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पहाड़ से निर्मल चली, मैदान में मैली हो गई मालन

Sun, 01 May 2022 12:21 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 01 May 2022 12:21 AM IST
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Walked clean from the mountain, Malan became dirty in the field
नजीबाबाद में गंदगी के कारण काली हो गई मालन की धारा। - फोटो : BIJNOR
पहाड़ से निर्मल चली, मैदान में मैली हो गई मालन
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बिजनौर। पहाड़ों से उतर कर बिजनौर के मैदान में पहुंचने वाली मालन नजीबाबाद में घुसते ही मलिन हो जाती है। असल में नजीबाबाद का गंदा पानी पांच नालों के जरिये मालन में गिराया जा रहा है। वहीं कई जगहों पर सीधे तौर पर भी लोग कूड़ा डालकर मालन को गंदा कर रहे हैं। ऐसे में मालन की अविरल धारा नजीबाबाद आते आते मैली हो गई।
मालन नदी के पौराणिक इतिहास समय-समय में इसके किनारे निकलने वाली मूर्तियां खुद बयां करती आई हैं। वहीं राजा दुष्यंत और शकुंतला की प्रणय की साक्षी यह मालन अब अपना स्वरूप ही खोती जा रही है। माना जाता है कि जब मालन के किनारे सभ्यता बसती थी, तब लोग मालन में स्नान करके इसके किनारों पर बने मंदिरों में स्नान करते थे। पर आज की बात करें तो हालात बद से बदतर हो रहे हैं। बिजनौर जिले की सीमा में हल्दूखाता से प्रवेश करते समय भी मालन की स्थिति इतनी बुरी नहीं है, लेकिन नजीबाबाद में हालात बहुत खराब हो रहे हैं। इसका बड़ा कारण नजीबाबाद में मोहल्ला पाईबाग, मोहल्ला श्यामली, हरिद्वार रोड के दोनों ओर दो नाले, इंविटेशन बैंक्वेट हाल के पास से होकर गुजर रहे नाले मालन में गिर रहे हैं। इन नालों से रोजाना सैकड़ों क्यूसेक गंदा पानी मालन में सीधे तौर पर डाल रहे हैं।
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खुद को साफ करने में असमर्थ हुई मालन
आमतौर पर नदियों के लिए माना जाता है कि करीब दस किलोमीटर चलने पर नदी अपने आप को स्वयं साफ कर लेती है। इसके पीछे तर्क दिया जाता है कि नदी में मौजूद रेत में पानी खुद को फिल्टर करता रहता है। मालन के साथ ऐसा नहीं है। यहां पर नदी की चौड़ाई कम होने के बाद पानी फिल्टर नहीं हो पा रहा है। यदि मालन अपनी प्राकृतिक स्वरूप में होकर बहे तो इसका भी काफी असर दिखाई पड़ेगा।
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नगर हो या ग्रामीण क्षेत्र मालन नदी का जल दूषित नजर आता है। आसपास की आबादी का पानी सीधा मालन नदी के जल को दूषित कर रहा है। हालांकि सरकार ने आबादी क्षेत्र के पानी की गंदगी को नदी में जाने से रोकने के लिए जाली आदि लगाई हैं, लेकिन प्रयास ऊंट के मुंह में जीरा साबित हुआ है।
- डॉ.राजीव अरोड़ा, समाजसेवी एवं चिकित्सक
मालन नदी हमारी पौराणिक और धार्मिक महत्व की नदी है। धार्मिक संस्कार से जुड़ते हुए हमें नदी के जल को शीतल, निर्मल और स्वच्छ रखने के लिए अभिनव प्रयास करने होंगे। नदी के जल को स्वच्छ रखने के लिए अनावश्यक कूड़ा करकट नदी में फेंकने से बचना होगा।
- चौ.विपिन कुमार, जिलाध्यक्ष भाकियू तोमर गुट
जल प्रदूषण के लिए इंसान जिम्मेदार है। पवित्र नदियां हों या भू-जल स्तर इंसान को ही नदियों के जल की शुद्धता और पवित्रता को बनाए रखने के लिए आगे आना होगा। मालन नदी का जल तभी शुद्ध और निर्मल हो सकता है जब सरकारी प्रयासों के साथ लोग इसे धार्मिक आस्था के नजरिए से देखें और जल प्रदूषित होने वाले कारकों पर अंकुश लगाएं।

- सुमन शर्मा, कवयित्री एवं समाजसेवी
नगरपालिका परिषद ने शासन के निर्देश पर नगर से जुड़े नालों की गंदगी मालन नदी में जाने से रोकने के लिए नालों में जाली लगाई है। पानी को शुद्ध करने वाले औषधीय पौधे नालों में लगाने की योजना है। योजना तभी सफल हो सकती है जब इसे मालन नदी से जुड़े सभी नालों की गंदगी नदी तक आने से रोकने के लिए व्यापक योजना लागू की जाए।
- शैलेंद्र चौधरी एडवोकेट
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