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दो निजी मंडी खुलीं, समिति में नहीं हुआ पंजीकरण
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दो निजी मंडी खुलीं, समिति में नहीं हुआ पंजीकरण
बिजनौर। कृषि सुधार कानूनों की वजह से जिला मुख्यालय पर दो निजी मंडी समिति खुल चुकी हैं। यहां पर व्यापारी और किसान आढ़तियों के माध्यम से सब्जी, फल आदि खरीदने और बेचने का काम करने भी लगे हैं। अभी किसी भी मंडी ने मंडी समिति विभाग में पंजीकरण नहीं कराया है। पंजीकरण न होने से यहां पर व्यापारियों से लिए जाने वाले टैक्स का हिस्सा नहीं लिया जा रहा है।
जिला मुख्यालय पर मंडी समिति खोलने की कोशिश चार दशक से चल रही थी, लेकिन ये मुमकिन नहीं हो पाया। पहले अफसरों ने किसानों से जमीन खरीदने में हीला हवाली की और बाद में किसान मंडी के लिए सर्किल रेट पर जमीन बेचने को तैयार नहीं थे। सब्जी व फल मंडी में ही थोड़ी सी जगह में किसी तरह सब्जी, फल की आढ़त लगती थी। सरकार ने कृषि कानूनों में सुधार करके मंडी समिति परिसर से बाहर किसान से जमीन खरीदने पर व्यापारियों का मंडी शुल्क माफ कर दिया। इससे पहले व्यापारियों से आढ़ती साढ़े तीन प्रतिशत मंडी शुल्क लेते थे। इसमें से दो प्रतिशत मंडी समिति में जमा करना होता था। इससे जिला मुख्यालय के मंडी समिति कार्यालय को करीब एक करोड़ का राजस्व मिलता था। निजी मंडी खोलने की छूट दे दी। जिला मुख्यालय पर दो निजी मंडी एक ईदगाह रोड पर और एक चांदपुर रोड पर खुली। यहां रोज काफी व्यापार होता है। अब सरकार ने व्यापारियों से आढ़त लेने की व्यवस्था को फिर से बहाल कर दिया है। आढ़ती व्यापारियों से दो प्रतिशत मंडी शुल्क लेंगे। इसमें से डेढ़ प्रतिशत विभाग को जाएगा और बाकी हिस्सा निजी मंडी समिति स्थल में मूलभूत सुविधाओं पर खर्च होगा।
किसानों को हुआ फायदा
मंडी समिति में फसल ले जाने वाले सुजीत कुमार, नरेश, लोकेंद्र आदि का कहना है कि निजी मंडी खुलने से उन्हें खुला बाजार मिला है। अगर किसी दिन माल न बिके तो उसे आढ़तियों के गोदाम में रखने की भी व्यवस्था हो जाती है। इससे किराया और पैसा बचता है। नवीन थोक फल एवं सब्जी मंडी अध्यक्ष शमशाद अंसारी के अनुसार निजी मंडी खुलने से फायदा हुआ है। जो भी शासन निर्देश करेगा उसका पालन किया जाएगा। मंडी समिति सचिव अर्जुन सिंह के अनुसार अभी विभाग में किसी निजी मंडी का पंजीकरण नहीं हुआ है।
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बिजनौर। कृषि सुधार कानूनों की वजह से जिला मुख्यालय पर दो निजी मंडी समिति खुल चुकी हैं। यहां पर व्यापारी और किसान आढ़तियों के माध्यम से सब्जी, फल आदि खरीदने और बेचने का काम करने भी लगे हैं। अभी किसी भी मंडी ने मंडी समिति विभाग में पंजीकरण नहीं कराया है। पंजीकरण न होने से यहां पर व्यापारियों से लिए जाने वाले टैक्स का हिस्सा नहीं लिया जा रहा है।
जिला मुख्यालय पर मंडी समिति खोलने की कोशिश चार दशक से चल रही थी, लेकिन ये मुमकिन नहीं हो पाया। पहले अफसरों ने किसानों से जमीन खरीदने में हीला हवाली की और बाद में किसान मंडी के लिए सर्किल रेट पर जमीन बेचने को तैयार नहीं थे। सब्जी व फल मंडी में ही थोड़ी सी जगह में किसी तरह सब्जी, फल की आढ़त लगती थी। सरकार ने कृषि कानूनों में सुधार करके मंडी समिति परिसर से बाहर किसान से जमीन खरीदने पर व्यापारियों का मंडी शुल्क माफ कर दिया। इससे पहले व्यापारियों से आढ़ती साढ़े तीन प्रतिशत मंडी शुल्क लेते थे। इसमें से दो प्रतिशत मंडी समिति में जमा करना होता था। इससे जिला मुख्यालय के मंडी समिति कार्यालय को करीब एक करोड़ का राजस्व मिलता था। निजी मंडी खोलने की छूट दे दी। जिला मुख्यालय पर दो निजी मंडी एक ईदगाह रोड पर और एक चांदपुर रोड पर खुली। यहां रोज काफी व्यापार होता है। अब सरकार ने व्यापारियों से आढ़त लेने की व्यवस्था को फिर से बहाल कर दिया है। आढ़ती व्यापारियों से दो प्रतिशत मंडी शुल्क लेंगे। इसमें से डेढ़ प्रतिशत विभाग को जाएगा और बाकी हिस्सा निजी मंडी समिति स्थल में मूलभूत सुविधाओं पर खर्च होगा।
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किसानों को हुआ फायदा
मंडी समिति में फसल ले जाने वाले सुजीत कुमार, नरेश, लोकेंद्र आदि का कहना है कि निजी मंडी खुलने से उन्हें खुला बाजार मिला है। अगर किसी दिन माल न बिके तो उसे आढ़तियों के गोदाम में रखने की भी व्यवस्था हो जाती है। इससे किराया और पैसा बचता है। नवीन थोक फल एवं सब्जी मंडी अध्यक्ष शमशाद अंसारी के अनुसार निजी मंडी खुलने से फायदा हुआ है। जो भी शासन निर्देश करेगा उसका पालन किया जाएगा। मंडी समिति सचिव अर्जुन सिंह के अनुसार अभी विभाग में किसी निजी मंडी का पंजीकरण नहीं हुआ है।
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