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हर की पैड़ी की तर्ज पर होगा विदुरकुटी का विकास

Thu, 07 Oct 2021 12:12 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 07 Oct 2021 12:12 AM IST
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Vidurkuti will be developed on the lines of Har ki Paidi
बिजनौर के गंज में स्थित विदुर कुटी। - फोटो : BIJNOR
हर की पैड़ी की तर्ज पर होगा विदुरकुटी का विकास
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बिजनौर। जिले के विदुरकुटी क्षेत्र का पौराणिकता महत्व है। प्राचीन ग्रंथों में भी इसका जिक्र आता है। अब इसे हरिद्वार की हर की पैड़ी की तर्ज पर विकसित करने की तैयारी चल रही है। केवल गंगाजल को ही विदुरकुटी के पास नहीं लाया जाएगा, बल्कि एक पक्की नहर के जरिये पूरा घाट तैयार किया जाएगा। इसके लिए गंगा घाट को विकसित करने की कवायद शुरू हो गई है। पीडब्ल्यूडी इसका प्रस्ताव तैयार करने में जुटा है। पहले चरण में आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी। इस प्रस्ताव पर शासन की मुहर लगने की उम्मीद है।
विदुरकुटी को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासों में एक और नया अध्याय जुड़ रहा है। बता दें कि जिला प्रशासन के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग के अफसर और इंजीनियर विदुरकुटी को विकसित करने के लिए प्रस्ताव बनाने में जुटे हुए हैं। प्रस्ताव में खास है विदुरकुटी गंगा घाट का निर्माण। जिसकी खासियत यह भी है कि यह हरिद्वार की हर की पैड़ी की तरह होगा। हर की पैड़ी पर साल भर एक निर्धारित मात्रा में गंगा जल मुहैया रहता है। घाट की सुंदरता समेत पुल और लाइटों का बेहतरीन प्रबंध है। इसी तरह से विदुरकुटी में भी गंगा का घाट बनाया जाना है। बता दें कि कभी विदुरकुटी के पास से होकर गंगा बहती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है। गंगा की धारा कई किलोमीटर दूर चली गई है। पक्की नहर बनाकर विदुरकुटी के पास पानी लाने का विकल्प तलाशा गया है। अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी सुनील सागर ने बताया कि प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जा रहा है। प्रोजेक्ट पर आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञ भी काम करेंगे।
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छोटा बैराज बनाकर बदला जाएगा रुख
अफसरों ने पहले ऐसे ही खुदाई करके पानी का रुख मोड़ने पर विचार किया था, लेकिन यह बरसात के दिनों में खतरनाक भी साबित हो सकता था। ऐसे में केवल निर्धारित मात्रा में ही विदुरकुटी के पास गंगाजल लाने पर विचार हुआ। सूत्रों की मानें तो छोटा बैराज बनाकर पक्की नहर के जरिये गंगाजल लाया जाएगा। पक्की नहर में घाट और पैड़ी बनाने में भी आसानी होगी। अभी एक कच्चा खाका खींचा गया है। सूत्रों के अनुसार इसमें आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी। जोकि, गंगा की धारा और पानी के बहाव पर सर्वे ही नहीं करेंगे, बल्कि तकनीकी पहलू पर भी रिपोर्ट और सुझाव देंगे। इसके बाद ही प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जाना है।
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विदुरकुटी पर गंगाजल लाना बड़ी बात नहीं थी, लेकिन गलत तरीके से गंगाजल लाने से बाढ़ का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए इसका पूरा प्रोजेक्ट बन रहा है। प्रोजेक्ट को शासन को भेजा जाएगा। शासन की अनुमति मिलते ही इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा - उमेश मिश्रा, डीएम।
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