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उदयनवीरा के सिर जीत का सेहरा
ब्यूरो/ अमर उजाला, बिजनौर
Updated Fri, 08 Jan 2016 12:22 AM IST
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बिजनौर में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में जीत का सेहरा विधायक रुचिवीरा के पति प्रत्याशी उदयनवीरा के सिर पर बंधा है। उन्होंने सपा की प्रत्याशी नीलम पारस को छह वोटों से हरा दिया। सपा के सभी दिग्गज नीलम पारस का चुनाव लड़ा रहे थे। यह दिग्गज भी नीलम पारस को जीत नहीं दिला सके।
जिला पंचायत के अध्यक्ष पद के चुनाव में सपा प्रत्याशी नीलम पारस के गुट और सपा से निलंबित विधायक रुचिवीरा के गुट में चुनावी संग्राम चल रहा था। रुचि वीरा के पति उदयन वीरा निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे थे। दोनों गुटों में एक-एक वोट को अपने पाले में करने के लिए जोर आजमाइश चल रही थी। चुनाव के आखिरी वक्त तक दोनों गुट अपनी जीत को लेकर आश्वस्त थे। एक-एक वोट पर नजर रखी जा रही थी। 57 जिला पंचायत सदस्यों को वोट डालना था। पुलिस और प्रशासन की भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच बृहस्पतिवार को चुनाव शुरू हुआ। पुलिस की किलेबंदी ऐसी थी कि कोई भी किले को नहीं भेद सकता था।
नीलम पारस के वोटरों को विकास भवन की ओर से और उदयनवीरा के वोटर बस में भरकर प्रदर्शनी चौक की ओर से आए। सभी जिला पंचायत सदस्यों को कलक्ट्रेट के अंदर भेजा गया। रुचिवीरा को देख कलक्ट्रेट गेट पर सपाइयों ने काफी देर हंगामा भी किया। शाम तीन बजे के बाद शुरू हुई मतगणना में विधायक रुचिवीरा के पति उदयन वीरा को छह वोटों से विजयी घोषित किया गया। उदयन वीरा को 31 और सपा प्रत्याशी नीलम पारस को 25 वोट मिले। एक वोट कैंसल हुआ। उदयन वीरा के चुनाव जीतते ही उनके समर्थकों में खुशी छा गई।
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विजय जुलूस
चुनाव जीतने के बाद उदयन वीरा के समर्थक कलक्ट्रेट के बाहर से ही नारेबाजी कर जुलूस निकालना चाहते थे। पर उन्हें ऐसा करने से साथ चल रहे नेताओं ने ही रोक दिया। उदयन वीरा अपनी पत्नी रूचि वीरा के साथ पैदल वहां से चल दिए। गली मोहल्लों से निकलकर लोग उनके साथ होते गए। इस दौरान बड़ी भीड़ जुट गई। प्रदर्शनी चौक पर उदयन वीरा ने चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। समर्थकों ने उदयन वीरा को फूल मालाओं से लाद दिया। प्रदर्शनी चौक से आगे जीप में खड़ा कर लिया। जुलूस के साथ में अपने कैंप कार्यालय पर पहुंचे और वहां से फिर अपने आवास धर्मनगरी के लिए रवाना हुए। इस दौरान भाजपा विधायक लोकेंद्र चौहान, शिव सेना जिला प्रमुख वीर सिंह, खुशनूद खां, अफजाल, मुकेश दहिया, राहुल शर्मा मौजूद रहे।
सपा प्रत्याशी के खिलाफ थे एकजुट
उदयन वीरा के चुनाव में कई दलों के नेताओं ने उनका साथ दिया है। भाजपा के नूरपुर विधायक लोकेंद्र चौहान, रालोद नेता मुनिदेव शर्मा, बृजवीर सिंह समेत जहां कई नेता खुलकर चुनाव में जुटे थे तो कई ऐसे भी नेता थे जो परदे के पीछे से काम कर रहे थे।
दूसरी बार मिली लालबत्ती
