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अमानगढ़ में दिखे रॉयल बंगाल टाइगर के दो शावक
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बिजनौर में अमानगढ़ रेंज में घूमता बाघ का जोड़ा।
- फोटो : BIJNOR
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अमानगढ़ रेंज में दिखे बंगाल टाइगर के दो शावक
बिजनौर। अमानगढ़ रेंज में बंगाल टाइगर का कुनबा बढ़ता जा रहा है। अब वन विभाग के कर्मचारियों को अमानगढ़ रेंज में रॉयल बंगाल टाइगर के दो शावक भी दिखे हैं, जबकि जुलाई में पहली बार हुई गणना में बाघ के शावक नहीं दिखे थे। पहली बार अमानगढ़ में बाघ के शावक दिखे हैं। वन विभाग के अधिकारी गदगद हैं। अभी अमानगढ़ में और भी टाइगर होने की बात कही जा रही है।
बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। इसी साल देश में पहली बार बाघों की गणना कैमरों की मदद से की गई है। 2009 में पहली बार जब बाघों की गणना हुई थी तब अमानगढ़ रेंज में 12 बाघ मिले थे, लेकिन हाल ही में हुई बाघों की संख्या में इजाफा हुआ था। बाघों की संख्या बढ़कर 22 हो गई है। अमानगढ़ रेंज में बाघों का कुनबा बढ़ गया था। रेंज में बाघों की गणना के लिए 90 कैमरे लगाए गए थे। इन कैमरों में अलग अलग जगह पर बाघों की तस्वीर कैद हुई। कद, काठी, हाव भाव आदि के आधार पर विशेषज्ञों की टीम ने बाघों की गणना की थी। गणना में 22 बाघ मिले थे।। हालांकि यह भी माना जा रहा है कि कुछ बाघ कैमरे के सर्विलांस में आने से रह गए होंगे। अमानगढ़ वन रेंज कार्बेट पार्क से सटा हुआ है। बाघों का कार्बेट पार्क से अमानगढ़ रेंज में आना जाना है। अब अमानगढ़ रेंज में वन विभाग को बाघ के दो शावक भी दिखाई दिए हैं। बाघ के शावक कैमरों से गणना के समय नहीं दिखे थे। शावक दिखने से वन विभाग के कर्मचारी भी गदगद हैं। माना जा रहा है कि अमानगढ़ में अभी और भी शावक हो सकते हैं। वन दरोगा जयपाल सिंह के मुताबिक एक बाघिन के साथ उसके दो शावक दिखाई दिए हैं।
कभी जोड़े में नहीं रहता बाघ
बाघिन एक बार में एक से छह बच्चे तक दे सकती है। बाघ कभी जोड़े में नहीं रहते हैं। केवल प्रणय के समय ही साथ रहते हैं। बाघिन अकेले ही अपने बच्चों को पालती है।
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बाघिन ही सिखाती है बच्चों को शिकार करना
बाघिन ही अपने बच्चों को शिकार करना, तैरना आदि सिखाती है। लेकिन बच्चों के बड़े होने पर शिकार का ज्यादा हिस्सा खाने को लेकर झगड़ा होने लगता है। तब बच्चे खुद ही मां के पास से भाग जाते हैं।
कुदरती रूप से भी इलाके का राजा
बाघ तीन साल में व्यस्त होता है। बाघ कुदरती रूप से भी अपने इलाके का राजा होता है। वयस्क बाघ अपना इलाका खुद तय करता है। उसके इलाके में कोई और बाघ या बाघिन घुस आए तो दोनों में वर्चस्व के लिए लड़ाई होती है। ऐसी लड़ाइयों में कभी कभी बूढ़े बाघों को अपनी जान से हाथ भी धोना पड़ जाता है।
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बिजनौर। अमानगढ़ रेंज में बंगाल टाइगर का कुनबा बढ़ता जा रहा है। अब वन विभाग के कर्मचारियों को अमानगढ़ रेंज में रॉयल बंगाल टाइगर के दो शावक भी दिखे हैं, जबकि जुलाई में पहली बार हुई गणना में बाघ के शावक नहीं दिखे थे। पहली बार अमानगढ़ में बाघ के शावक दिखे हैं। वन विभाग के अधिकारी गदगद हैं। अभी अमानगढ़ में और भी टाइगर होने की बात कही जा रही है।
बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। इसी साल देश में पहली बार बाघों की गणना कैमरों की मदद से की गई है। 2009 में पहली बार जब बाघों की गणना हुई थी तब अमानगढ़ रेंज में 12 बाघ मिले थे, लेकिन हाल ही में हुई बाघों की संख्या में इजाफा हुआ था। बाघों की संख्या बढ़कर 22 हो गई है। अमानगढ़ रेंज में बाघों का कुनबा बढ़ गया था। रेंज में बाघों की गणना के लिए 90 कैमरे लगाए गए थे। इन कैमरों में अलग अलग जगह पर बाघों की तस्वीर कैद हुई। कद, काठी, हाव भाव आदि के आधार पर विशेषज्ञों की टीम ने बाघों की गणना की थी। गणना में 22 बाघ मिले थे।। हालांकि यह भी माना जा रहा है कि कुछ बाघ कैमरे के सर्विलांस में आने से रह गए होंगे। अमानगढ़ वन रेंज कार्बेट पार्क से सटा हुआ है। बाघों का कार्बेट पार्क से अमानगढ़ रेंज में आना जाना है। अब अमानगढ़ रेंज में वन विभाग को बाघ के दो शावक भी दिखाई दिए हैं। बाघ के शावक कैमरों से गणना के समय नहीं दिखे थे। शावक दिखने से वन विभाग के कर्मचारी भी गदगद हैं। माना जा रहा है कि अमानगढ़ में अभी और भी शावक हो सकते हैं। वन दरोगा जयपाल सिंह के मुताबिक एक बाघिन के साथ उसके दो शावक दिखाई दिए हैं।
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कभी जोड़े में नहीं रहता बाघ
बाघिन एक बार में एक से छह बच्चे तक दे सकती है। बाघ कभी जोड़े में नहीं रहते हैं। केवल प्रणय के समय ही साथ रहते हैं। बाघिन अकेले ही अपने बच्चों को पालती है।
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बाघिन ही सिखाती है बच्चों को शिकार करना
बाघिन ही अपने बच्चों को शिकार करना, तैरना आदि सिखाती है। लेकिन बच्चों के बड़े होने पर शिकार का ज्यादा हिस्सा खाने को लेकर झगड़ा होने लगता है। तब बच्चे खुद ही मां के पास से भाग जाते हैं।
कुदरती रूप से भी इलाके का राजा
बाघ तीन साल में व्यस्त होता है। बाघ कुदरती रूप से भी अपने इलाके का राजा होता है। वयस्क बाघ अपना इलाका खुद तय करता है। उसके इलाके में कोई और बाघ या बाघिन घुस आए तो दोनों में वर्चस्व के लिए लड़ाई होती है। ऐसी लड़ाइयों में कभी कभी बूढ़े बाघों को अपनी जान से हाथ भी धोना पड़ जाता है।