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Bijnor News: पुल की संपर्क सड़क बचाने के लिए ''जियोट्यूब'' पर भरोसा
Fri, 07 Jul 2023 11:22 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Fri, 07 Jul 2023 11:22 PM IST
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- 700 टन वजन होगा एक जियोट्यूब में, गंगा में उतारी सुपर प्रेशर मड मशीन
फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
जलीलपुर/चांदपुर (बिजनौर)। मेरठ के हस्तिनापुर व बिजनौर के जलीलपुर के मध्य गंगा नदी पर बने पुल की संपर्क सड़क बार-बार क्षतिग्रस्त हो जा रही है। बीते एक वर्ष में इस सड़क को बचाने के लिए जितने भी प्रयास किए गए, गंगा की धार के आगे सब विफल रहे। अबकी बार सड़क को कटान से बचाने के लिए भारी भरकम ''जियोट्यूब'' लगाने की तैयारी चल रही है। एक जियोट्यूब करीब 700 टन वजन की होगी।
हस्तिनापुर व जलीलपुर के मध्य गंगा नदी पर पुल निर्माण के बाद भी सफर सु़खद नहीं हो सका है। प्रत्येक वर्ष बरसात के मौसम में कभी गंगा की बाढ़ का पानी सड़क बहने से, कभी सड़क में कटान होने से यातायात बंद हो जाता है। बरसात के मौसम में इस मार्ग से सफर करना संशय भरा रहता है, पता नहीं कब यातायात बंद हो जाए।
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बीते वर्ष 30 जुलाई को गंगा की धार के आगे पुल के निकट संपर्क सड़क धराशायी होकर पानी के साथ बह गई थी। चार माह तक सभी प्रकार के वाहनों का आवागमन बंद रहा था। मजबूरी में राहगीरों ने नाव और सीढ़ी का सहारा लेकर गंगा पार की थी। एक वर्ष से संपर्क सड़क को सुरक्षित रखना लोकनिर्माण विभाग के लिए चुनौती बना है। जुलाई 2022 से लोकनिर्माण विभाग मेरठ अनेक प्रयोग कर चुका है, मगर गंगा का जलस्तर बढ़ते ही फिर से कटान शुरू हो जाता है। जुलाई 2022 में गंगा पुल के निकट अप्रोच सड़क पानी के साथ बहने के बाद कटान रोकने के लिए बोल्डर (बड़े पत्थर), बालू भरे बोरे, लकडी की बल्लियों की दीवार आदि सब पानी के साथ बहने के बाद ''स्टील वायर क्रेट वाल'' बनाई। स्टील वायर क्रेट वाल ने कफी हद तक कटान को रोका था। गंगा का जलस्तर कम होने पर स्टील वायर क्रेट वाल को खोल लिया गया। अबकी बार जून माह में कटान होना शुरू हो गया था। 26 जून 2023 को कटान के चलते फिर से सड़क क्षतिग्रस्त हो गई।
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अनेक प्रयोगों के बाद अब भारी भरकम जियोट्यूब लगाकर उसकी दीवार बनाने की तैयारी शुरू की गई है। बुधवार से ''नायलान क्रेट वाल'' के द्वारा जियोट्यूब के लिए बैस तैयार किया जा रहा है। बृहस्पतिवार को जलस्तर बढ़ने पर बैस बनाने का काम बंद रहा। शुक्रवार से फिर काम शुरू किया गया है। जियोट्यूब में बालू भरने के लिए ''सुपर प्रेशर मड मशीन'' को गंगा में उतारा गया। यह मशीन देखने में मोटर बोट जैसी है। इसकी मदद से विशाल आकार की जियोट्यूब में प्रेशर से बालू भरा जाएगा। बालू भरने के बाद एक जियोट्यूब करीब 700 टन वजनी हो जाएगी। भारी वजन के चलते जियोट्यूब को कटान रोकने में सक्षम माना जा रहा है। क्षेत्र में पहली बार जियोट्यूब तकनीक से कटान रोकने का प्रयोग किया जा रहा है।
क्या है जियोट्यूब
जियोट्यूब विशेष प्रकार की सामग्री से बनी एक विशाल आकार की ट्यूब है। बैस तैयार कर उस पर जियोट्यूब को रखा जाता है, फिर उसमें सुपर प्रेशर मड मशीन की मदद से बालू भरा जाता है। एक जियोट्यूब की लंबाई करीब 65 फीट, व्यास (गोलाई) 15 फीट होती है। एक जियोट्यूब बालू भरने के बाद करीब 700 टन वजनी बन जाती है।