का केस नहीं मिला है। इसके बावजूद शासन के निर्देशानुसार अस्पताल में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। दवा की पर्याप्त व्यवस्था है। अगर इस बीमारी के लक्षण वाला कोई मरीज आता है, तो उसे सबसे पहले जांच के लिए एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाएगा।
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बीमारी से बचाव के उपाय
- स्वाइन फ्लू वाले मरीज से दूर रहना चाहिए।
- एक-दूसरे के संपर्क में आने से बीमारी का खतरा रहता है।
- संपर्क में आते ही बीमारी का वायरस दूसरे में पहुंच जाता है।
- सबसे महत्वपूर्ण मास्क का प्रयोग ही इसका बचाव है।