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धनतेरस पर बन रहा त्रिपुष्कर योग होगा तीन गुना फलदायी:पंडित ललित शर्मा
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धनतेरस पर बन रहा त्रिपुष्कर योग, होगा तीन गुना फलदायी
बिजनौर। धार्मिक संस्थान विष्णुलोक के ज्योतिषविद पंडित ललित शर्मा ने बताया कि धनतेरस पर प्रदोष काल शाम 5:35 मिनट से 8:14 मिनट तक और वृषभ काल शाम 6: 18 मिनट से शाम 8: 14 मिनट तक रहेगा। इन दोनों शुभ काल में पूजन करना लाभदायक रहेगा।
पंडित ललित शर्मा के अनुसार धनतेरस को ग्रंथों में धन त्रयोदशी भी कहा गया है। इस बार धनतेरस पर त्रिपुष्कर योग बन रहा है। इस दिन खरीदी गई वस्तु में तीन गुना वृद्धि होती है। त्रिपुष्कर योग तिथि, वार और नक्षत्र के संयोग से बन रहा है। इस दिन प्रात: काल द्वादशि तिथि है। मंगलवार का दिन है और उत्तरफाल्गुनी नक्षत्र है। इस योग में किया गया कार्य तीन गुना फल देता है। धनतेरस पर्व कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस बार त्रयोदशी तिथि दो नवंबर को सुबह 11:31 मिनट से तीन नवंबर के सुबह 9:02 तक रहेगी। धनतेरस आयुर्वेद के प्रवर्तक भगवान धनवंतरि के अवतार का भी पर्व है। इस पर्व का उद्देश्य कुटूंब में असाध्य रोगों व अकाल मृत्यु से छुटकारा पाने के लिए धनवंतरि भगवान का पूजन किया जाता है। अकाल मृत्यु से छुटकारा पाने के लिए धनतेरस पर संध्या काल को यमराज के लिए आटे का चौमुखा दीपक बनाकर घर के बाहर दीपदान करना चाहिए।
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बिजनौर। धार्मिक संस्थान विष्णुलोक के ज्योतिषविद पंडित ललित शर्मा ने बताया कि धनतेरस पर प्रदोष काल शाम 5:35 मिनट से 8:14 मिनट तक और वृषभ काल शाम 6: 18 मिनट से शाम 8: 14 मिनट तक रहेगा। इन दोनों शुभ काल में पूजन करना लाभदायक रहेगा।
पंडित ललित शर्मा के अनुसार धनतेरस को ग्रंथों में धन त्रयोदशी भी कहा गया है। इस बार धनतेरस पर त्रिपुष्कर योग बन रहा है। इस दिन खरीदी गई वस्तु में तीन गुना वृद्धि होती है। त्रिपुष्कर योग तिथि, वार और नक्षत्र के संयोग से बन रहा है। इस दिन प्रात: काल द्वादशि तिथि है। मंगलवार का दिन है और उत्तरफाल्गुनी नक्षत्र है। इस योग में किया गया कार्य तीन गुना फल देता है। धनतेरस पर्व कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस बार त्रयोदशी तिथि दो नवंबर को सुबह 11:31 मिनट से तीन नवंबर के सुबह 9:02 तक रहेगी। धनतेरस आयुर्वेद के प्रवर्तक भगवान धनवंतरि के अवतार का भी पर्व है। इस पर्व का उद्देश्य कुटूंब में असाध्य रोगों व अकाल मृत्यु से छुटकारा पाने के लिए धनवंतरि भगवान का पूजन किया जाता है। अकाल मृत्यु से छुटकारा पाने के लिए धनतेरस पर संध्या काल को यमराज के लिए आटे का चौमुखा दीपक बनाकर घर के बाहर दीपदान करना चाहिए।
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