विधायक रूचि वीरा के घर में दूसरी बार जिला पंचायत अध्यक्ष की लालबत्ती आई है। सपा-रालोद गठबंधन सरकार के दौरान वर्ष 2006 में विधायक रूचि वीरा जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज हुईं। बसपा सरकार में वर्ष 2009 में रूचि वीरा के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर उनको कुर्सी से उतार दिया गया था। रूचि वीरा ने भी वर्ष 2006 में एक जनवरी को जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए नामांकन कराया था और अब उनके पति उदयन वीरा ने भी एक जनवरी को ही नामांकन कराया और वो भी लालबत्ती पाने में कामयाब रहे।
ऐसे कैंसल हुआ वोट
जिला पंचायत के चुनाव में पूरे 57 वोट पड़े। इनमे एक वोट कैंसल हुआ। अफसरों के मुताबिक वोट कैंसल इसलिए हुआ कि वोटर ने प्रत्याशी के नाम से ऊपर खाली स्थान में निशान लगा दिया था। विधायक रूचि वीरा खेमे के नेताओं के मुताबिक उदयन वीरा के नाम के ऊपर वोटर ने निशान लगाया था। यह वोट भी उदयन वीरा का ही था।
अनुराधा चौधरी भी आईं
चुनाव के दौरान भाजपा नेता अनुराधा चौधरी भी उदयन वीरा के साथ नजर आईं। अनुराधा चौधरी धर्मनगरी पहुुंची और वहां से जब सदस्यों को बिजनौर लाया जा रहा था तो उनके साथ प्रदर्शनी चौक तक आईं और फिर चली गईं। भाजपा की जिलाध्यक्ष सुमन त्यागी भी उनके साथ रहीं।
सपा के कई दिग्गजों पर गिर सकती है गाज
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में मिली हार की सपा के कई दिग्गजों पर गाज गिर सकती है। ये दिग्गज इस उधेड़बुन में जुट गए हैं कि गाज गिरने से उनकी जान कैसे बचे। सभी हाईकमान को अपनी सफाई देने का मसौदा तैयार कर रहे हैं।
सपा प्रत्याशी नीलम पारस के चुनाव की कमान मंत्री मूलचंद चौहान के हाथों में थी। नीलम पारस को टिकट दिलवाने में जिलाध्यक्ष अनिल यादव का बड़ा हाथ रहा है। सपा के राष्ट्रीय महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव से नीलम पारस को टिकट देने की झंडी जिलाध्यक्ष की वजह से ही मिली। हालांकि मनोज पारस के भी रामगोपाल यादव से गहरे संबंध हैं। सपा के दिग्गज पार्टी हाईकमान को इस बात का पूरा भरोसा दिलाकर आए थे कि चुनाव में वह सीट निकालकर लाएंगे। इन नेताओं के कहने पर ही विधायक रूचि वीरा को विधायक दल से निलंबित किया गया व पूर्व सांसद यशवीर सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष जमील अहमद अंसारी, उदयन वीरा व नगीना के चेयरमैन शेख खलीलुर्रहमान को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया था।
सपा के सीट गंवाने से मंत्री मूलचंद चौहान व सपा जिलाध्यक्ष अनिल यादव पर इस हार की गाज गिर सकती है। राजनीतिक गलियारों में भी इस बात की चर्चा जोरों पर है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक हाईकमान की गाज से गिरने के लिए सपा के दिग्गज नेताओं ने रास्ता ढूंढ़ना शुरू कर दिया है। चुनाव में हार का कारण क्या रहा, किसने सहयोग नहीं किया, यह सब बातें हाईकमान को बताने की रणनीति बनाई जा रही है। चुनाव में हार की गाज प्रशासनिक अफसरों पर भी गिरने की उम्मीद बन गई है। कई अफसर तो अपना बोरिया बिस्तर बांधने की तैयारी कर रहे हैं। उन्हें डर है कि देर सवेर उन पर गाज जरूर गिरेगी। जिले के सपा नेता भी इन अफसरों से खासे नाराज हैं। सपा नेता जैसा चाहते थे, अफसरों ने उस तरह उनकी मदद नहीं की।
