{"_id":"5f04ada58ebc3e42dc3a4733","slug":"two-scavengers-suspended-answer-to-four-summoned-bijnor-news-mrt4901279172","type":"story","status":"publish","title_hn":"दो सफाईकर्मी सस्पेंड, चार का जवाब तलब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दो सफाईकर्मी सस्पेंड, चार का जवाब तलब
विज्ञापन
दो सफाईकर्मी सस्पेंड, चार का जवाब तलब
बिजनौर। डीएम के निर्देश पर गांवों की साफ सफाई जांचने के लिए किए गए औचक निरीक्षण में पंचायतों में हो रहे खेल की पोल खुल गई। निरीक्षण में सफाई कर्मचारी की जगह दूसरा व्यक्ति काम करता मिला है। कई कर्मचारी ड्यूटी से नदारद मिले। इस मामले में आरोप में दो सफाई कर्मचारी सस्पेंड कर दिए गए हैं। प्रधान को आरोपी सफाईकर्मी का वेतन निकलवाने का प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए वित्तीय अधिकार सीज करने की कार्रवाई शुरू हो गई है।
ग्रामीणों की ओर से साफ सफाई में बडे़ पैमाने पर घपले की शिकायत की जा रही थी। डीपीआरओ सतीश कुमार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मंगलवार को जलीलपुर ब्लॉक की तीन ग्राम पंचायतों में छापा मारा। उन्होंने बताया कि सुबह 10:30 बजे जलीलपुर ग्राम पंचायत में पहुंचे थे। पंचायत में राजकुमार तथा रेणु सफाईकर्मी हैं। राजकुमार ड्यूटी पर मिला। जबकि रेणु की जगह शुभम नामक व्यक्ति काम करता मिला। शुभम ने बताया कि रेणु एक साल से अपने पति के साथ दिल्ली में रह रही है। उसे छह हजार रुपये मासिक देती है। प्रधान की जगह उनके पति अय्यूब आए। पूछने पर वह कोई जवाब नहीं दे सके। इस मामले में रेणु को सस्पेंड कर दिया गया है। कर्मचारी का वेतन निकलवाने में प्रधान की भूमिका संदिग्ध मिली। वहीं, नवादा गांव में राजेश कुमार नदारद मिला। उसे भी सस्पेंड कर दिया गया है। सादाबाद गांव में बिजेंद्र व राजेंद्र सफाईकर्मी है। तीनों गांवों में गंदगी के अंबार मिले। तीनों गांव के चार सफाईकर्मियों का जवाब तलब किया गया है। जलीलपुर ग्राम प्रधान के वित्तीय अधिकार सीज करने की पत्रावली डीएम को भेजी जा रही है।
एडीओ तथा ग्राम सचिव की भूमिका संदिग्ध
बिजनौर। डीपीआरओ सतीश कुमार के अनुसार जलीलपुर मामले में एडीओ पंचायत तथा ग्राम पंचायत सचिव की भूमिका संदिग्ध है। कहा कि रेणु एक साल से ड्यूटी पर नहीं आ रही है। दूसरा व्यक्ति काम कर रहा है। लगता है कि अधिकारियों को गुमराह करने के लिए मामले को साजिशन छिपाया है। दोनों के खिलाफ कार्रवाई होगी। वहीं, सूत्रों के अनुसार जिले के सैकड़ों प्रधानों की शिकायतों की जांच लंबित हैं। जांच अधिकारी दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। जो जांच होती भी है उनमें खानापूर्ति कर दी जाती है। सही जांच होने पर बड़े घपले सामने आ सकते हैं। डीपीआरओ के मुताबिक शिकायतों की जांच दूसरे विभाग के अधिकारी करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
बिजनौर। डीएम के निर्देश पर गांवों की साफ सफाई जांचने के लिए किए गए औचक निरीक्षण में पंचायतों में हो रहे खेल की पोल खुल गई। निरीक्षण में सफाई कर्मचारी की जगह दूसरा व्यक्ति काम करता मिला है। कई कर्मचारी ड्यूटी से नदारद मिले। इस मामले में आरोप में दो सफाई कर्मचारी सस्पेंड कर दिए गए हैं। प्रधान को आरोपी सफाईकर्मी का वेतन निकलवाने का प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए वित्तीय अधिकार सीज करने की कार्रवाई शुरू हो गई है।
ग्रामीणों की ओर से साफ सफाई में बडे़ पैमाने पर घपले की शिकायत की जा रही थी। डीपीआरओ सतीश कुमार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मंगलवार को जलीलपुर ब्लॉक की तीन ग्राम पंचायतों में छापा मारा। उन्होंने बताया कि सुबह 10:30 बजे जलीलपुर ग्राम पंचायत में पहुंचे थे। पंचायत में राजकुमार तथा रेणु सफाईकर्मी हैं। राजकुमार ड्यूटी पर मिला। जबकि रेणु की जगह शुभम नामक व्यक्ति काम करता मिला। शुभम ने बताया कि रेणु एक साल से अपने पति के साथ दिल्ली में रह रही है। उसे छह हजार रुपये मासिक देती है। प्रधान की जगह उनके पति अय्यूब आए। पूछने पर वह कोई जवाब नहीं दे सके। इस मामले में रेणु को सस्पेंड कर दिया गया है। कर्मचारी का वेतन निकलवाने में प्रधान की भूमिका संदिग्ध मिली। वहीं, नवादा गांव में राजेश कुमार नदारद मिला। उसे भी सस्पेंड कर दिया गया है। सादाबाद गांव में बिजेंद्र व राजेंद्र सफाईकर्मी है। तीनों गांवों में गंदगी के अंबार मिले। तीनों गांव के चार सफाईकर्मियों का जवाब तलब किया गया है। जलीलपुर ग्राम प्रधान के वित्तीय अधिकार सीज करने की पत्रावली डीएम को भेजी जा रही है।
विज्ञापन
एडीओ तथा ग्राम सचिव की भूमिका संदिग्ध
बिजनौर। डीपीआरओ सतीश कुमार के अनुसार जलीलपुर मामले में एडीओ पंचायत तथा ग्राम पंचायत सचिव की भूमिका संदिग्ध है। कहा कि रेणु एक साल से ड्यूटी पर नहीं आ रही है। दूसरा व्यक्ति काम कर रहा है। लगता है कि अधिकारियों को गुमराह करने के लिए मामले को साजिशन छिपाया है। दोनों के खिलाफ कार्रवाई होगी। वहीं, सूत्रों के अनुसार जिले के सैकड़ों प्रधानों की शिकायतों की जांच लंबित हैं। जांच अधिकारी दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। जो जांच होती भी है उनमें खानापूर्ति कर दी जाती है। सही जांच होने पर बड़े घपले सामने आ सकते हैं। डीपीआरओ के मुताबिक शिकायतों की जांच दूसरे विभाग के अधिकारी करते हैं।
विज्ञापन