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गंगा स्नान मेले के आयोजन को किया मौका मुआयना
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बिजनौर मे विदुर कुटी के सामने गंगा किनारे गंगा स्नान मेले के आयोजन के लिए निरीक्षण करते जिला पंचा
- फोटो : BIJNOR
बिजनौर। विदुर कुटी के पास गंगा स्नान मेले के आयोजन को लेकर जिला पंचायत लगातार जमीन तलाश रही है। लेकिन अभी तक गंगा किनारे कीचड़ फैला हुआ है। इस महीने में ही जिला पंचायत के अधिकारी तीन बार गंगा घाट का मौका मुआयना कर चुके हैं। रविवार को भी टीम ने विदुरकुटी के पास पहुंचकर मेला आयोजन को लेकर जमीन का मुआयना किया।
रविवार को जिला पंचायत के अभियंता कपिल टीम को लेकर ट्रैक्टर से गंगा घाट तक पहुंचे। उन्होंने गंगा की धारा और किनारे छोड़े गए रेत का अवलोकन किया। हालांकि इस बार विदुरकुटी से तीन किलोमीटर दूर मेला आयोजन की जगह मिली है।
कार्तिक पूर्णिमा को गंगा में लाखों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते हैं। जिसके चलते गंगा किनारे तंबुओं का शहर बस जाता है। इस बार पांच नवंबर को मेले का उद्घाटन होगा। जबकि मुख्य स्नान सात और आठ नवंबर को है। जिला पंचायत ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। टीम ने मुुआयना कर यह देखा गया कि मेला लगाने के लिए कौन की जगह उपयुक्त रहेगी। विदुर कुटी से तीन किलोमीटर आगे चलकर भूमि को चिन्हित किया गया है।
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रास्ते को लेकर फंसा हुआ है पेंच
जिस जगह से मेले तक रास्ता तैयार किया जाता है, उस जगह इस साल पौधारोपण किया जा चुका है। ऐेसे में जिला पंचायत के अधिकारी और वन विभाग के अधिकारी तालमेल बनाना चाह रहे हैं। पौधे लगे होने की वजह से वन विभाग रास्ता बनाने में आनाकानी भी कर सकता है।
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रविवार को जिला पंचायत के अभियंता कपिल टीम को लेकर ट्रैक्टर से गंगा घाट तक पहुंचे। उन्होंने गंगा की धारा और किनारे छोड़े गए रेत का अवलोकन किया। हालांकि इस बार विदुरकुटी से तीन किलोमीटर दूर मेला आयोजन की जगह मिली है।
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कार्तिक पूर्णिमा को गंगा में लाखों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते हैं। जिसके चलते गंगा किनारे तंबुओं का शहर बस जाता है। इस बार पांच नवंबर को मेले का उद्घाटन होगा। जबकि मुख्य स्नान सात और आठ नवंबर को है। जिला पंचायत ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। टीम ने मुुआयना कर यह देखा गया कि मेला लगाने के लिए कौन की जगह उपयुक्त रहेगी। विदुर कुटी से तीन किलोमीटर आगे चलकर भूमि को चिन्हित किया गया है।
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रास्ते को लेकर फंसा हुआ है पेंच
जिस जगह से मेले तक रास्ता तैयार किया जाता है, उस जगह इस साल पौधारोपण किया जा चुका है। ऐेसे में जिला पंचायत के अधिकारी और वन विभाग के अधिकारी तालमेल बनाना चाह रहे हैं। पौधे लगे होने की वजह से वन विभाग रास्ता बनाने में आनाकानी भी कर सकता है।