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जिला पंचायत के अध्यक्ष पद के चुनाव में सपा प्रत्याशी नीलम पारस के गुट और सपा से निलंबित विधायक रुचिवीरा के गुट में चुनावी संग्राम चल रहा था। रुचि वीरा के पति उदयन वीरा निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे थे। दोनों गुटों में एक-एक वोट को अपने पाले में करने के लिए जोर आजमाइश चल रही थी। चुनाव के आखिरी वक्त तक दोनों गुट अपनी जीत को लेकर आश्वस्त थे। एक-एक वोट पर नजर रखी जा रही थी। 57 जिला पंचायत सदस्यों को वोट डालना था। पुलिस और प्रशासन की भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच बृहस्पतिवार को चुनाव शुरू हुआ। पुलिस की किलेबंदी ऐसी थी कि कोई भी किले को नहीं भेद सकता था।
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नीलम पारस के वोटरों को विकास भवन की ओर से और उदयनवीरा के वोटर बस में भरकर प्रदर्शनी चौक की ओर से आए। सभी जिला पंचायत सदस्यों को कलक्ट्रेट के अंदर भेजा गया। रुचिवीरा को देख कलक्ट्रेट गेट पर सपाइयों ने काफी देर हंगामा भी किया। शाम तीन बजे के बाद शुरू हुई मतगणना में विधायक रुचिवीरा के पति उदयन वीरा को छह वोटों से विजयी घोषित किया गया। उदयन वीरा को 31 और सपा प्रत्याशी नीलम पारस को 25 वोट मिले। एक वोट कैंसल हुआ। उदयन वीरा के चुनाव जीतते ही उनके समर्थकों में खुशी छा गई।
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विजय जुलूस
चुनाव जीतने के बाद उदयन वीरा के समर्थक कलक्ट्रेट के बाहर से ही नारेबाजी कर जुलूस निकालना चाहते थे। पर उन्हें ऐसा करने से साथ चल रहे नेताओं ने ही रोक दिया। उदयन वीरा अपनी पत्नी रूचि वीरा के साथ पैदल वहां से चल दिए। गली मोहल्लों से निकलकर लोग उनके साथ होते गए। इस दौरान बड़ी भीड़ जुट गई। प्रदर्शनी चौक पर उदयन वीरा ने चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। समर्थकों ने उदयन वीरा को फूल मालाओं से लाद दिया। प्रदर्शनी चौक से आगे जीप में खड़ा कर लिया। जुलूस के साथ में अपने कैंप कार्यालय पर पहुंचे और वहां से फिर अपने आवास धर्मनगरी के लिए रवाना हुए। इस दौरान भाजपा विधायक लोकेंद्र चौहान, शिव सेना जिला प्रमुख वीर सिंह, खुशनूद खां, अफजाल, मुकेश दहिया, राहुल शर्मा मौजूद रहे।
सपा प्रत्याशी के खिलाफ थे एकजुट
उदयन वीरा के चुनाव में कई दलों के नेताओं ने उनका साथ दिया है। भाजपा के नूरपुर विधायक लोकेंद्र चौहान, रालोद नेता मुनिदेव शर्मा, बृजवीर सिंह समेत जहां कई नेता खुलकर चुनाव में जुटे थे तो कई ऐसे भी नेता थे जो परदे के पीछे से काम कर रहे थे।
दूसरी बार मिली लालबत्ती
