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गांव में दुष्यंत कुमार का स्मारक चाहते हैं ग्रामीण

Tue, 11 Aug 2020 12:09 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 11 Aug 2020 12:09 AM IST
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Villagers want Dushyant Kumar's memorial in the village
बरुकी के ग्राम राजपुर नवादा में दुष्यंत कुमार स्मृति निर्माणधीन द्वार। - फोटो : BIJNOR
गांव में दुष्यंत कुमार का स्मारक चाहते हैं ग्रामीण
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बिजनौर। हिंदी गजल के जनक कहे जाने वाले दुष्यंत कुमार के गांव में दुष्यंत कुमार को लेकर बेहद सम्मान है, लेकिन ग्रामीणों को दुष्यंत कुमार का कोई स्मारक नहीं बनने का मलाल भी है। दुष्यंत कुमार का जन्म 1 सितंबर 1933 को नजीबाबाद तहसील के गांव राजपुर नवादा में हुआ था। उनकी प्राथमिक शिक्षा भी गांव में ही हुई। इसके बाद वह नहटौर और चंदौसी में भी पढ़े। भोपाल में बसने के बाद दुष्यंत कुमार ने हिंदी में ग़जल लिखीं। उस समय हिंदी में क्लिष्ट कविताएं लिखी जाती थीं। उन्होंने आम बोलचाल की भाषा को अपनी ग़जल में स्थान दिया।

उनके शेर ‘कैसे आकाश में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों’ और ‘मेरे सीने में ना सही तेरे सीने में सही, हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए’ आज भी मंचों पर खूब पढ़े जाते हैं। जनपद के प्रसिद्ध साहित्यकार महेंद्र अश्क के पुत्र वरिष्ठ साहित्यकार अमन कुमार त्यागी ने दो वर्ष पूर्व दुष्यंत कुमार की स्मृति में राजपुर नवादा के निकट एक स्मृति द्वार का निर्माण कराने का बीड़ा उठाया था। उस दौरान तत्कालीन जिलाधिकारी अटल कुमार राय दुष्यंत कुमार की जन्म स्थलि राजपुर नवादा गए थे। अमन त्यागी ने इसके लिए अटल कुमार राय और एसडीएम नजीबाबाद से भी मुलाकात की थी। इसके बाद जिलाधिकारी कोष एवं ब्लॉक नजीबाबाद के सहयोग से पांच लाख 60 हजार रुपये की कीमत से एक स्मृति द्वार के निर्माण को मंजूरी मिल गई थी। लेकिन यह स्मृति द्वार बनते के साथ ही गिर गया। निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग करने पर इस मामले में ठेकेदार की शिकायत भी की गई थी। अमन कुमार त्यागी बताते हैं कि कुछ समय बाद ब्लॉक प्रमुख नजीबाबाद ने आश्वासन दिया था कि फिलहाल गन्ने का सीजन चल रहा है। गन्ने के सीजन के बाद स्मृति द्वार का पुनर्निर्माण किया जाएगा। लगभग डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी अभी तक दुष्यंत कुमार की स्मृति द्वार का निर्माण नहीं किया गया है। ग्राम नवादा निवासी मनोज त्यागी, अतुल त्यागी, यतेंद्र त्यागी आदि ने बताया कि दुष्यंत कुमार स्मृति द्वार का तुरंत निर्माण होना चाहिए।
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