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बिजनौर में काटे जाएंगे पेड़, दूसरे जिलों में तलाश रहे पौधरोपण को जमीन
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बिजनौर में काटे जाएंगे पेड़, दूसरे जिलों में तलाश रहे पौधरोपण के लिए जमीन
बिजनौर। अब इसे क्या माना जाए कि बिजनौर की धरती पर पौधरोपण के लिए जगह नहीं बची या फिर तलाशी नहीं जा रही। बिजनौर में एनएच 119 के चौड़ीकरण में करीब पांच हजार पेड़ काटे जाने हैं। इनके स्थान पर एनएचआई को पौधरोपण कराना है, लेकिन वन विभाग अभी तक जमीन चयनित नहीं कर सका है। हालात यह है कि दूसरे जिलों में भी जमीन तलाशी जा चुकी है, पर उसमें भी अभी तक सफलता नहीं मिली।
राष्ट्रीय राजमार्ग 119 का चौड़ीकरण चल रहा है। बैराज रोड और नजीबाबाद रोड पर करीब पांच हजार पेड़ कटने हैं। इनके स्थान पर दस गुुना पौधे लगाए जाने हैं, लेकिन इसके लिए वन विभाग को जमीन चिह्नित कर बतानी है, ताकि उस पर पौधरोपण हो सके। कमाल यह है कि पिछले छह महीनों में पहले जिले में, फिर दूसरे जिलों में जमीन तलाशी गई, पर कहीं सहमित नहीं बनी। ऐसा नहीं है कि जिले में जमीन नहीं है, बल्कि कई जगहों पर अवैध कब्जे हैं। जिस कारण वहां पौधरोपण होना आसान नहीं है। अब पौधे कहां लगेंगे, इसका निर्धारण अभी तक नहीं हो सका है।
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बिजनौर। अब इसे क्या माना जाए कि बिजनौर की धरती पर पौधरोपण के लिए जगह नहीं बची या फिर तलाशी नहीं जा रही। बिजनौर में एनएच 119 के चौड़ीकरण में करीब पांच हजार पेड़ काटे जाने हैं। इनके स्थान पर एनएचआई को पौधरोपण कराना है, लेकिन वन विभाग अभी तक जमीन चयनित नहीं कर सका है। हालात यह है कि दूसरे जिलों में भी जमीन तलाशी जा चुकी है, पर उसमें भी अभी तक सफलता नहीं मिली।
राष्ट्रीय राजमार्ग 119 का चौड़ीकरण चल रहा है। बैराज रोड और नजीबाबाद रोड पर करीब पांच हजार पेड़ कटने हैं। इनके स्थान पर दस गुुना पौधे लगाए जाने हैं, लेकिन इसके लिए वन विभाग को जमीन चिह्नित कर बतानी है, ताकि उस पर पौधरोपण हो सके। कमाल यह है कि पिछले छह महीनों में पहले जिले में, फिर दूसरे जिलों में जमीन तलाशी गई, पर कहीं सहमित नहीं बनी। ऐसा नहीं है कि जिले में जमीन नहीं है, बल्कि कई जगहों पर अवैध कब्जे हैं। जिस कारण वहां पौधरोपण होना आसान नहीं है। अब पौधे कहां लगेंगे, इसका निर्धारण अभी तक नहीं हो सका है।
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