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Bijnor News: मुश्किल कुशा मौला अली की गूंज रहीं सदाएं, मातमी जुलूस हुए बरामद
Sun, 25 May 2025 12:37 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Sun, 25 May 2025 12:37 AM IST
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नजीबाबाद-जोगीरम्पुरी दरगाह पर मजलिस को खिताब करते मौलाना अजादार हुसैनी। संवाद
नजीबाबाद। या अली मौला अली, मुश्किल कुशा मौला अली सदाओं के साथ जोगीरम्पुरी दरगाह के मातमी आयोजन जारी हैं। एक ओर उलमा जहां वाक्याते कर्बला का जिक्र फरमा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अंजुमने मातमी जुलूस बरामद होने के साथ सोगवार गमगीन हो रहे हैं।
नजफ-ए-हिंद जोगीरम्पुरी दरगाह के तीसरे दिन अंजुमनों द्वारा नोहा ख्वानी और मर्सिया ख्वानी के साथ मातमी जुलूस बरामद का सिलसिला दिनभर जारी रहा। उधर, शमसुल हसन हॉल से मजलिसों को खिताब करते हुए शिया विद्वानों ने बच्चों को दीनी और दुनियावी तालीम दिलाने, नेकी और इंसानियत के रास्ते पर चलने और कर्बला के शहीदों से सबक लेने की सलाह दी।
मजलिस को खिताब करते हुए दिल्ली से आए मौलाना अजादार हुसैन ने हसद मौजू से खिताब करते हुए लोगों को आगाह किया कि हसद उसी से रखनी चाहिए जो इल्म, तकवे और माल में बड़ा हो। उन्होंने कहा कि हसद ईमान और इंसानियत को खा जाता है। उन्होंने वाक्याते कर्बला और हजरत अली के हवाले से दीन और इस्लाम के लिए कुर्बानी देने वालों से सबक लेने की सलाह दी। डॉ.मिर्जा शफीक हुसैन ने विलायत मौजू से मजलिस को खिताब करते हुए फरमाया कि विलायत ऐसा मंसब है जो अल्लाह, रसूल और अली तीनों के पास है।
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मजलिस को दिल्ली से आए मौलाना हसन कुमैली, मौलाना कमाल ताहिर बिजनौरी, मौलाना नाजिम अली, मौलाना मुनाजिर हुसैन, मौलाना वसी हसन आदि ने खिताब किया। मजलिसों में जब-जब जंग-ए-कर्बला का जिक्र आया जायरीनों ने सीनाजनी के साथ मातम किया। मजलिसों का संचालन नसीमुल बाकरी ने किया।
जुलूस-ए-अजा बरामद हुआ
नजीबाबाद। छजुपुरा सादात से आई अंजुमन इरफाने अजा के मो.मियां, कल्वे हैदर, जाफर, एम रजा के नेतृत्व में कर्बला की याद में मातमी जुलूस बरामद किया गया। सय्यद राजू के मजार से जुलजना, अलम, ताबूत, अमारी के साथ निकाला गया जुलूस में मर्सिया और नोहा ख्वानी के साथ दरगाह पहुंचकर संपन्न हुआ। कई अन्य अंजमनों ने भी मर्सिया और नोहा ख्वानी के साथ मातमी जुलूस बरामद किए।
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नजफ-ए-हिंद जोगीरम्पुरी दरगाह के तीसरे दिन अंजुमनों द्वारा नोहा ख्वानी और मर्सिया ख्वानी के साथ मातमी जुलूस बरामद का सिलसिला दिनभर जारी रहा। उधर, शमसुल हसन हॉल से मजलिसों को खिताब करते हुए शिया विद्वानों ने बच्चों को दीनी और दुनियावी तालीम दिलाने, नेकी और इंसानियत के रास्ते पर चलने और कर्बला के शहीदों से सबक लेने की सलाह दी।
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मजलिस को खिताब करते हुए दिल्ली से आए मौलाना अजादार हुसैन ने हसद मौजू से खिताब करते हुए लोगों को आगाह किया कि हसद उसी से रखनी चाहिए जो इल्म, तकवे और माल में बड़ा हो। उन्होंने कहा कि हसद ईमान और इंसानियत को खा जाता है। उन्होंने वाक्याते कर्बला और हजरत अली के हवाले से दीन और इस्लाम के लिए कुर्बानी देने वालों से सबक लेने की सलाह दी। डॉ.मिर्जा शफीक हुसैन ने विलायत मौजू से मजलिस को खिताब करते हुए फरमाया कि विलायत ऐसा मंसब है जो अल्लाह, रसूल और अली तीनों के पास है।
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मजलिस को दिल्ली से आए मौलाना हसन कुमैली, मौलाना कमाल ताहिर बिजनौरी, मौलाना नाजिम अली, मौलाना मुनाजिर हुसैन, मौलाना वसी हसन आदि ने खिताब किया। मजलिसों में जब-जब जंग-ए-कर्बला का जिक्र आया जायरीनों ने सीनाजनी के साथ मातम किया। मजलिसों का संचालन नसीमुल बाकरी ने किया।
जुलूस-ए-अजा बरामद हुआ
नजीबाबाद। छजुपुरा सादात से आई अंजुमन इरफाने अजा के मो.मियां, कल्वे हैदर, जाफर, एम रजा के नेतृत्व में कर्बला की याद में मातमी जुलूस बरामद किया गया। सय्यद राजू के मजार से जुलजना, अलम, ताबूत, अमारी के साथ निकाला गया जुलूस में मर्सिया और नोहा ख्वानी के साथ दरगाह पहुंचकर संपन्न हुआ। कई अन्य अंजमनों ने भी मर्सिया और नोहा ख्वानी के साथ मातमी जुलूस बरामद किए।