क्षेत्र में विकास के नाम पर वादों से चलाया काम
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विधानसभा चुनाव का शंखनाद बजते ही सियासी दलों के नेता चुनाव मैदान में वोटरों को रिझाने निकल पड़े हैं। ये नेता वोटरों को अपने पक्ष में करने से कोई कसर नहीं छोड़ रहे। बढ़ापुर विधानसभा क्षेत्र ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। मोजा कांशीवाला में पार्श्वनाथ का किला जैन समाज का बहुत बड़ा तीर्थस्थल है। देशभर से जैन समाज के सदस्य इस किले का दर्शन करते आते र्हैं। इस किले में खुदाई के दौरान अभी भी मूर्तियां निकलती हैं। कलवा वीर का प्रसिद्ध मंदिर भी बढ़ापुर में है। देश भर से वाल्मीकि समाज के लोग मंदिर पर प्रसाद चढ़ाने व मन्नत मांगने आते हैं। कहा जाता है कि बढ़ापुर को मुगल शासन काल में बाहर से आए राजपूतों ने बसाया था।
कांशीपुर रियासत के यह क्षेत्र अधीन रहा है। पहाड़ों के नजदीक और जनपद के छोर पर होने के कारण यह विधानसभा क्षेत्र विकास में पिछड़ती रही है। यहां विकास के नाम पर कुछ नहीं हुआ। सड़कों व बिजली की हालत पहले की तरह बदतर है। यही हाल स्वास्थ्य सेवाओं का भी है। पीएचसी होने के बाद भी लोगों को उपचार नहीं मिल पाता। चिकित्सक यहां पर तैनात नहीं हैं। बारिश के दिनों में पहाड़ की नदियों के कहर की वजह से लोगों को दूसरे स्थान पर बसाया जाता है।
बरसात के कहर से लेागों को निजात नहीं मिल सकी। नए परिसीमन में बढ़ापुर नई विधानसभा सीट बनी है। इससे पहले यह क्षेत्र अफजलगढ़ विधानसभा में आता था। बढ़ापुर सीट पर हुए पहले चुनाव में मोहम्मद गाजी दलित-मुस्लिम गठजोड़ से विधायक बन गए। इस बार वे बसपा के टिकट पर धामपुर से चुनाव लड़ रहे हैं। बसपा ने इस सीट से इस बार फहद यजदानी को प्रत्याशी बनाया है। सपा ने बढ़ापुर नगर पंचायत के अध्यक्ष आबिद अंसारी पर दांव खेला है। भाजपा व अन्य दलों ने अपने पत्ते नहीं खोले है। चुनाव मैदान में उतरे नेताओं ने वोटरों के बीच जाकर वादे करने का खेल शुरू कर दिया है। क्षेत्र का विकास कराने व उनकी समस्या का निजात दिलाने का वादा करके नेता लोगों को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रहे हैं।