विधायक रूचि वीरा के घर में दूसरी बार जिला पंचायत अध्यक्ष की लालबत्ती आई है। सपा-रालोद गठबंधन सरकार के दौरान वर्ष 2006 में विधायक रूचि वीरा जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज हुईं। बसपा सरकार में वर्ष 2009 में रूचि वीरा के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर उनको कुर्सी से उतार दिया गया था। रूचि वीरा ने भी वर्ष 2006 में एक जनवरी को जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए नामांकन कराया था और अब उनके पति उदयन वीरा ने भी एक जनवरी को ही नामांकन कराया और वो भी लालबत्ती पाने में कामयाब रहे।
ऐसे कैंसल हुआ वोट
जिला पंचायत के चुनाव में पूरे 57 वोट पड़े। इनमे एक वोट कैंसल हुआ। अफसरों के मुताबिक वोट कैंसल इसलिए हुआ कि वोटर ने प्रत्याशी के नाम से ऊपर खाली स्थान में निशान लगा दिया था। विधायक रूचि वीरा खेमे के नेताओं के मुताबिक उदयन वीरा के नाम के ऊपर वोटर ने निशान लगाया था। यह वोट भी उदयन वीरा का ही था।
अनुराधा चौधरी भी आईं
चुनाव के दौरान भाजपा नेता अनुराधा चौधरी भी उदयन वीरा के साथ नजर आईं। अनुराधा चौधरी धर्मनगरी पहुुंची और वहां से जब सदस्यों को बिजनौर लाया जा रहा था तो उनके साथ प्रदर्शनी चौक तक आईं और फिर चली गईं। भाजपा की जिलाध्यक्ष सुमन त्यागी भी उनके साथ रहीं।
सपा के कई दिग्गजों पर गिर सकती है गाज
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में मिली हार की सपा के कई दिग्गजों पर गाज गिर सकती है। ये दिग्गज इस उधेड़बुन में जुट गए हैं कि गाज गिरने से उनकी जान कैसे बचे। सभी हाईकमान को अपनी सफाई देने का मसौदा तैयार कर रहे हैं।
सपा प्रत्याशी नीलम पारस के चुनाव की कमान मंत्री मूलचंद चौहान के हाथों में थी। नीलम पारस को टिकट दिलवाने में जिलाध्यक्ष अनिल यादव का बड़ा हाथ रहा है। सपा के राष्ट्रीय महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव से नीलम पारस को टिकट देने की झंडी जिलाध्यक्ष की वजह से ही मिली। हालांकि मनोज पारस के भी रामगोपाल यादव से गहरे संबंध हैं। सपा के दिग्गज पार्टी हाईकमान को इस बात का पूरा भरोसा दिलाकर आए थे कि चुनाव में वह सीट निकालकर लाएंगे। इन नेताओं के कहने पर ही विधायक रूचि वीरा को विधायक दल से निलंबित किया गया व पूर्व सांसद यशवीर सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष जमील अहमद अंसारी, उदयन वीरा व नगीना के चेयरमैन शेख खलीलुर्रहमान को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया था।
सपा के सीट गंवाने से मंत्री मूलचंद चौहान व सपा जिलाध्यक्ष अनिल यादव पर इस हार की गाज गिर सकती है। राजनीतिक गलियारों में भी इस बात की चर्चा जोरों पर है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक हाईकमान की गाज से गिरने के लिए सपा के दिग्गज नेताओं ने रास्ता ढूंढ़ना शुरू कर दिया है। चुनाव में हार का कारण क्या रहा, किसने सहयोग नहीं किया, यह सब बातें हाईकमान को बताने की रणनीति बनाई जा रही है। चुनाव में हार की गाज प्रशासनिक अफसरों पर भी गिरने की उम्मीद बन गई है। कई अफसर तो अपना बोरिया बिस्तर बांधने की तैयारी कर रहे हैं। उन्हें डर है कि देर सवेर उन पर गाज जरूर गिरेगी। जिले के सपा नेता भी इन अफसरों से खासे नाराज हैं। सपा नेता जैसा चाहते थे, अफसरों ने उस तरह उनकी मदद नहीं की।