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बाढ़ से बचाव के लिए बजट का इंतजार
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बाढ़ से बचाव के लिए बजट का इंतजार
बिजनौर। जिले के खादर इलाकों में बसे लोगों को हर साल बरसात से डर लगने लगता है। इसकी वजह है, गंगा और सहायक नदियों की बाढ़। बाढ़ के वक्त फौरी इंतजाम कर दिए जाते हैं, बाद में बड़ी परियोजनाएं यूं ही लटकी रह जाती है। दर्जनभर गांवों की बाढ़ से सुरक्षा के लिए 61 करोड़ की गौंसपुर परियोजना पर भी दो साल पहले मुहर लग चुकी थी। लेकिन अभी तक इसके बजट का इंतजार किया जा रहा है।
पहाड़ से मैदानी इलाके में गंगा सबसे पहले बिजनौर में ही प्रवेश करती है। वहीं, उत्तर दिशा में शिवालिक पहाड़ियों के होने की वजह से भी सहायक नदियों की भरमार है। गंगा और उसकी सहायक नदियों का उफान जिले के लोगों को डराता रहता है। बाढ़ से सबसे ज्यादा गौंसपुर और उससे नीचे बसे हुए दर्जनभर गांव प्रभावित होते हैं। अबकी बार भी गौंसपुर के सरकारी स्कूल तक गंगा ने कटान किया। पूरे गांव पर खतरा मंडाराने लगा था। यह पिछले कई सालों से चल रहा है। गौंसपुर और मिर्जापुर, कुंदनपुर, सीमली, फतेहपुर सभाचंद, रघुनाथपुर आदि दर्जनभर गांवों को बचाने के लिए कई साल पहले कवायद शुरू हुई थी। यहां पर 61 करोड़ की लागत से बाढ़ से बचाव के कार्य कराए जाने थे। प्रस्ताव बनाकर भेजा भी गया। साल 2019 में केंद्र सरकार ने इसे पास भी कर दिया था। साल 2020 आते-आते कोरोना ने दस्तक दे दी। नतीजा यह हुआ कि बजट अटक गया, अब फिर से पत्र भेजकर राज्य सरकार को याद दिलाने का काम किया गया है।
गंगा में बह गई थीं दस महिलाएं
अगस्त 2018 में रावली के सामने गंगा उफान पर थी। उस समय एक नाव के गंगा में बह जाने से दस महिलाएं डूब गई थीं। जिनमें छह महिलाओं के शव बरामद हुए थे। बाकी चार महिलाओं का कहीं पता नहीं लग पाया था। खादर इलाकों में लोगों का जीवन बाढ़ से हर साल जूझता है।
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गंगा की बाढ़ से बचाने के लिए गौसपुर परियोजना के बजट को फिर से पत्र लिखा गया है। साल 2019 में यह परियोजना पास हो गई थी। अभी तक बजट नहीं मिला। अब बजट होता तो अभी काम शुरू करने के बाद जून से पहले खत्म करना होगा। बरसात लगने के बाद काम नहीं हो सकता। इस परियोजना से दर्जनभर गांव सुरक्षित हो जाएंगे
- राकेश कुमार, अधिशासी अभियंता एवं नोडल बाढ़ नियंत्रण
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बिजनौर। जिले के खादर इलाकों में बसे लोगों को हर साल बरसात से डर लगने लगता है। इसकी वजह है, गंगा और सहायक नदियों की बाढ़। बाढ़ के वक्त फौरी इंतजाम कर दिए जाते हैं, बाद में बड़ी परियोजनाएं यूं ही लटकी रह जाती है। दर्जनभर गांवों की बाढ़ से सुरक्षा के लिए 61 करोड़ की गौंसपुर परियोजना पर भी दो साल पहले मुहर लग चुकी थी। लेकिन अभी तक इसके बजट का इंतजार किया जा रहा है।
पहाड़ से मैदानी इलाके में गंगा सबसे पहले बिजनौर में ही प्रवेश करती है। वहीं, उत्तर दिशा में शिवालिक पहाड़ियों के होने की वजह से भी सहायक नदियों की भरमार है। गंगा और उसकी सहायक नदियों का उफान जिले के लोगों को डराता रहता है। बाढ़ से सबसे ज्यादा गौंसपुर और उससे नीचे बसे हुए दर्जनभर गांव प्रभावित होते हैं। अबकी बार भी गौंसपुर के सरकारी स्कूल तक गंगा ने कटान किया। पूरे गांव पर खतरा मंडाराने लगा था। यह पिछले कई सालों से चल रहा है। गौंसपुर और मिर्जापुर, कुंदनपुर, सीमली, फतेहपुर सभाचंद, रघुनाथपुर आदि दर्जनभर गांवों को बचाने के लिए कई साल पहले कवायद शुरू हुई थी। यहां पर 61 करोड़ की लागत से बाढ़ से बचाव के कार्य कराए जाने थे। प्रस्ताव बनाकर भेजा भी गया। साल 2019 में केंद्र सरकार ने इसे पास भी कर दिया था। साल 2020 आते-आते कोरोना ने दस्तक दे दी। नतीजा यह हुआ कि बजट अटक गया, अब फिर से पत्र भेजकर राज्य सरकार को याद दिलाने का काम किया गया है।
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गंगा में बह गई थीं दस महिलाएं
अगस्त 2018 में रावली के सामने गंगा उफान पर थी। उस समय एक नाव के गंगा में बह जाने से दस महिलाएं डूब गई थीं। जिनमें छह महिलाओं के शव बरामद हुए थे। बाकी चार महिलाओं का कहीं पता नहीं लग पाया था। खादर इलाकों में लोगों का जीवन बाढ़ से हर साल जूझता है।
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गंगा की बाढ़ से बचाने के लिए गौसपुर परियोजना के बजट को फिर से पत्र लिखा गया है। साल 2019 में यह परियोजना पास हो गई थी। अभी तक बजट नहीं मिला। अब बजट होता तो अभी काम शुरू करने के बाद जून से पहले खत्म करना होगा। बरसात लगने के बाद काम नहीं हो सकता। इस परियोजना से दर्जनभर गांव सुरक्षित हो जाएंगे
- राकेश कुमार, अधिशासी अभियंता एवं नोडल बाढ़ नियंत्रण